लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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‘’तू, ‘’ तुम,’’ ‘’आप,’’ ‘’ मै’’ और ‘’हम’’’ ये सब सर्वनाम हैं ये तो हम सभी जानते हैं। हिन्दी भाषा मे इनके प्रयोग अलग अलग तरीके से होते हैं। पहले ‘’तू’’, ‘’तुम’’ और ‘’आप’’ पर चर्चा कर लेते हैं। ये दूसरे पुरुष के सर्वनाम हैं, जो बात सुनने वाले के लियें प्रयुक्त होते हैं या जिनको संबोधित करके बात की जाती है उनके लिये प्रयुक्त होते हैं । अब इंगलिश मे केवल ‘’यू’’ (you) होता है, पंजाबी मे ‘’तुसी’’ और बंगला ‘’तुमि’’।‘’ तू,’’ ‘’ तुम,’’और ‘’आप’’ के प्रयोग का भी बहुत सुनिश्चित आधार नहीं है। ‘’तू’’ प्यार से भी कहा जा सकता है और किसी की भर्त्सना या प्रताड़ना के लियें भी । ‘’तू’’ मे आत्मीयता है, तो आदर नहीं है, यदि आदर कम है या नहीं है तो लोग भगवान को या कभी कभी माता पिता तक को ‘’तू’’ कहकर क्यों संबोधित करते हैं ? संभवतः ‘’तू’’ के अपनेपन के कारण । परन्तु अनजान व्यक्ति को ‘’तू’’ क्या, ‘’तुम’’ का संबोधन भी अनादर लग सकता है। है न कितनी घुमावदार बात !

हर रिश्ते की मर्यादा के अनुसार ‘’तू,’’ ‘’तुम’’ और ‘’आप’’ का प्रयोग करना पड़ता है, इसके लियें कोई नियम नहीं हैं । दोस्त और भाई बहन ‘’तुम’’ या ‘’तू’’ भी एक दूसरे से कहते हैं पर बड़े भाई बहन को ‘’आप’’ भी कहा जा सकता है। कुछ पति-पत्नि एक दूसरे से ‘’आप’’ कहकर बात करते हैं कुछ ‘’तुम’’ कहकर। माता पिता को भी ‘’आप’’ और ‘’तुम’’ दोनो का संबोधन करने वाले लोग मिलते हैं। कभी कभी लोग अपने से छोटों को क्या अपने बच्चों से भी ‘’आप’’ कह कर बात करते हैं। इस चर्चा का यही निश्कर्ष निकला कि आत्मीय रिश्तों मे ‘’तू’’ ‘’तुम’’ और ‘’आप’’ किसी का भी प्रयोग किया जा सकता है जो जिसको अच्छा लगे कहा जा सकता है।

औपचारिक संबधो मे जैसे शिक्षक ,डाक्टर या कोई और व्यक्ति हो चाहें बड़ा हो या छोटा ‘’आप’’ ही कहना सही है। अनजान लोगों से भी आप ही कहना चाहिये, बेशक उम्र मे बहुत बड़े लोग छोटो से ‘’तुम’’ कह सकते हैं पर ‘’तू’’ का प्रयोग वांछनीय नहीं है।

‘’तू’’ ‘’तुम’’ और ‘’आप’’ की बात यहीं समाप्त नहीं हो जाती क्योकि इन तीनो सर्वनामो के साथ क्रिया और सहायक क्रिया के रूप भी बदल जाते हैं जैसे तू जा रहा है, तुम जारहे हो, आप जा रहे हैं। अक्सर लोग आप के साथ ग़लत क्रिया लगा देते हैं।आप जा रहे हो, आप खालो, आप देदो, आप कब आओगे ? व्याकरण की दृष्टि से सही नहीं हैं ये सारी क्रियायें और सहायक क्रियायें ‘’तुम’’ के साथ सही बैठती हैं। आप के साथ आप जा रहे हैं, आप खा लीजिये, आप दे दीजिये, आप कब आयेंगे ? होना चाहिये । यह ग़लती इतनी आम है, खा़सकर दिल्ली और आस पास के पंजाबी से प्रभावित इलाको मे कि अब ये दोष दोष न रहकर स्थानीय विशेषता का रूप ले चुका है। जो त्रुटि इतनी अधिक हो कि वह लोगों को त्रुटि लगे ही नहीं तो उसे उस क्षेत्र की विशेषता मान लेने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है, फिर भी हिन्दी के मानक रूप ,खड़ी बोली के अनुसार यह त्रुटि तो है।

