हाँ, हाँ मैंने वक्त बदलते देखा है…….

1
463

पंकज व्यास

मैंने वक्त बदलते देखा है,

दुनिया के दस्तूर बदलते देखे हैं,

मैंने, मैंने, रिश्ते और रिश्तेदार बदलते देखे हैं

मैंने, अपनो को बैगाना होते देखा है,

हाँ, हाँ, मैंने वक्त बदलते देखा है……

 

 

 

मैंने लोगो की मधु-मुस्कान में स्वार्थी बदबू को आते देखा है…

कथनी और करनी में अंतर को देखा है….

मैंने, मैंने, रंग बदलते इंसानी गिरगिट देखे हैं,

मैंने अपनेपन की केचुली पहने इंसानों को देखा है

हाँ, हाँ मैंने वक्त बदलते देखा है….

 

मैंने अपने लियें सजी ‘अपनो’ की महफ़िल भी देखी है

मैंने गैरों की गैरत को देखा है, और ‘अपनो’ के ‘अपनेपन’ पन को भी देखा है,

मैंने, हाँ, हाँ, मैंने इस ‘अपनो की दुनिया ‘ में अपने को अकेला भी देखा है.

हाँ, हाँ मैंने वक्त बदलते देखा है…….

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,170 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress