लेखक परिचय

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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सुरेश हिन्दुस्थानी
वर्तमान में देश में हिन्दू हितों पर दिए गए बयानों को जिस प्रकार से विवादित बयान कहकर प्रचारित किया जाता है, उसमें वैमनस्यता की खाई और चौड़ी होने का खतरा पैदा होता जा रहा है। यह भारत का दुर्भाग्य ही है कि हमारे देश का समस्त वातावरण हिन्दुत्व पर आधारित होने के बाद भी तथाकथित बुद्धिजीवी हिन्दुत्व की बात आने पर नाक भौं तक सिकोडऩे लगने हैं। कहना तर्कसंगत ही होगा कि देश के आध्यात्मिक सन्त पुरातन काल से राष्ट्रीयता का पालन करते हुए हिन्दू धर्म के संरक्षण का कार्य करते चले आ रहे हैं। यह कोई आज की बात नहीं है, बल्कि पुरातन काल से चली आ रही एक परम्परा है। वर्तमान के राजनीतिक परिवेश में योगी आदित्यनाथ ने वही कहा है जो एक सन्त को कहना चाहिए। वह अपने आराध्यों को मानने वाले समाज के हित में कोई बात करता है तो इस पर इतना हायतौबा करने की जरूरत नहीं होना चाहिए।
हम जानते हैं कि हमारे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है, इसमें उन्होंने अल्पसंख्यक शब्द का प्रयोग न करके केवल मुसलमान शब्द प्रयोग किया। एक सरकार के मुखिया का इस प्रकार का बयान निसंदेह भारत की संस्कृति से कतई मेल नहीं खाता। हमारे देश का यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि विश्व में हिन्दू नाम से पहचाने वाले इस देश में आज की राजनीति ने हिन्दू शब्द को ही विवादित बना दिया है। जबकि यह सत्य है कि हिन्दू संस्कार में जीवन यापन करने वाला व्यक्ति कभी विवादित हो ही नहीं सकता, क्योंकि वह सबको अपना ही मानता है। लेकिन हमारे देश में राजनीतिक दलों द्वारा धर्म निरपेक्ष और तुष्टीकरण का जो खेल चल रहा है, उसके कारण समस्या की जड़ सामने नहीं आ पाती। अब उत्तरप्रदेश में घट रही सांप्रदायिक घटनाओं को ही देख लीजिए, उसमें जिस तरीके से हिन्दू समाज के साथ सरकारी भेदभाव हो रहा है, उसके कारण आज हिन्दू समाज उपेक्षित सा हो गया है। उत्तरप्रदेश का मुस्लिम समाज राजनीतिक संरक्षण के चलते हिन्दुओं पर हावी होता जा रहा है। जितने भी दंगे हुए, उसमें सबसे ज्यादा नुकसान हिन्दुओं का हुआ और समाचार माध्यमों ने जिस प्रचारित किया उसमें ऐसा दिखाया गया कि मुसलमान ही प्रताडि़त किए गए हैं। इसी प्रकार गुजरात के दंगों की तो बात की जाती है, लेकिन गोधरा की चर्चा कभी नहीं होती, जिसमें अयोध्या से लौट रहे हिन्दुओं को केवल इसलिए जला दिया जाता है क्योंकि वे जय श्री राम का नारा लगा रहे थे। इसी प्रकार लव जिहाद के बारे में अगर कोई हिन्दू नेता बयान देता है तो पूरे देश का धर्मनिरपेक्ष भोंपू उसे विवादित कहकर प्रचारित करता है। सवाल यह है कि जब मुसलमान लव और जिहाद को पवित्र मानते हैं, तब इसमें धोखबाजी क्यों की जाती है? मुसलमान युवक नाम बदलकर शादी क्यों करते हैं? वे मुसलमान बनकर ही सामने क्यों नहीं आते?
प्राय: देखा जाता है कि हिन्दू समाज प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ करने की कोशिश करता है, तब उस पर तमाम सरकारी नियंत्रण लग जाते हैं, और हिन्दुओं को ही दोषी ठहराने का काम प्रचार माध्यम करते हैं। इसका एक और उदाहरण यह कहा जा सकता है कि शिवसेना सांसद द्वारा एक मुस्लिम से खराब खाने की शिकायत की गई तो उसे ऐसा प्रचारित किया गया कि सांसद ने बहुत बड़ा नरसंहार कर दिया हो, इसके विपरीत अमरनाथ यात्रा के दौरान जब मुसलमानों ने हिन्दू तीर्थ यात्रियों के आश्रय स्थलों को नष्ट कर दिया और उनका खाना फेंक दिया, तब किसी ने कोई आवाज नहीं उठाई। कांगे्रस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने जो बोया है, उसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है, देश विरोधी ताकतों ने जिस प्रकार से मोदी के बारे में कहा था कि मोदी केवल हिन्दुओं के नेता हैं, उनका यह सोच उस समय काफूर हो गया होगा, जब उन्होंने कश्मीर में बाढ़ के समय प्रधानमंत्री की सक्रियता देखी होगी। अन्य राजनीतिक दलों और प्रचार माध्यमों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यों से कुछ सीखना चाहिए। मोदी कहते हैं कि भारत का मतलब सवा सौ करोड़ देशवासी। सबको समान भाव से देखने की दृष्टि जिसके पास होगी वही देश का भला कर सकता है। ऐसी ही दृष्टि हमारे देश के मीडिया जगत को अपनानी होगी। आज देश में जितनी समस्या हैं सत्ताधारी दल उस समस्याओं की तह तक जाए और जो वास्तविकता है उसको समाज के समक्ष उजागर करने का कार्य भी सरकार का है। केवल एक पक्ष के प्रति अच्छा भाव रखकर कार्य करने से कभी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में गुजरात दंगों को लेकर जिस प्रकार से प्रचार माध्यमों के साथ साथ कुछ राजनेताओं ने प्रचारित किया कि मोदी तो मुसलमान विरोधी हैं। कांगे्रस में जबरदस्ती नेता बनाए जा रहे राहुल गांधी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर मोदी प्रधानमंत्री बनते हैं तो 22000 मुसलमान मारे जाएंगे, इसी प्रकार कई नेताओं ने भी मुसलमानों में भय का वातावरण उत्पन्न करने का प्रयास किया। लेकिन आज जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ में जिस प्रकार से मोदी ने सक्रियता दिखाई है, उससे कांगे्रस के नेताओं के मुंह बन्द हो गए हैं।
आज पूरे कश्मीर में केवल सेना और मोदी सरकार के कार्यों की चर्चा हो रही है, प्रदेश की अबदुल्ला सरकार भले ही ढोल पीट ले लेकिन जनता में उमर सहित स्थानीय नेताओं के प्रति जबरदस्त नाराजगी है। अब तो वहां की जनता साफ तौर पर यह भी कहने लगी है कि सेना के हाथ में यहां की सत्ता सौंपी जाए। अगर मोदी के मन में जरा सा भी विरोध का भाव होता तो इतनी सक्रियता तो दिखाई नहीं देती। जम्मू कश्मीर की जनता भी मोदी के इस रूप को देखकर अचंभित है, क्योंकि जिस प्रकार से अलगाववादी नेताओं ने मोदी के बारे में प्रचारित किया था, वह वास्तविकता के उजागर होने के साथ ही हवा में उड़ गया। मोदी की नजर में समस्त भारत एक है और वे स्वयं जनता के सेवक बनकर सामने आए हैं। इस सबसे यह बात तो सामने आती है कि भारत का दर्शन सबका हित करने की बात करता है, भारत में राजनीतिक दलों को तुष्टीकरण की राजनीति को समाप्त करने का अब सही अवसर है।

