लेखक परिचय

पंकज व्‍यास

पंकज व्‍यास

12वीं के बाद से अखबार जगत में। लिखने-पढने का शुरू से शौक, इसी के चलते 2001 में नागदा जं. से प्रकाशित सांध्य दैनिक अग्रिदर्पण से जुड़ाव. रतलाम से लेकर इंदौर-भोपाल तक कई जगह छानी खाक. जीवन में मिले कई खट्टे-मीठे अनुभव. लेखन के साथ कंप्यूटर का नोलेज व अनुभव. अच्छी हिंदी व इंग्लिश टाइपिंग, लेआउट, ग्राफिक्स, डिजाइनिंग. सामाजिक-राजनीतिक और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन. दिल का दर्द कविता में, अव्यवस्थाओं, विसंगतियों पर व्यंग्य-प्रहार. समाज के अनछुए पहलुओं पर लेखन. जिंदगी के खेल में रतलाम, दाहोद और झाबुआ से प्रकाशित दैनिक प्रसारण रतलाम से दूसरी पारी कि शुरुवात. फिलवक्त पत्रिका से जुडाव. मध्यप्रदेश के रतलाम में निवास.

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पंकज व्यास

मैंने वक्त बदलते देखा है,

दुनिया के दस्तूर बदलते देखे हैं,

मैंने, मैंने, रिश्ते और रिश्तेदार बदलते देखे हैं

मैंने, अपनो को बैगाना होते देखा है,

हाँ, हाँ, मैंने वक्त बदलते देखा है……

 

 

 

मैंने लोगो की मधु-मुस्कान में स्वार्थी बदबू को आते देखा है…

कथनी और करनी में अंतर को देखा है….

मैंने, मैंने, रंग बदलते इंसानी गिरगिट देखे हैं,

मैंने अपनेपन की केचुली पहने इंसानों को देखा है

हाँ, हाँ मैंने वक्त बदलते देखा है….

 

मैंने अपने लियें सजी ‘अपनो’ की महफ़िल भी देखी है

मैंने गैरों की गैरत को देखा है, और ‘अपनो’ के ‘अपनेपन’ पन को भी देखा है,

मैंने, हाँ, हाँ, मैंने इस ‘अपनो की दुनिया ‘ में अपने को अकेला भी देखा है.

हाँ, हाँ मैंने वक्त बदलते देखा है…….

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1 Comment on "हाँ, हाँ मैंने वक्त बदलते देखा है……."

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डॉ. मधुसूदन
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कविता तो सुन्दर है। पर इतना गहरा अनुभव कहांसे पा लिया?

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