लेखक परिचय

राघवेन्द्र कुमार 'राघव'

राघवेन्द्र कुमार 'राघव'

शिक्षा - बी. एससी. एल. एल. बी. (कानपुर विश्वविद्यालय) अध्ययनरत परास्नातक प्रसारण पत्रकारिता (माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय जनसंचार एवं पत्रकारिता विश्वविद्यालय) २००९ से २०११ तक मासिक पत्रिका ''थिंकिंग मैटर'' का संपादन विभिन्न पत्र/पत्रिकाओं में २००४ से लेखन सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में २००४ में 'अखिल भारतीय मानवाधिकार संघ' के साथ कार्य, २००६ में ''ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी'' का गठन , अध्यक्ष के रूप में ६ वर्षों से कार्य कर रहा हूँ , पर्यावरण की दृष्टि से ''सई नदी'' पर २०१० से कार्य रहा हूँ, भ्रष्टाचार अन्वेषण उन्मूलन परिषद् के साथ नक़ल , दहेज़ ,नशाखोरी के खिलाफ कई आन्दोलन , कवि के रूप में पहचान |

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राघवेंद्र कुमार

७५ वर्षीय वृद्ध की हत्या ! रणवीर सेना के संस्थापक सदस्य ब्रम्हेश्वर सिंह मुखिया की बिहार के आरा जिले में हत्या कर दी गयी | ध्यान देने वाली बात है कि जब तक मुखिया सक्रिय थे तब तक कोई भी घटना नहीं हुई , लेकिन जेल से लौटने के बाद जब वह राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार करने लगे तो उनकी हत्या हो गयी | पता नहीं क्यों हमारे समाज को क्रान्तिकारिओं से नफरत है ? ब्रम्हेश्वर ने नक्सली आतंकवाद से निबटने के लिए रणवीर सेना का निर्माण किया था , फिर क्यों उन्हें हिक़ारत और नफ़रत मिली | अरे वो तो वह कार्य कर रहे थे जिसे सुरक्षा अमले को करना था | चलो माना कि उनका रास्ता ग़लत था लेकिन वह इस रास्ते पर आये कैसे ? वह तो पुलिस के इन्फोर्मेर हुआ करते थे | २५० हत्याओं के आरोपी पर सरकार एक भी आरोप सिद्ध नहीं कर पाई फिर भी ९ वर्षों तक जेल में बंद रखा | क्या कोई यह बताएगा कि सैकड़ो लोगों के खून के छीटों वाले राजनीतिक भेडिये मलाई क्यों चाट रहे है ? अलगाववादियों को हम क्यों सर पर बिठाएं है ?

मैं किसी अपराधी का न तो बचाव कर रहा हूँ और न ही उसे सही कह रहा हूँ ? लेकिन ब्रम्हेश्वर पर आरोप तय नहीं हुए , किस आधार पर उनकी मौत को जायज़ ठहराया जा सकता है | मैं एक बात और उन कातिलों से और उनके समर्थकों से पूछना चाहूँगा कि वह अफजल , अज़मल और लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर लगे हुए दागों को साफ करने की पहल क्यों नहीं करते ? क्या गली के कुत्ते घर में ही शेर हैं ? भारत में हर रोज कही न कहीं राजनैतिक हत्या हो जाती है , इसका कुसूरवार कौन है ? कभी सजा की मांग की गयी ? कहने वालों ने तो शहीद शिरोमणि भगत सिंह , नेता जी सुभाष चंद्र बोस और सावरकर को भी सही नहीं कहा, तो उनसे उम्मीद भी बेईमानी है | ”क्रांति खून मांगती है” सुना तो होगा ही …….!

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