पाक ध्वज में काल कल्वित- सफ़ेद रंग

पाक के इकलौते अल्पसंख्यकों के मंत्री शाहबाज़ भट्टी की दिन दिहाड़े हत्या कर पाक के कट्टरवादी मुसलामानों ने सारे विश्व को एक स्पष्ट सन्देश दे दिया है. यह सन्देश है की पाक में कुरआन और मुहम्मद को न मानाने वालों के लिए कोई स्थान नहीं. भट्टी पाक के एक मात्र ईसाई मंत्री थे. भट्टी ईशनिंदा क़ानून के मुखालिफ थे जिसे पाक में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने में प्रयुक्त किया जाता रहा है. इसे कुफ्र क़ानून से भी जाना जाता है. पाक में इस्लाम के पैरोकार कुफ्र और काफ़िर को मिटाने वाले को गाजी कह कर सम्मानित करते है. पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या करने वाले बाड़ी गार्ड को भी गाजी के रूप में सम्मानित किया गया.

एक और तो पाक के प्रधान मंत्री युसूफ रज़ा गिलानी अल्पसंख्यकों की सलामती के बड़े बड़े दावे करते हुए फरमा रहे हैं कि पाक के राष्ट्र ध्वज का सफ़ेद हिस्सा अल्पसंख्यकों का प्रतीक है. गिलानी ने ईशनिंदा क़ानून में फेर बदल से भी इनकार किया और इस कानून के कारन अल्पसंख्यकों के पलायन को भी बेवजह बताया. गिलानी ने दावा किया की इंडोनेशिया में कोई ईशनिंदा कानून नहीं फिर भी गैर मुसलमान मुल्क छोड़ कर जा रहे हैं. – गिलानी के इस ब्यान से ज़ाहिर है की मुस्लिम बहुल देश जहाँ कुरआन और शरिया का कानून नासिर है वहां काफिरों के लिए सहज जीवन जीना मुहाल है.? दूसरी ओर आंतरिक सुरक्षा मंत्री रहमान मालिक साफ़ साफ़ शब्दों में आगाह कर रहे हैं कि ‘हमारे मुल्क में सिविल वार से खून खराबा होना तय है. पिछले दिनों पाक के ६६ वर्षीय हिन्दू विधायक ने पाक से भाग कर भारत में शरण ली. पाक में कुफ्र के नाम पर बढ़ रही अल्पसंख्यकों की कठिनाईयों पर ईसाई सांसद अकरम मसीह गिल ने कहा कि सबसे कठिन दौर में हैं अल्पसंख्यक- उन्हें अंधी गली में धकेला जा रहा है. प्रसिद्ध लेखिला तसलीमा नसरीन ने तो यहाँ तक कह दिया कि सभी अल्पसंख्यकों को पाक छोड़ देना चाहिए. तसलीमा नसरीन ने अपने ट्वीट पर ‘अब तीसरा कौन’ आशंका भी ज़ाहिर की. भाट्टी की हत्या के बाद ,नयूक्लेअर सईन्स्दा ,निबंधकार,राजनैतिक रक्षा विश्लेषक व् काय्देआज़म युनिवर्सटी -इस्लामाबाद में फिजिक्स विभाग की मुखिया डॉ.प्रोफ. परवेज़ हूद भाई ने ‘ पाक के भविष्य पर गहरी चिंता जताई .

ईशनिंदा या कुफ्र के क़ानून के तहत जन . जिया उल हक़ के समय से अब तक ६०० काफिरों पर केस दर्ज हुए – कुछ को तो जेल में ही मौत के घाट उतार दिया गया. पाक में आम हिन्दू या ईसाई की तो बात छोडो शाहबाज़ भट्टी और अकरम मसीह गिल जैसे मंत्री व् सांसद भी पाक के मुस्लिम समाज में अपने ईसाई नाम के साथ नहीं रह सकते उन्हें भी मुस्लिम नाम रखने पड़ते हैं.

गत छह दशकों में पाक में इस्लाम और मुहम्मद के नाम पर अल्पसंख्यकों पर इस कदर जुल्मोसितम ढाए गए की लगभग ३५ मिलियन अल्पसंख्यक यातो मार दिए गए या फिर अपनी जान बचाने के लिए मुसलमान हो गए और बहुत सारे पाक छोड़ भाग गए. आंकड़े गवाह हैं – १९४७ में जब जिन्ना ने सेकुलर इस्लामिक राज्य की स्थापना की और अल्पसंख्यकों के जान ओ माल और धर्म की पूरी हिफाज़त का वायदा किया तो उस वक्त पाक में २४% अल्पसंख्यक थे और कुल आबादी थी ३० मिलियन . २०१० आते आते आबादी तो हो गई १७०

मिलियन अर्थात ५ गुना से अधिक और अल्प संख्यक रह गए मात्र ३% जिसमें १.५% हिन्दू और १.५% ईसाई हैं और यह संख्या भी तेज़ी से घट रही है.

मानवाधिकार के ठेकेदार और भारत के सेकुलर शैतान ‘हिन्दुओं और ईसाइओ ‘ पर पाक में हो रहे अमानवीय अत्याचारों पर अपराधिक चुप्पी साधे हुए हैं . और तो और पाक में ईश निंदा के नाम पर हो रही राजनैतिक हत्याओं पर भारत के किसी भी कांग्रेसी या कौम्नष्ट ने एक शब्द नहीं बोला ….. पांच राज्यों में होने जा रहे चुनावों में कहीं मुस्लिम वोट बैंक न फिसल जाएं !!!!!!!

 

 

28 thoughts on “पाक ध्वज में काल कल्वित- सफ़ेद रंग

  1. शैलेन्द्र जी, अगर आप मात्र अपने शब्दों को बदलकर वही टिप्पड़ी करना चाहते है जो अभी गाँधी जी कर चुके है तो उसका जवाब मै नीचे दे चुका हू!

  2. जब तक मुसलमान वोट बैंक बना रहेगा उसके साथ ऐसा ही होता रहेगा, मुसलमानों की सबसे बड़ी समस्या है कि वो अपनी सामाजिक और आर्थिक समस्याओं अथवा विषयों कि जगह धार्मिक समस्याओं और विषयों को ज्यादा महत्व देता है, जिसका क्षद्म सेकुलर फायदा उठाते है, आम मुसलमान बेचारा इस्लाम को बचाने में ही अपनी सारी उर्जा लगाये रहता है, जैसे ये न हो तो इस्लाम ख़त्म हो जाये, अरे अपनी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं पर ध्यान दो, अल्लाह ने धर्म पैदा किया है तो उसकी रक्षा भी करेगा, ये काम मुल्ला मौलवियों को करने दो, तुम अपना काम करों, भारत में अन्य धर्मावलम्बी इसलिए आगे बढ़ गए क्योंकि वो आर्थिक और धार्मिक समस्याओं को मिक्स नहीं करते

  3. डॉ. मधुसूदन जी, चर्चा उसी पर हो रही है. मुझे या किसी को भी पाकिस्तान के बारे में जो कुछ भी लिखा है उस पर कोई आपत्ति नहीं है! लेकिन उसकी आड़ में अंतिम पाराग्राफ में जो कुछ भी टिप्पड़ी की गयी है, उस बारे में ही अपनी आपत्ति दर्ज करवा रहा हू और उस पर भी मैंने अपनी आपत्ति तब दर्ज करवाई है जब गाँधी जी ने दुसरे कमेंट्स भारतीय मुसलमानों को लेकर किये! आखिर ये कब तक चलेगा कि पाकिस्तान में किये गए किसी भी काम को भारतीय मुसलमानों से जोड़ कर देखा जायेगा? और मैंने जो कुछ भी कहा है वो अंतिम पाराग्राफ के परिप्रेक्ष्य में ही कहा है!

  4. अभी अंग्रेजी का हिंदी नहीं हो पा रहा था इसलिए मैं अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पा रहा था, ये सर्व विदित है की गायकी में किशोर कुमार से ज्यादा महान कोई नहीं हुआ (चित्र-पट पुरुष गायकों में ) अगर हम सफलता की बात करें तो सत्तर के दशक में तो दुसरे गायकों को मौक़ा ही तब मिलता था जब किशोर कुमार की सहमती होती थी मैं इस लाइन का हूँ इसलिए आप जितने चाहो प्रमाण दो पर सच्चाई बदलने वाली नहीं है, जब उस आदमी को भारत रत्न नहीं मिला तो रफ़ी साहब उनके सामने कुछ नहीं थे.

  5. चर्चा पाकिस्तान के विषय जो लेख है, उसपर हो।
    उसीके बिंदुओं पर चर्चा करें। फैला देनेसे कोई सही निष्कर्ष पर पहुंचा नहीं, जा सकता।
    किसी के मतका खंडन मंडन नहीं कर रहा हूँ।

  6. bhaiyyaa aap kishore kumar ko bhool rahe hain unhe bhi ye samman nahi mila jabki ye sarv vidit hai ki film jagat me unse jyada koi mahan nahi hua.

  7. गाँधी जी आपकी सोच को देख कर लगता नहीं है की आप कोई महान विचारक है! पहली चीज़, इस तरह की बाते करके आप मुख्य बिन्दुओ का रुख नहीं मोड़ सकते है! दूसरी चीज़, ज़रा ये बताने का कष्ट करे कि मुसलमान यहाँ का कौन सा कानून नहीं मानते है? आज के दौर में भारत का बहुसंख्यक समाज कौन सा शरियत कानूनों का संताप झेल रहा है? भारत के मुसलामानों में कितनो ने चार शादियाँ की है? भारत में दियत कैसे प्रचलन में है और भारतीय जीवन को प्रभावित कर रहा है? दरअसल आप जैसी सोच वालो में और पाकिस्तान के कट्टरपंथियों में कोई अंतर नहीं है! आप लोग तो इस हद तक उनसे प्रभावित है की उनके किये कामो को भारत में करना चाहते है! जैसे वे अपने देशवालो को मारते है और आप अपने देशवालो को मारने वाले आतंकवादियों का समर्थन करते है! आज तक आप लोगो ने ऐसे आतंकवादियों के विरुद्ध एक शब्द तो बोला नहीं उलटे भरपूर समर्थन किया और इसके पीछे आपका तर्क यह होता है कि पाकिस्तान द्वारा भारत में बहुत हमले होते है इसलिए हमारे अतंकवादियो ने उन हमलो पर प्रतिक्रिया दी है (पाकिस्तान में हमला करके नहीं, बल्कि अपने ही देशवासियों को मारकर)! आपके इस तरह के तर्कों में कोई सुसंगतता नहीं है इसलिए ज़रा सुसंगत तर्क दिया करिए!

  8. अख्तर भाई, रफ़ी साहब बेशक महान आदमी थे, लेकिन ऐसे हिन्दुओं की संख्या भी कम नहीं जो महान होते हुए भी इस देश की सरकारों के सम्माननीय नहीं हो पाए.

  9. खान साहेब – सदियों से ‘शरियत’ का संताप भोग रहे हिन्दुओं की सोच कैसे बदल सकती है…
    उतिष्ठकौन्तेय

  10. जब इस देश का मुसलमान ‘शरियत’ के शैतानी कानून को त्याग कर -इस देश के कानून को मानेगा तो देशवासिओं की सोच अपने आप बदल जाएगी.. चार- चार निकाह ,तलाक, हलाला, हलाल,दियत जैसे दकियानूसी सिधान्तो का आज के आधुनिक और वैज्ञानिक युग में कोई स्थान नहीं. शरियत को मानने वाले अरब देशों में भी अब ‘विद्रोह’ की चिंगारी फूट रही है..दियत की दुर्गति में पाक जल रहा है…
    -उतिष्ठकौन्तेय

  11. अजीत जी आपकी सोच अच्छी है, लेकिन आप ये नहीं कह सकते कि मुसलमानों के प्रति पूरे देश की सोच अच्छी है. एल आर गाँधी जी, जैसे सोच रखने वालों की कमी नहीं है.

  12. रफ़ी साहब बहुत महान कलाकार थे फिर भी उनको भारत रत्न नहीं दिया गया, जबकि उनसे छोटे कलाकार भारत रत्न पा चुके हैं.

  13. प्रिय मित्र अख्तर कलाम साहब को चाहते तो थे की फिर से राष्ट्रपति बने उन्होंने स्वयं भी दिलचस्पी नहीं ली, एक दमदार आदमी कभी भी रबर स्टंप बनकर नहीं रह सकता, एक बात और मैं उनका बेहद सम्मान करता हूँ इसमें हिन्दू, मुस्लिम का कोई नजरिया नहीं है वे एक अच्छे इंसान हैं और बेहद तीव्र बुध्धी के स्वामी हैं, मेरे भाई आधुनिक हिन्दुस्तान में किसी भी उपलब्धि का नामकरण केवल एक परिवार के सदस्यों पर ही होता है, रही बात दलितों से तुलना करने की तो मुसलमान कम से कम उनकी श्रेणी में तो नहीं आ सकते मित्र में फिर एकबार कह रहा हूँ अधिसंख्य मुसलमान शिक्षा और आधुनिक द्रष्टिकोण की कमी के कारण पीछे है, अन्यथा जिसने प्रयास किया चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान उसने महान बन कर ही दम लिया चाहे वे रफ़ी साहब हो नौशाद साहब हो शकील बदायुनी साहब हो दिलीप कुमार साहब हो या अमज़द खान साहब हो,कलाम साहब हो में केवल महान लोगो की बात कर रहा हूँ बड़े लोगों की नहीं, अवसर के मामले भारत में किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ में समझता हूँ की अब बहस बहुत हो गयी, शायद में आपको नहीं समझा पाउँगा.

  14. अजीत जी, क्या दलित (जो कभी थे) हिन्दुओ को आरक्षण और बहुत सारी सुविधाये नहीं दी जा रही हैं? कलाम साहब को लोग चाहते तो वो फिर से राष्ट्रपति न बनते?. कलाम साहब ने मुसलमानों की भलाई के लिए कोई बात नहीं की, नहीं तो वो भी एल. आर गान्धी जी की नज़र में कट्टरपंथी हो जाते. मुसलमान अगर कुछ गलत करे तो उसे तुरंत इसलामी कहा जायेगा जैसे इसलामी चरमपंथ, इसलामी कट्टरपंथ आदि, लेकिन मुसलमानों के अच्छे कामों का श्रेय कभी इस्लाम को नहीं दिया जाता. कोई लाल किले को इसलामी लाल किला, जी टी रोड को इसलामी जी टी रोड और कलाम साहब की बनायीं मिसाइलों को इसलामी मिसाइल नहीं कहता. यानि गलत कामों का ज़िम्मा इस्लाम पर और अच्छे कामों का श्रेय देश को.

  15. प्रिय मित्रों एक बात लिखना भूल गया a.p.j अब्दुल कलाम को जितना हिन्दू लोग चाहते हैं मुसलमान कभी चाह ही नहीं सकते क्योंकि लोग उन्हें मुसलमान होने के साथ-साथ एक कट्टर भारतीय मानते हैं.जो देश के लिए कुछ भी कर सकता है बड़ा ही अद्भुत संयोग है की इनसे पहले भी एक इनके हमनाम सेना के शहीद अब्दुल हमीद हुए हैं जिन्हें देश ने भरपूर प्यार दिया.

  16. प्रिय मित्रों किया तो हिन्दुओं और ईसाईयों के लिए भी कुछ नहीं जा रहा, कानून केवेल चर्चाओं में बने रहने के लिए बनते हैं, स्वयं देख लीजिये पब्लिक स्कूलों में 25 % सीटें गरीब लोगों के लिए आरक्षित रखने की घोषणा की गयी है मैं नहीं समझता की आपको बताने की जरुरत है की इसके बावजूद क्या हो रहा है, अगर आप लोग टिप्पणियाँ केवल समय व्यतीत करने के लिए करते हैं तो कोई बात नहीं अगर इसे समस्या मान कर करते हैं तो कृपया कई बार विचार करके टिप्पणी दे. धन्यवाद .

  17. अजीत जी, अगर कुछ मुसलमान कुछ बन भी गए तो उससे मुसलमानों के प्रति क्या लोगो की मानसिकता में बदलाव आ गया? उनके लिए इस देश में जगह तब होगी जब उन्हें इस देश का वासी समझा जायेगा! सवाल ये है की उनके द्वारा किये गए देशभक्ति के बावजूद उन्हें नकार क्यों दिया जाता है? उन्हें हमेशा पकिस्तान समर्थित क्यों समझा जाता है? ये आपको कदम कदम पर सांप्रदायिक शक्तियों द्वारा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कहते हुए सुना जायेगा कि समस्त मुसलमान देशद्रोही है! यदि विश्वास न हो रहा हो तब आप छद्म हिन्दुत्ववादियो के लेख पढ़िए! ज्यादा दूर जाने कि भी ज़रुरत नहीं है! इस लेख का अंतिम पाराग्राफ पढ़ लीजिये यदि तब भी न समझ आये तो सिर्फ अंतिम लाइन पढ़ लीजिये कि “पांच राज्यों में होने जा रहे चुनावों में कहीं मुस्लिम वोट बैंक न फिसल जाएं….”! ये तो हर मुसलमान को रोज़ झेलना ही पड़ता है!कि भारत के मुस्लिम पाकिस्तानी है, और जैसे ही भारत ने पाकिस्तान के प्रति कोई एक्शन लिया समस्त भारतीय मुसलमान तुरंत पाक से वफादारी का परिचय देते हुए अपना वोट का समर्थन खींच लेंगे!

  18. अजीत जी, टिप्पणियाँ पढ़ना क्यों छोड़ देंगे? फिर जवाब कौन देगा?
    ये बातें मै नहीं, सच्च्चर कमेटी की रिपोर्ट कह रही है.
    जब अपराध होते है तो पुलिस ये नहीं कहती कि हम क्या करे इसके लिए अपराधी ज़िम्मेदार हैं. बाढ़ या सूखा होने पर सरकार कुछ उपाय करती है ये नहीं कहती कि हम क्या करें इसके लिय प्रकृति ज़िम्मेदार है. फिर मुसलमानों के बारे में ये क्यों कहा जाता है कि पिछड़ेपन के लिये मुसलमान खुद ज़िम्मेदार हैं? आखिर मुसलमानों के लिए क्या किया जा रहा है. जबकि मुसलमानों अनुसूचित जाति से भी पिछड़े हैं.
    अजीत जी, कोई कुछ भी बन गया हो फिर भी उनपर शक ही किया जाता है, आखिर क्यों ?

  19. अगर सच्चे द्रष्टिकोण से देखा जाए तो मुसलामानों का पिछड़ा पण उनकी आधुनिक शिक्षा के प्रति उदासीनता है इस देश में शिक्षा के मामले में तो कभी कोई जातीय भेदभाव हुआ ही नहीं. अगर भेदभाव हुआ भी तो गरीब अमीर के बीच में हुआ. जातियों के बीच में कभी नहीं.

  20. प्रिय मित्र अख्तर भारत पहले से सोने की चिड़िया था, इसके बावजूद मुसलमानों से भारतवासियों को कोई शिकायत नहीं रही आप पूर्वाग्रहों से मुक्त होइए, इस देश ने किसी के साथ कोई दूजा व्यवहार नहीं किया, मुसलमानों में जिसने पढने लिखने की कोशिश की वह बड़ा आदमी बना जिसने अच्छा खेला वह भारत के लिए पूज्य बना अगर आप फिर भी इस तरह की टिपण्णी करेंगे तो कम से कम में तो आपकी टिप्पणियाँ पढ़ना छोड़ दूंगा, जिस देश में पढ़ाई के कारण अब्दुल कलाम राष्ट्रपति बन गए,अच्छे खेल के कारण अजहरुद्दीन एवं ज़फर इकबाल क्रमशः क्रिकेट एवं होकी में भारत के कप्तान बन गए उस देश पर लांछन लगाना एक तरह की निर्लज्जता है,

  21. गाँधी जी कुछ प्रश्न ऐसे भी हो सकते है….जब पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों की वजह से पूरी दुनिया के मुसलमान आतंकवादी हो सकते है तो श्रीलंका में लिट्टे जैसे आतंकवादी संगठनो की वजह से समस्त हिन्दू आतंकवादी क्यों नहीं हो सकते है? जब संघ परिवार के कुछ लोग आतंकवादी घटनाओ में लिप्त होते है तो सारे हिन्दुओ को उसका दोषी क्यों नहीं ठहराया जाता है? जब भी भारत में कोई आतंकवादी हमला हुआ है भारतीय मुसलमानों ने हमेशा ही उसकी आलोचना की है, और जब भी पकिस्तान से युद्ध हुआ है भारतीय मुसलमानों ने हमेशा ही अपनी बहादुरी का परिचय दिया है! पर इस सवाल का जवाब आपको देना होगा की जब संघ परिवार से सम्बंधित लोगो ने कुछ आतंकवादी घटनाओ में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है, तब तथाकथित “देशभक्त और झूटे हिन्दुत्ववादी शैतान” उस घटना की आलोचना करना तो दूर उलटे उन आतंकवादियों का समर्थन क्यों कर रहे है? सोचिये ऐसा ही कुछ समर्थन भारतीय मुसलमानों ने कभी पाकिस्तानी अतंकवादियो का किया होता तो आप जैसे झूठे देशभक्तों की क्या प्रतिक्रिया होती! लेकिन आज भी भारतीय मुसलमान सिर्फ और सिर्फ संघ समर्थित लोगो में से भी सिर्फ दोषियों को ही दोषी कह रहे है पूरे हिन्दू समुदाय या संघ को नहीं! क्या हकीकत में आप आतंकवाद के विरोधी है, यदि ऐसा है तो आतंकवाद पर ये दोहरा रवैया क्यों है? अख्तर साहब मै आपसे सिर्फ ये कहना चाहता हू, की आज जो मुसलमानों की हालत है उसमे बहुत कुछ मुसलमानों की भी गलती है कि उन्होंने शिक्षा से नाता तोड़ लिया और अपने धर्म कि अच्छी बातो पर अमल करना भी छोड़ दिया है, और कुछ लोगो में इतनी सलाहियत भी नहीं है कि वो समस्त कुरान कि अच्छाई को महसूस कर सके वो सिर्फ कुछ आयातों को ही पकडे है, वो भी सुनकर, अगर पढ़ा होता तो उन्हें कुरान से कोई शिकायत नहीं होती (चाहे वो मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम)! यहाँ तक कि उन्होंने लोगो के बीच में इन्साफ करना भी छोड़ दिया है! इसलिए वो आज बहुत ही पीछे हो गए है!

  22. गांघी जी शैतान को मानने वाला कौन है, कृपया स्पष्ट करें?
    अजित जी सच्चाई से आप मुंह मोड रहे है!
    १८-२० % मुस्लिम आबादी वाले इस देश में, सरकारी नौकरियों में मुसलमानों कि हिस्सेदारी ३ %, सेना में २.५ % और व्यापार में सिर्फ २% है, मुसलमान यहाँ दूसरे दर्जे के नागरिक हैं. बताइए कहाँ है समानता ? आज़ादी की लड़ाई तो हम साथ साथ लड़े और आज़ादी मिलने के बाद मुसलमानों को दूध कि मक्खी की तरह निकाल दिया गया.
    साजिद जी! अब हमें देश भक्ति का सबूत देना बंद कर देना चाहिये. देश में बड़े घोटाले और देश के कानून से खिलवाड़ कौन कर रहा है ?
    मुसलमनो ने अपने खून पसीने से सींच कर इस देश को सोने कि चिडया बनाया था. भारत को भारत मुसमानो ने ही बनाया. मुसलमानों के आने से पहले भारत छोटे छोटे राज्यों में बंटा था और खून खराब होता रहता था. मुसलमानों ने ही भारत को एकता के सूत से बांधा, महल, सड़के और किले बनवाये. और आज उन्ही पर शक किया जा रहा है.
    चिराग ही ने उजालों को रौशनी दी थी.
    चिराग ही से उजाले सबूत मांगते है .
    हम अहले वतन से वतन परस्ती का,
    वतन को बेचने वाले सबूत मांगते हैं.

  23. गाँधी जी आपकी सोच ये बताती है, कि आप अभी भी उस पुरानी मानसिकता से चिपके हुए है, कि सारे भारतीय मुसलमान पाक समर्थित है! आप लोगो के मुताबिक डा ए पी जे अब्दुल कलाम जैसे लोग भी पाक समर्थित है! आप लोग पाकिस्तान पर हमला क्यों नहीं करते है तब आप देखिएगा कि कितने मुस्लमान पाक कि तरफ से लड़ते है! ऐसी धर्मान्धता न दिखाइए! आप लोगो को नेपाल नहीं दीखता जहा भारत विरोधी गतिविधियाँ हो रही है! असल में वहाँ मुसलमान नहीं है और वो देश से जुडी हुई समस्या है इसलिए वहाँ अभी आपको ध्यान नहीं देना है! आप जैसे लोगों में और पकिस्तान के कट्टरपंथियों में कुछ भी अंतर नहीं है सिवाय धर्म अलग होने के! अभी अफगानिस्तान में अमेरिका का हमला हुआ, इराक में अमेरिकी हमला हुआ कितने भारतीय मुसलमानों ने उसका विरोध किया ये आप बताने का कष्ट करे! क्योंकि अशिक्षित मुसलमान भी इतना समझदार है कि वो जानता है कि ये दूसरे देशों के मसले है और इसमें हमें कुछ नहीं बोलना है! पर आप लोगो कि सोच ये है कि बस पाकिस्तान का नाम आया मौका अच्छा है अपने भारतीय मुसलमानों को जितना पाओ ज़लील कर लो! अरे भाई पकिस्तान दूसरा देश है और उसके मसले वो खुद समझे हम किस अधिकार से उसके मामले में हस्तक्षेप करे! अभी आपकी कथित देशभक्त भा ज पा कि सरकार बनी थी तब पाकिस्तान पर हमला करके मुसलमानों कि देशभक्ति कि जांच कर लेते! हमें अपनी देशभक्ति का सबूत किसी बेहद बंद दिमाग व्यक्ति के आगे देने कि ज़रुरत नहीं है!

  24. शैतान को मानने वालों से इंसानियत की तवक्को करना बेमानी है. …. उतिष्ठकौन्तेय

  25. देख लिया न अजित जी आप इस्लाम के दुश्मन घोषित हो गए ………………………………………

  26. अख्तर साहब सच सच होता है वह कड़वा हो या मीठा आप नाजाने क्यों सच से मुह मोड़ने पर तुले हुए हैं, मेरे एक परम मित्र हैं असद कुरैशी साहब वे करीब आठ-नो साल पाले अपने मामा के यहाँ करांची मिलने गए थे वो गए तो थे एक महीने के लिए लेकिन सिर्फ बारह दिनों में वापस आ गए पूछने पर बताया की यहाँ ज्यादा सुकून हैं भाई वहां आप बिलावजह कब परलोक सिधार जाए कोई नहीं जानता हालांकि यहाँ की क़ानून व्यवस्था कोई बहुत अच्छी नहीं है लेकिन वहां से कई गुना बेहतर है, संयोग ये साहब मेरे पडोसी भी है और बिलकुल बचपन से साथ पढ़े हैं मेरे इनके सम्बन्ध ख़ास रिश्तेदारी से भी ज्यादा अच्छे हैं आप अपने दिल के अन्दर झांक कर देखिये आप के भी ऐसे कई लोगों के साथ सम्बन्ध होंगे. सरकारी रिपोर्टों को छोडिये आप अपने अनुभव क्या कहते हैं यह बताइये. अक्सर सरकारी रिपोर्टे तुष्टिकरण के लिए होती है कई रिपोर्टे तो इसाई लोगों की स्थितियां खराब बताती हैं, फिर भी आपके दिलको अगर मेरे कारण दुःख पहुंचा तो क्षमा प्रार्थी हूँ, क्योंकि यह बात ही हिन्दू धर्म सिखाता है.

