पंकज व्‍यास

12वीं के बाद से अखबार जगत में। लिखने-पढने का शुरू से शौक, इसी के चलते 2001 में नागदा जं. से प्रकाशित सांध्य दैनिक अग्रिदर्पण से जुड़ाव. रतलाम से लेकर इंदौर-भोपाल तक कई जगह छानी खाक. जीवन में मिले कई खट्टे-मीठे अनुभव. लेखन के साथ कंप्यूटर का नोलेज व अनुभव. अच्छी हिंदी व इंग्लिश टाइपिंग, लेआउट, ग्राफिक्स, डिजाइनिंग. सामाजिक-राजनीतिक और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन. दिल का दर्द कविता में, अव्यवस्थाओं, विसंगतियों पर व्यंग्य-प्रहार. समाज के अनछुए पहलुओं पर लेखन. जिंदगी के खेल में रतलाम, दाहोद और झाबुआ से प्रकाशित दैनिक प्रसारण रतलाम से दूसरी पारी कि शुरुवात. फिलवक्त पत्रिका से जुडाव. मध्यप्रदेश के रतलाम में निवास.

केवल ‘एक लाईन’ लिखने से अखबार वाले जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते – पंकज व्यास

अधिकांश अखबारों में वर्गीकृत, डिस्प्ले क्लासिफ़ाईड विज्ञापनों की भरमार होती है। इनमें आवश्यकता, टयूशन-शिक्षा, ज्योतिष,