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5 Comments on "बन्द होना चाहिए तुष्टीकरण का खेल"

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डॉ. मधुसूदन
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निम्न कडी देखने का अनुरोध है। पारिवारिक भाव से विचार करना सही मानता हूँ।

http://www.pravakta.com/prospect-of-reservation

इक़बाल हिंदुस्तानी
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सरकारी आंकड़े और सच्चर रिपोर्ट बता रही है मुस्लिम जीवन के हर क्षेत्र में काफी पीछे है तो उसका हिस्सा किसके पास है?
तुष्टिकरण तो तब होता है जब किसी को उसके हक से ज्यादा दिया जाता है।
मुस्लिम हिन्दू के मुकाबले कट्टर और सांप्रदायिक ज्यादा हो सकता है ये आरोप कुछ हद तक ठीक है लेकिन इसका हल हिन्दू राष्ट्र या हिंदूवादी सोच नहीं है। धीरे धीरे मुस्लिमों में परिवार नियोजन और हायर एजुकेशन बढ़ेगी तो खुद सम्पन्नता आने से उदारता और समझदारी बढ़ेगी जिस से एकता और भाई चारा भी बढ़ेगा।

इंसान
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तुष्टिकरण केवल आर्थिक अथवा भौतिक लाभ में ही नहीं है। टोपी पहनने अथवा न पहनने को भी तुष्टिकरण का विषय बनते देखा गया है। आप कहते हैं, “धीरे धीरे मुस्लिमों में परिवार नियोजन और हायर एजुकेशन बढ़ेगी तो खुद सम्पन्नता आने से उदारता और समझदारी बढ़ेगी जिस से एकता और भाई चारा भी बढ़ेगा।” सरसठ वर्ष हो गए; एकता और भाईचारे के लिए आपस में कटते मरते और कितना धीरे चलना होगा? आपको क्या कोई दिव्य शक्ति दिखाई देती है जो अब “मुस्लिमों में परिवार नियोजन और हायर एजुकेशन” को बढ़ावा देने को तत्पर है? मुझे विश्वास है कि हिंदुत्व… Read more »
Suresh Hindustani
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इकबाल भाई आपने बात सही लिखी है, लेकिन कुछ मुसलमान ऐसे हैं जो ज्यादा बच्चे पैदा करने को जायज ठहराते हैं, अगर वह भी परिवार नियोजन को अपनाएँ तो स्थिति सुधर जाएगी.

बीनू भटनागर
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बीनू भटनागर

मुसलमानो का तुष्टीकरण न हो बिलकुल सही, पर हिन्दुत्व के नाम पर घृणा जो फैलाई जा रही है वह भी ग़लत है। हम सब भारतवासी पहले हैं हिन्दू या मुसलमान बाद मे।

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