लेखक परिचय

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

वैभवपूर्ण जीवन को भारतमाता के श्रीचरणों की सेवा में समर्पित करने वाले ख्‍यातलब्‍ध कैंसर सर्जन तथा विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्‍ट्रीय महामंत्री।

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दिल्ली, दिसम्बर ७, २०१०। काशी में गंगा आरती के समय प्राचीन शीतला माता घाट और दशाश्वमेध घाट के बीचों बीच धमाका यह सादी आतंकी घटना नहीं हो सकती। मंगलवार के ही दिन २००६ में काशी के संकटमोचन मंदिर में धमाका हुआ था; गंगा आरती के समय मंगलवार को ही धमाका कर गंगा आरती बीच में रोकने का यह जेहादी षड्यंत्र भारत की श्रद्धा और भारत का धार्मिक ह्रदय काशी इन दोनों पर घिनौना हमला है! कपूर आरती चल रही थी, हजारों श्रद्धालु गंगा माँ की पूजा में जुटे थे, अनेकों पंडित मंत्रोच्चार कर रहे थे, छोटी छोटी गरीब बच्चियाँ नावों में बैठे हजारों श्रद्धालुओं को पत्ते के कोण में रखे दीप गंगा माँ में बहाने के लिए बेच रही थी, युवा पंडित हाथों में वजनदार अनेकों बातियों की आरतियाँ लेकर गंगा माँ की प्रार्थना कर रहे थे, ऐसे में यह धमाका करना केवल विकृत मानसिकता का परिचय नहीं; यह तो भारत की अतिप्राचीन और विश्व की एकमेव जीवित नगरी ख़त्म करने के लिए जान बूझ कर किया हुआ जेहाद है! उसी समय आस पास की मस्जिदों में अजान चल रही थी और गंगा माँ की आरती के सारे सूर, मन्त्र, ताल रोकना और हिंदुओं की पूजा में विघ्न लाना यह उसी प्रकार का घिनौना जेहाद है जिस के तहत कभी काशी विश्वनाथ मंदिर, बिंदुमाधव मंदिर और कई ऐसे मंदिर तोड़े गए, अयोध्या का राम मंदिर तोडा गया! मुंबई में ताज पर हमला करनेवाली यही जेहादी मानसिकता है! हिंदुओं को ‘भगवा आतंकी’ कहकर उन्हें बदनाम कर हिंदू साधू संतों को जेल भेजनेवाले, आश्रमों में, आश्रमों के मंदिरों में बूट चप्पल पहनकर, तलाशी लेने के बहाने हिंदुओं का अपमान कर रहे हैं, जो मुस्लिम मतों के लिए घुटने टेक रहे हैं, क्या अब वे यह हिम्मत दिखाएँगे की आस पास की मस्जिदों में तलाशी लें कि वहाँ अब क्या है? काशी के ८० घाटों पर हिंदुओं की परंपरागतगत पूजाएँ, विधि चलते हैं, वहाँ हिंदू धर्म ना माननेवाले फिरंगियों का, गंगा आरती में श्रद्धा से आने वाले हिंदुओं को धक्के मारकर मजाक उड़ानेवाले टोपीवालों का क्या काम? तुरंत काशी के सभी घाटों पर अहिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाय, काशी विश्वनाथ मंदिर की गली में और काशी की सभी गलियों में जहाँ जहाँ करीबन ६०० से अधिक प्राचीन मंदिर, तीर्थ, कुण्ड, कूप हैं, वहाँ अहिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाय, सुरक्षा के नाम पर हिंदुओं को सतानेवाले क्या कर रहे थे जब गंगा माँ का ह्रदय चीर दिया गया, भगवान् शंकर का डमरू जब उस धमाके से छिन्न विछिन्न होकर गंगा किनारे पड़ा रहा,

कइयो श्रद्धालू घायल हो गए, गंगा माँ की पूजा के लिए पहुंचाया गया दूध भी क्या अब सुरक्षित नहीं है काशी में? विदेशी टूरिस्टों के भेस में कौन आते हैं, घाटों पर क्या करते हैं, कौनसे वीसा पर ठहरते हैं, यह तलाशी केवल इसीलिए नहीं की जाती क्यों की फिरंग पूजा और मुस्लिम तुष्टिकरण में देश की सुरक्षा ताक पर रखी जा रही है – जिसमें डेविड हेडली जैसे कई जेहादी घूस कर भारत को घायल कर रहे हैं! अगर हाज हॉउस में, मस्जिदों में हिंदुओं को प्रवेश नहीं, तो हिंदुओं की देव नगरी काशी के घाटों पर,

मंदिरों – तीर्थो, कुंडों कूपों पर अहिंदुओं को प्रवेश क्यों? यह प्रवेश तुरंत वर्जित किया जाय और काशी को ‘विश्व संरक्षित धरोहर’ घोषित कर काशी के लिए सुरक्षा दी जाय। काशी में जितने मदरसे हैं उन्हें तुरंत ताला लगाया जाय और आस पास की मस्जिदों में हिंदू संतों के समक्ष अभी तलाशी ली

