मुसलमानों की देशभक्ति पर शक क्यों

देश में शिवसेना ने मराठा प्रेम के नाम पर जो लडाई छेडी हुयी है उसने इन दिनों देश प्रेम का रुख अख्तियार कर लिया है। कभी महाराष्ट्र में ‘बजाओ पुंगी हटाओ लुंगी’ का नारा देने वाले बालासाहेब ठाकरे आज जबरदस्त देशभक्ति का प्रदर्शन करते हुये सडक़ों पर उतर आये हैं और उन्हें शाहरुख खान के पाकिस्तानी खिलाडियों के आईपीएल में चयन को लेकर दिये गये बयान में देशद्रोह जैसा कुछ नजर आता है। बालासाहेब ने इसे देश प्रेम से जोडा है और कहा है कि पाकिस्तानी खिलाडियों से मोहब्बत जताने वालों को वे कभी माफ नहीं करेंगे। लेकिन क्या वे इस बात का जवाब दे पायेंगे कि कुछ दिनों पूर्व उन्होंने सचिन तेंदुलकर को भी इस बात के लिये धमकाया था कि उन्होंने खुद को पहले भारतीय क्यों कहा। क्या वे इस बात का जवाब देंगे कि वे उत्तर भारतीयों से घृणा क्यों करते हैं, वह खुद इस बात की दुविधा में हैं कि वे मराठियों की बात करते हैं, या भारतीयों की या फिर हिंदू हितों की। उनकी इस घृणास्पद राजनीति ने देश में इस बात की लडाई तेज कर दी है कि आखिर भारत पर पहला हक हिंदुओं का है या मुसलमानों का। आजादी के तिरसठ साल बाद भी इस बात को जिंदा रखने का श्रेय ऐसे ही राजनीतिज्ञों को जाता है जिन्होंने क्षेत्र, भाषा, जाति के नाम पर देश को बांटने में कोई कसर नहीं रखी। इस बात से सबसे गलत संदेश यह गया कि देश ने लोगों को हिंदू और मुसलमान के नाम पर विभक्त कर दिया। हां, यह बात सही है कि पाकिस्तान जैसे राष्ट्रद्रोही देश का नाम सुनते ही किसी के भी तन मन में आग लग जाती हो लेकिन शाहरुख ने ऐसा बयान नहीं दिया था जिससे राष्ट्रप्रेम पर आंच आये। कुल मिलाकर मराठा प्रेम और हिंदू हितों की लडाई लडने वाली शिवसेना ने इस पूरे मुद्दे को अपनी अस्मिता से जोड लिया और माय नेम इज खान की रिलीज के दिन जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला। शिवसेना के इस प्रकरण ने देश को फिर से उस दर्द की याद दिला दी जिसने हमें देश विभाजन का दर्द दिया। आखिर ऐसा क्यों होता है कि देश में आतंकी हमला होते ही खुफिया एजेंसियों की सुईयां लश्कर, हुजी और पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों की ओर घूम जाती है और इसमें कोपभाजन बनना पडता है हमारे देश के उन देशभक्त मुसलमानों को जिन्हें बार-बार इस बात का सर्टीफिकेट देना पडता है कि वे भारतीय हैं या भारत से प्रेम करते हैं। आजादी के इतने दशक बाद भी इस स्थिति के लिये हमारे राजनेता जिम्मेदार हैं जिन्होंने हिंदू-मुसलमानों के बीच जहर घोलकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकनी जारी रखी। आखिर ऐसा क्यों हुआ, क्यों कोई इस देश में हिंदुओं से इस बात का प्रमाण नहीं मांगता कि तुम देशभक्त हो या नहीं। करोडों रुपये का घोटाला करने वालों से कोई इस बात का जवाब क्यों नहीं मांगता कि तुम देशभक्त हो या नहीं, देश में 1984 दंगे कराने वालों से कोई इस बात का जवाब नहीं मांगता कि आप देशभक्ति का प्रमाण दो। इस देश के विभाजन का विरोध मुसलमानों ने भी किया था और जिन लोगों को देश विभाजन की जल्दी थी वे भी धर्म से हिंदू ही थे। ऐसे में क्यों बार-बार मुसलमानों को न्यायिक कटघरे में खडा कर दिया जाता है कि आप अपनी देशभक्ति का सबूत दो। क्यों साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित जैसे लोगों से इस बात का जवाब नहीं मांगा जाता कि तुम हिंदू राष्ट्र बनाने के नाम पर देश में दंगों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। क्यों नरेंद्र मोदी जैसे लोगों से इस बात का जवाब नहीं मांगा जाता कि गोधरा दंगों में निर्दोष मुसलमानों ने किसी का क्या बिगाडा था। हां गलत लोग सभी जगह हो सकते हैं लेकिन इसका यह मतलब तो नहीं कि आप देश के सारे मुसलमानों पर शक करें। क्या देश को इतनी तरक्की दिलाने में मुसलमानों का कम अहम रोल है, क्या देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने देश को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र नहीं बनाया आखिर इसके बाद भी हम क्यों मुसलमानों से इस बात का जवाब मांगते हैं कि तुम देशभक्त हो या नहीं। इस पूरी स्थिति के लिये देश के भ्रष्ट नेता जिम्मेदार हैं।

