लेखक परिचय

केशव आचार्य

केशव आचार्य

मंडला(म.प्र.) में जन्‍म। माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से प्रसारण पत्रकारिता में एमए तथा मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल कीं। वर्तमान में भोपाल से एयर हो रहे म.प्र.-छ.ग. के प्रादेशिक चैनल में कार्यरत।

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साल 2010-11 का रेल बजट ममता बैनर्जी ने संसद में पेश कर दिया है। बजट को पेश करते वक्त दीदी का कहना है उन्होंने इस बात का खास ध्यान रखा है कि उनकी योजनाएं आर्थिक पैमाने पर कितना खरा उतरती है, साथ इस बजट का आम लोगों पर क्या प्रभाव पडेगा। ममता बैनर्जी ने कहा कि हमारा लक्ष्य रेलवे से अधिक से अधिक लोगों को जोडने का है इसी आधार पर रेल बजट तैयार किया गया है। पूरे देश से इस बजट के लिए 5000 से भी ज्यादा की मांगें आई थीं. इन मांगों को ध्यान में रखते हुए ममता बैनर्जी ने लोगों पर अपनी ममता खूब बरसाई। यात्री किराये में कोई बढोत्तरी नहीं की गई है, साथ ही माल भाडे मेंकिसी तरह की किराये बढ़ोत्तरी भी नहीं की गई है। बाबजूद इसके रेलवे का कुल राजस्व 88281 करोड रहने का अनुमान भी है।

रेलवे के लिए मिशन 2020 लागू करते हुए दीदी ने लोगों पर सौगातों की बौछारें कर डाली है, 5 सालों में पूरे देश को रेलवे के नेटवर्क से जोडने की बात कहते हुए यात्री सुविधाओं के लिए 1302 करोड रूपये भी दे डाले हैं. साथ दूर-दराज के क्षेत्रों को रेलवे से जोडने के लिए हर साल 1000 किमी नई रेल लाइन बिछाने की भी बात की गई है. सदन में पेश इस रेल बजट का मूल्याकंन अगर योजनाओं के आधार पर करें तो यह बिल्कुल सही है कि यह बजट हर तरीके लोकलुभावन है लेकिन ऐसी कई जिलों को इस बार भी इस बजट में जगह नहीं मिली है जिनके लिए कई सालों से रेल की मांग उठती रही है, मध्यप्रदेश के कई ऐसे जिले हैं जहां पर रेलवे की सुविधाओं को लेकर कई बार आंदोलन हुए हैं बाबजूद इस बार भी वे किसी तरह की भी सुविधाओं से वंचित हैं आमूमन मंडला जैसे पिछडे जिले में एकमात्र छोटी लाइन आज भी हाशिये पर है, लंबे समय से इसे लाइन के लिए ब्राडगेज की मांग की जाती रही है लेकिन सिवाय आश्वासनों के यहां के लोगों को अब तक कुछ भी नहीं मिल पाया है, मध्यप्रदेश में सिर्फ 4 नई ट्रेनों को दिया गया है जबकि अन्य स्थानों के लिए भी ट्रेनों की मांग की जाती रही है। बजट में रेल मंत्री ने बारबार इस बात पर जोर दिया है कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जायेगा, लेकिन सुविधाओं की बढ़ोत्तरी और 50 स्टेशनों विश्वस्तरीय बनाने का दावा करने वाली योजनाओं के लिए उन्होंने किसी विशेष तरह की योजनाओं का जिक्र नहीं किया है, सिवाय विज्ञापनों के माध्यम से ही राजस्व की बात करती नज़र आई। पूरे बजट को ध्यान से देखा जाये तो एक बात साफ नज़र आती है कि ममता की रेलगाड़ी, स्टापेज से सीधा पश्चिम बंगाल की दिशा की तरफ ही जा रहा है.आखिर ऐसा क्यों? 5 खेल अकादमी में से एक कोलकाता में, हाबड़ा में रवीन्द्र म्यूजियम, गीताजंलि म्यूजियम, संस्कृति एक्सप्रेस और भी ना जाने क्या क्या? इस महत्वाकांक्षी नेता ने बड़ी ही सूझबूझ से अपनी सारी योजनाओं को बंगाल के लिए केंद्रित करके यह जताने की कोशिश की है वे अपने राज्य के प्रति कितना वफादार है। कहीं ना कहीं 2011 की तैयारी में लगी ममता के इस बजट को सिवाय बंगालप्रिय के और कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन एक सर्वमान्य सत्य तो यह भी है पूर्व के जितने भी रेल मंत्रियों ने अपना बजट पेश किया वे भी तो सिर्फ अपने वोट बैंक को साधने का प्रयास करते रहें हैं ऐसे में यदि दीदी ने भी मौके पर चौंका जमाया तो क्या गलत किया है।

-केशव आचार्य

3 Responses to “ममता की रेल या रेल में ममता”

  1. अखिलेश शुक्ला

    ममता बनर्जी के द्वारा पेश किए गये बजट में कुछ मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया है…देश के कुछ लोग इस बजट से खासे नाराज दिखे…इसका सीधा सा उदाहरण विलासपुर से लिया जा सकता है…जदां के लोगों का यही कहना है…कि इस बार के बजट में एक बार फिर से बिलासपुर को छला गया है…लेखक का यह आर्टिकल बहुत ही सराहनीय है…इस आर्टिकल में वो सारे तथ्य हैं जो एक अच्छे आर्टिकल में होने चाहिए….

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  2. mahendra rai

    लेखक के द्वारा रेल बजट पर त्वरित विशलेषण एवं बजट पर दी गई सारी जानकारियां वाकई बहुत अच्छी व काबिले तारीफ है। इस पर दी गई सभी प्रकार की जानकारी पाठकों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी

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  3. केवल त्रिपाठी

    बहुत ही बढ़िया लेख है सूक्ष्मतम विश्लषेण है इस लेख ,सचमुच दीदीका ये बजट बंगाल को ही केंद्रित करके बनाया गया है.बाकी के प्रदेश वासियों को सिवाय लालीपोप के औरकुछ नहीं मिल पाया, लेखक को साधूवाद

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