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    मध्य प्रदेश: सिर्फ टूरिज्म नहीं, फिल्म निर्माण भी

    डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    घूमने-फिरने का अपना आनन्द है। आप जब नई जगह जाते हैं तो उस स्थिति में आप उन पलों को जीते हैं, जिनके बारे में आपने कभी कल्पना भी नहीं की होती और उसके बाद जिस सुखद अहसास की अनुभूति होती है, वह पल सदैव आपकी स्मृतियों में अंकित रहता है। इसलिए हर इंसान की यह कामना होती है, वह अपने जीवन में अधिकांश स्थानों पर घूमने का आनन्द ले पाए। वैसे दुनिया भर में एक से एक बढ़कर प्राकृतिक सौंदर्य, सामाजिक व्यवस्था, पुरातत्व से जुड़े ऐतिहासिक अनूठे स्थान हैं।

    भारत की बात करें तो देश भर में ऐसे अनेक स्थल हैं जहां प्राय: लोग जाते हैं, लेकिन इनके बीच मध्य प्रदेश की बात कुछ अलग है। यह सिर्फ ऐसे ही देश का दिल नहीं, बल्कि यहां की कलात्मकता से भारत धड़कता है। यह राज्य भारत के अंतरमन से रूबरू कराता है। यहां स्मारकों, मंदिरों पर नक्काशीदार शिल्पकारी, किले, महल, झरने, नदी और पर्वतमालाओं के अनोखे झरोखे हैं। आज यही कारण है कि पर्यटन की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण की यह सबसे ज्यादा पसंदीदा जगह है।

    देखा जाए तो यह शिवराज सरकार और राज्य पर्यटन विभाग की वह तमाम नीतियों का परिणाम है, जिसने देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। साथ ही फिल्म निर्माण से जुड़े कलाकारों एवं निर्देशकों को भी यह सुझाया है कि वाकई देश का दिल मध्य प्रदेश है। मध्य प्रदेश टूरिज्म विभाग द्वारा जब यह विज्ञापन तैयार कराया गया था, ‘एमपी अजब है, सबसे गजब है’- तब यह न सिर्फ देशवासियों बल्कि विश्व भर में सिर चढ़कर बोल रहा था। उसके बाद से आप देखेंगे कि मध्य प्रदेश में आनेवाले पर्यटकों की संख्या में लगातार तेजी आई है। वहीं, टूरिज्म के साथ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में इस वक्त मध्य प्रदेश छाया हुआ है। इसका जो सबसे बड़ा कारण समझ आता है वह है फिल्म-मेकर्स को दी जाने वाली शूटिंग परमिशन की सरल प्रक्रिया।

    प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति शिव शेखर शुक्ला आज यही कहते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशानुरूप पर्यटन विभाग द्वारा फिल्म-मेकर्स को दी जाने वाली शूटिंग परमिशन को लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2010 में शामिल किया गया है। संबंधित जिला कलेक्टर 15 दिन की निश्चित समय-सीमा में फिल्म शूटिंग परमिशन जारी करते हैं। इस सरलता का लाभ उठाते हुए फिल्म निर्माताओं के लिए मध्य प्रदेश पसंदीदा स्थल बनता जा रहा है। लोक सेवा गारंटी में आने से फिल्म निर्माताओं को समय-सीमा एवं सरलता से यहां फिल्म शूटिंग की परमिशन मिलना संभव है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश की फिल्म पर्यटन नीति 2020 वर्तमान आवश्यकता अनुसार व्यावहारिक और व्यापक है। इसी वजह से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश को नेशनल फिल्म अवार्ड 2020 में मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट से पुरस्कृत किया गया।

    कहना होगा कि मध्य प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है, जो शूटिंग के लिए पांच कैटेगरी में 35 लाख से पांच करोड़ तक की सब्सिडी दे रहा है। इसमें स्थानीय कलाकारों के लिए अनुदान से लेकर फिल्म इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, क्रू ठहरने के लिए छूट अलग से दिया जाना भी शामिल है। मध्य प्रदेश की फिल्म पॉलिसी में अंतरराष्ट्रीय फिल्म, टीवी सीरियल और वेब सीरिज के लिए भी अलग से अनुदान की व्यवस्था है।

    मध्य प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी की गई ‘मध्य प्रदेश फिल्म पर्यटन नीति- 2020’ को यदि विस्तार से देखें तो फिल्म पर्यटन नीति के अनुसार, किसी भी भाषा में फिल्म निर्माण के लिए प्रदेश में फिल्मों की ज्यादा से ज्यादा शूटिंग पर अनुदान देने का प्रबंध है। किसी निर्देशक की पहली और दूसरी फिल्म की शूटिंग के लिए अनुदान एक करोड़ रुपये या फिल्म की कुल लागत का 25 प्रतिशत तक दिया जा रहा है। राज्य सरकार की इसमें अपेक्षा यही है कि फिल्म की 50 प्रतिशत शूटिंग मध्य प्रदेश में हो। तीसरी और आगे की फिल्मों के लिए एक करोड़ 50 लाख रुपये तक या फिल्मों की लागत का 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।

    यहां एक समर्पित फिल्म सुविधा सेल राज्य टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक की देखरेख में फिल्म पर्यटन विकास के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता हुआ दिखता है। जिसमें यह निर्धारित किया गया है कि सेल का मुख्य कार्य फिल्म पर्यटन नीति के क्रियान्वयन, प्रक्रिया निर्धारण, आवेदनों के निराकरण संबंधी समन्वय, फिल्म उद्योग की अद्यतन प्रवृत्तियों के अनुसार नीति प्रस्ताव तैयार करना है। फिल्मों, धारावाहिकों और वेब सीरीज की शूटिंग करने के इच्छुक फिल्म निर्माताओं के लिए वन-प्वाइंट एंट्रेस सिस्टम और समयबद्ध अनुमति तंत्र के लिए ऑनलाइन फिल्म वेब पोर्टल तैयार है।

    यहां शूट हो चुकी सफल फिल्मों की बात करें तो अक्षय कुमार की `पेडमैन’, सलमान खान की `दबंग’, रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ की `राजनीति’, रितिक रोशन की `मोहनजोदारो’, इरफान खान की `पानसिंह तोमर’ और 1998 में आई सलमान खान की `प्यार किया तो डरना क्या’ जैसी अनेक फिल्मों को इस सूची में रख सकते हैं। इंदौर और महेश्वर में `डर्टी पॉलिटिक्स’, `यंगिस्तान’, `यमला-पगला-दीवाना’, `द वलई’, `मेरिट लिस्ट बाय कास्ट’, `तेवर’ जैसी कई फिल्मों के साथ कुछ चर्चित सीरियल्स की भी शूटिंग हो चुकी है। फिल्म डायरेक्टर अनिल शर्मा सिंह साहब द ग्रेट की शूटिंग महेश्वर की मनोरम वादियों और भोपाल में करने आए, उसके बाद से वे लगातार यहां आ ही रहे हैं। सोनू सूद और ईशा कोप्पीकर की `एक विवाह ऐसा भी’ का पूरा फिल्मांकन हुआ। विद्या बालन की फिल्म `शेरनी’ और भूमि पेडनेकर की फिल्म की `दुर्गावती’ की शूटिंग यहां हुई।

    इसी प्रकार से फिल्म निर्देशक प्रकाश झा अपनी फिल्म `राजनीति’, `आरक्षण’, `सत्याग्रह’, `चक्रव्यूह’ और `लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ की शूटिंग के लिए यहां आते रहे हैं। संजय दत्त की बायोपिक `संजू’ का हिस्सा भोपाल की सेंट्रल जेल में शूट हुआ। अजय देवगन, विवेक ओबेरॉय और अभिषेक बच्चन की फिल्म `युवा’ की शूटिंग राजधानी भोपाल के मिंटो हॉल में हो चुकी है। हुमा कुरैशी की वेब सीरीज `महारानी’ की शूटिंग भोपाल में हुई, जबकि पिपरिया में नुसरत भरुचा की फिल्म `’छोरी’ और गैंगस्टर विकास दुबे पर बन रही फिल्म शूट की गई। चंबल के बीहड़ों में बनी `सोनचिरैया’ फिल्म भी यही फिल्मायी गई। इसके अलावा फिल्म `मीमांसा’, `हश’ और `सूटेबल बॉय’, राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर स्टारर फिल्म `स्त्री’, वरुण धवन, अनुष्का शर्मा स्टारर `सुई-धागा’, राजकुमार राव की `लूडो’, अनुपम खेर की `द लास्ट शो’ की शूटिंग सफलता से मध्य प्रदेश में की गई है।

    यहां हम यदि फिल्म निर्माण संबंधी सिर्फ एक वर्ष का आंकड़ा देखें तो वर्ष 2021 में 22 फिल्म, वेब सीरीज और शॉर्ट फिल्मों की शूटिंग मध्य प्रदेश में होना पाया गया। वहीं बीते पांच वर्षों के फिल्म निर्माण संबंधी आंकड़े हमें बहुत उत्साह से भर देते हैं। इस दौरान 175 से ज्यादा फिल्म और वेब सीरिज की शूटिंग यहां हुई है। लंदन, कैलिफोर्निया एवं अन्य देशों के प्रोडक्शन हाउस भी यहां अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट शूट करने आ रहे हैं। प्रदेश में निर्मित फिल्मों की खूबसूरती इतनी अधिक है कि आज मध्य प्रदेश की धरती पर शूट हुए अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट ऑस्कर तक के लिए नॉमिनेट हो चुके हैं।

    अभी भी प्रदेश में पांच हिंदी फिल्मों, वेब सीरिज के साथ ही एक डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग चल रही है। विस्ताराम, महल, हरिओम, बफर जोन और अन्य प्रोजेक्ट में यह शूटिंग राजधानी भोपाल समेत संस्कारधानी जबलपुर, चंदेरी, रीवा, सीधी, ओरछा के साथ ही खजुराहो में चल रही है।

    अब उम्मीद की जा रही है कि अतिशीघ्र दक्षिण भारत की बड़ी फिल्में भी प्रदेश में शूटिंग के लिए आएंगी। वहीं, यह भी आशा की जा रही है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप जल्द ही प्रदेश को फिल्म सिटी मिल जाएगी, जहां भारत के तमाम राज्यों से ही नहीं बल्कि दुनिया भर से फिल्मकार अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए बड़ी संख्या में आते हुए दिखाई देंगे।

    मयंक चतुर्वेदी
    मयंक चतुर्वेदीhttps://www.pravakta.com
    मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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