दूसरे पुरुष के सर्वनामो के बाद अब प्रथम पुरुष के सर्वनाम ‘’मै’’ और ‘’हम’’ की बात करते हैं, ये सर्वनाम बात को कहने वाला व्यक्ति स्वयं के लियें प्रयुक्त करता है। ‘’मै’’ एक वचन है और ‘’हम’’ बहुवचन। ‘’ मै’’ मे कहने वाले के साथ कोई नहीं होता ,पर ‘’हम’’ से लगता है कि जो व्यक्ति बात कर रहा है उसके साथ कुछ और भी लोग हैं, जैसे ‘’मै कल मुंबई जा रहा हूँ’’ मतलब कहने वाला ही केवल जा रहा है। ‘’हम कल मुंबई जा रहे है’’ से लगता है कि कहने वाले के अलावा भी उसके साथ कुछ और लोग मुंबई जा रहे हैं।

‘’मै’’ और ‘’हम’’ के प्रयोग की बात इतनी साधारण भी नहीं है। कई लोग अकेले ख़ुद यानि एक वचन के लियें भी ‘’हम’’ का प्रयोग करते हैं। ‘’मै’’ के लियें ‘’हम’’ कहने का प्रचलन लखनऊ इलाहाबाद और आस पास के इलाकों मे अधिक है वहाँ की स्थानीय बोलियों मे भी ‘’मै’’ है ही नहीं ‘’हमार’’ ‘’हमरा’’ ‘’हमहुं’’ प्रचिलित सर्ववाम हैं, इसलियें खड़ी बोली बोलते समय भी ‘’मै’’ को ‘’हम’’ कहने का प्रचलन है। ‘’हम’’ कहने के पीछे एक तर्क ये दिया जाता है कि ‘’मै’’ कहने से अहम् की भावाना जुड़ जाती है, संभव है कुछ लोगों को ऐसा लगता हो पर खड़ी बोली के व्याकरण के अनुसार एक वचन के लियें ‘’मै’’ ही सही सर्वनाम है।‘’ हम’’ का प्रयोग कई लोग साथ होने का भ्रम पैदा करता है और ‘’मै’’ का वज़न बेवजह बढ़ाता है जैसे कोई राजकुमार हो और उसके पीछे 2-4 लोग और चल रहे हों। ‘’मै’’ को ‘’हम’’ भी इतने अधिक लोग कहते हैं कि वह भी स्थानीय भाषा की विशेषता बन चुका है, परन्तु बार बार दोहराने से ग़लत सही नहीं हो जाता, अतः एकवचन के लिये ‘’मै’’ और बहुवचन के लियें ‘’हम’’ का प्रयोग ही व्याकरण की दृष्टि से सही है।

मै के स्थान पर हम कहना व्यंगात्मक शैली को प्रभावशाली अवश्य बनाता है,जबकि व्यंग ख़ुद पर किया गया हो एक उदाहरण-

हमने अपनी आत्मकथा…अरे कैसी आत्मकथा, आत्मकथा तो बड़े बड़े लोग लिखते हैं। यह तो आत्मव्यथा है। हम तो एक मामूली सी गृहणी हैं, हमारी व्यथा हो या कथा क्या फ़र्क पड़ता है।

इस व्यंगात्मक शैली मे यदि ‘’मै’’ के स्थान पर ‘’हम’’ का प्रयोग नहीं होता तो व्यंग इतना उभर कर नहीं आपाता।

तीसरे पुरुष के सर्वनाम अर्थात बोलने और सुनने वाले के अतिरिक्त किसी तीसरे व्यक्ति के लियें प्रयुक्त होते हैं ‘’वह’’ और ‘’वो’’ का प्रयोग क्रमशः एकवचन और बहुवचन के लियें होता है।।यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि एकवचन के स्थान पर आदर देने के लियें सदैव बहुवचन का प्रयोग किया जाता है। जैसे ‘’वह कल आ रहा है। ’’ किसी अपने से छोटी आयु के व्यक्ति के लियें उचित है परन्तु यदि आने वाला कोई बुज़ुर्ग है और उन्हे आदर देना है तो ‘’वह आरहा है।‘’ के स्थान पर ‘’वो आरहे हैं। ’’ कहना सही है। यह त्रुटि ज्यादा नहीं होती फिर भी ध्यान रखना ज़रूरी है।

इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखने से भाषा सभ्य और सुसंसकृत हो जाती है।

 

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4 Comments on "तू , तुम,आप, मै, हम ,वह और वे"

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Vijay Nikore
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जो वास्तव में हो रहा है, बीनू जी ने उसे बहुत ही
अच्छा स्पष्ट किया है । बीनू जी को बधाई ।
विजय निकोर

Binu Bhatnagar
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धन्यवाद विजय भैया

PRAN SHARMA
Guest

एक बहुत ही उपयोगी लेख है . लेखिका को बधाई .

Binu Bhatnagar
Guest

thanks

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