जाय। काशी के और संपूर्ण देश और विश्व के हिंदुओं को विश्व हिंदू परिषद् आवाहन करती है की इस घिनौने जेहादी हमले का विरोध लोकतांत्रिक पद्धति से करे और जब तक अहिंदुओं को काशी के घाटों, मंदिरों, तीर्थो, कुण्डों, कूपों पर प्रवेश वर्जित ना किया जाय तब तक यह लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखे।

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13 Comments on "हिंदुओं का खून बहाने वालों को काशी माफ़ नहीं करेगी – डॉ तोगड़िया"

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ajit bhosle
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@.R.SINGH प्रिय मित्र हो सकता है मै गलत हूँ, लेकिन क्या करूं बचपन से सुनता आ रहा हूँ की लोहे को लोहा काटता है और ज़हर को ज़हर, चाहे आप अतीत में चले जाओ जहां शिवाजी महाराज को औरंगजेब का सशस्त्र प्रतीकार करना पडा था और चाहे वर्तमान को देख लो जहां इसराइल अपने दुश्मनों से लोहा ले रहा हे, यह भी हो सकता है मै आपको हिन्दू ना दिखा पाऊँ पर कुछ विशेष लोगों की खुराफात से त्रस्त समूह के समूह दिखा सकता हूँ, ये अलग बात है अधिसंख्य लोग व्यक्तिगत सुख-चैन के लिए इस बारे में सोचते भी… Read more »
आर. सिंह
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उग्र हिंदुत्व का तो मैं कभी समर्थक न रहा न रहूँगा,पर हिन्दू होने के नाते मैं हिंदुत्व का समर्थन करने को तैयार हूँ बशर्ते आप मुझे हिन्दू तो दिखाइये.मुझे तो न कोई हिन्दू दीखता है और न कोई भारतीय.जब मैं हिन्दू ढूंढने निकलता हूँ तो मुझ केवल विभिन्न जातियां दिखती हैं.उसमे भी इतनी उच्च नीच की भावनाएं की पूछिये मत और जब मैं भारतीयों की तलाश में निकलता हूँ तो मुझे भिन्न भिन्न राज्यवासी नजर आते हैं. राष्ट्रवासी कोई दीखता नहीं.एक बात और जब आपको मुस्लिमों की उग्रता खलती है तो आप हिन्दुओं में वही दुर्गुण क्यों देखना चाहते हैं?
ajit bhosle
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प्रिय मित्रों सच कहूं तो मैं अक्तूबर से जनवरी तक अपने व्यवसाय में इतना व्यस्त रहता हूँ की कई कई दिन अपने घर वालों से भी बात नहीं कर पाता, इस माह थोड़ा फ्री होने पर मैंने नेट खोला और उत्सुकतावश यह लेख पढ़ा, यकीन मानिए मैंने यह तक नहीं देखा की लेख कब लिखा गया है, और मेरी आदत है मैं टिप्पणियाँ जरूर पढता हूँ, मैं व्यवसायी होने के बावजूद उग्र हिंदुत्व का जबरदस्त पैरोकार हूँ, अपने कामों से मेरा जाना आना बांग्लादेश,त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल होता है तो जो हालात(त्रिपुरा को छोड़कर) मुझे दिखते है वे मुझे भीषण रूप… Read more »
आर. सिंह
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अजित भोसले जी को धन्यवाद की उन्होंने दिसंबर के आलेख पर फ़रवरी में टिपण्णी करके बहुत लोगों को जगा दिया,पर पता नहीं डाक्टर कपूर को कहाँ से यह पता चला की भारत की आवादी सन ५७२ के आस पास या उसके बाद ६० करोड़ थी.अगर विवेकानंद ने ऐसा लिखा है तो भी मेरे विचारानुसार यह गलत है.भारत की आबादी आजादी के पहले जो ४० करोड़ थी,वह उस समय तक की सबसे बड़ी आबादी थी.उसमे से भी जब १० करोड़ के लगभग लोग पाकिस्तान चले गए तो भारत की आबादी ३० करोड़ रह गयी थी जो आज बढ़कर करीब ११० करोड़… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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दानवी शक्तियों के दलन के बिना कभी भी सुखी और संपन्न राष्ट्र व समाज का निर्माण संभव नहीं हुआ. राम, कृष्ण, durga, काली सभी को दुष्टों का विनाश करना ही पड़ता है. अमेरिका या इस्राईल अपने देश या समाज की रक्षा के लिए युद्ध करता है तो सब इसे सही मानते हैं पर भारत भक्त जब-जब भी देश द्रोहियों के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करते हैं तो न जाने क्यों कुछ लोगों के pet में मरोड़ उठने लगता है? अब क्या समझें की वे बुधी हीन नासमझ हैं जो सत्य को देखने- समझाने की सामर्थ्य से वंचित हैं या किन्ही ताकतों… Read more »
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