  27. सन्देश ये नहीं है कि पाक में कुरान को न मानने वालों के लिए कोई स्थान नहीं, बल्कि सन्देश ये है कि पाक में कुरान का अपमान सहन नहीं किया जायेगा. आप के अनुसार पाकिस्तान के हिंदू भारत में शरण ले रहे हैं! लेकिन कोई उन्हें गद्दार नहीं कह रहा है अगर भारत के मुसलमान भारत कि निंदा करते हुए पाकिस्तान में शरण ले तो हर कोई उन्हें गद्दार कहने लगेगा. जब भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश का कानून गाय को विशेष दर्जा देता है तो कोई इसका विरोध क्यों नहीं करता. जब भारत में गाय भैंस का अपमान नहीं सहन किया जा सकता तो पाकिस्तान में इस्लाम का अपमान कैसे सहन किया जाये.
    अजित भोसले जी, आपने कड़वा सच नहीं बल्कि कड़वा झूठ लिखा है, क्या मुसलमान यहाँ चैन से हैं ? न मुसलमान सुरक्षित है और न उनकी इबादतगाह. सरकारी रिपोर्टों से भी साबित हो चुका है कि मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति से भी बदतर है, और आप कहते हैं कि मुसलमान चैन से हैं.

  28. इन सेकुलर शैतानो को तो अब सबक सिखाने का समय आ गया है, आगामी चुनावों में इन्हें पूरी तरह सत्ता से हटाना हर भारतीय का फ़र्ज़ होना चाहिए, हो सकता यह बात कुछ लोगों को नागवार गुजरे लेकिन यह एक कड़वा सच है की बहुसंख्यक हिन्दू समाज में अल्पसंख्यक बड़े सुख शांति से रह सकता है लेकिन बहुसंख्यक मुस्लिम समाज में किसी भी अन्य धर्म का अल्पसंख्यक कम से कम चैन से रह ही नहीं सकता, यद्यपि मुस्लिमों में भी उदारवादी पाए जाते हैं लेकिन उनकी संख्या या तो नगण्य है या फिर वे चाह कर भी कट्टरपंथियों का विरोध करने में स्वयं को अक्षम पाते हैं, मुस्लिमों की (सभी की नहीं) भी अजब मजबूरी है वे आधुनिक हथियारों को तो अपना सकते है लेकिन आधुनिक विचारों से दूरी बनाए रखते हैं, यहाँ पर भी उन्हें शमशीरो से ही आतंक फेलाना चाहिए लेकिन यहाँ तो उन्हें अत्याधुनिक ak-47 एवं आधुनिक विस्फोटकों की दरकार रहती है, मै कई मुस्लिमों के ब्लॉग पढता रहता हूँ, आप यकीं करिए बड़े- बड़े पड़े-लिखे मुस्लिम भी उस पुरानी सोच से चिपके रहते हैं जो अब पूरी तरह अप्रासंगिक हो गयी हैं, मेरा मानना है जो अच्छी बात है उसे अपनाओ बाकी समय के हिसाब से अपनी सोच को बदल लो, लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि जिसने परिवर्तन की बात की उसे तुरंत इस्लाम का दुश्मन घोषित कर दिया जाता है.

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