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    Homeसाहित्‍यकविताबेटियों पर अत्याचार !

    बेटियों पर अत्याचार !

    करें जितनी निंदा ।
    पड़ते शब्द कम ।।
    बेटियां पर अत्याचार ।
    होतीं आंखें नम ।।
    जा चुका है गर्त में ।
    अपना ये समाज ।।
    है व्यभिचार अनवरत ।
    तज कर लोक लाज ।।
    मर गयी संवेदना ।
    बना मानव दानव ।।
    राम राज्य कालखंड ।
    है पतन की लव ?
    करती रूदन आत्मा ।
    विलख रहा मन ।।
    चली प्रगति बात ।
    रहे पर विपन्न ।।

    कृष्णेन्द्र राय

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