बात हो रही थी बाल ठाकरे की, राहुल गांधी पर गलत बयानों को लेकर पहले भी बाल ठाकरे मीडिया की सुर्खियों में जगह पा चुके हैं। लेकिन माय नेम इज खान को लेकर जो हुआ वह वास्तव में बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था क्योंकि ऐसे देश में जहां की 78 प्रतिशत जनता 20 रुपये से कम में गुजारा करती हो वहां पर भाषा, क्षेत्र, जाति, धर्म, रंग के नाम पर किसी के साथ किसी भी तरह का उत्पीडन घोर पाप है। जिसका दंश हम पिछले बीस सालों से पूर्वोत्तर में झेलते आ रहे हैं जहां पर आज भी हिंदी भाषियों की हत्या की खबरें समाचार पत्रों की सुर्खियां बनती रही हैं। न जाने क्यों राष्ट्र से ऊपर महाराष्ट्र को रखकर राजनीति की जा रही है। क्यों देश में क्षेत्रवाद को हवा दी जा रही है। हम क्षेत्रवाद का दंश वैसे ही पंजाब के काले दिनों के रूप में देख चुके हैं आज भी पंजाब में हवाला के पैसों से नवयुवकों को भटकाया जा रहा है आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। पिछले कुछ समय से विशेषकर तब से जब से शिवसेना ने दो विधानसभा चुनाव हारे हैं उसका मराठा प्रेम हिलोरें मार रहा है। अगर यही संदेश सारे देश में जायेगा तो हो गया बस बन गये हम महाशक्ति, बन गये इकोनोमिक सुपरपावर। महाराष्ट्र में तुम परप्रांतीयों को मारोगे और मराठी दूसरे राज्यों में लोगों के गुस्से का शिकार बनेंगे। ऐसे में विकसित देश का सपना देखना कहीं बेमानी तो नहीं होगी, ऐसे में देश की युवा पीढी क्षेत्रवाद के दंश का शिकार तो नहीं बन जायेगी। इसके लिये बडे-बडे धार्मिक आयोजनों की बजाय संवाद कार्यक्रम आयोजित किये जाने चाहिये जिससे लोगों में प्रेम बढे अौर क्षेत्रवाद का जहर न फैल सके। राष्ट्र से ऊपर महाराष्ट्र बनाने की जो लडाई शिवसेना ने छेड रखी है उससे एक गलत संदेश लोगों के बीच जा रहा है साथ ही देश के दूसरे हिस्सों में भी युवाओं को इस बात के लिये उकसाया जा रहा है कि वे भी इसी तरह की लडाई लडें। चंद वोटों के लालच में हम अगर भारत की अस्मिता से खेल सकते हैं तो हमें हिंदू हितों की रक्षा का कोरा नारा देना बंद करना होगा। भारत विभिन्न भाषाओं, धर्मों, जातियों के लोगों का समागम है इसलिये इस बात का ध्यान रखना होगा कि हम किसी भी कीमत पर भारत की एकता, अखंडता को खंडित न होने दें क्योंकि इससे देश में आपसी मनमुटाव व वैमनस्य तो बढेग़ा ही साथ में विदेशों में भी भारत की नकारात्मक छवि बनेगी जिससे सीधा नुकसान देश की तरक्की का होगा और हम विकास की दौड में पिछड ज़ायेंगे।

-पवन कुमार उप्रेती

13 thoughts on “मुसलमानों की देशभक्ति पर शक क्यों

  1. जिस धर्म का सिधांत ही गलत हो वो कहाँ सुधर सकता है -लेखक महोदय आपने ठीका ले रखा है क्या/ मुस्लमान कभी भी नहीं सुधर सकता है / यदि सुधारना है तो कुरान में संशोधन करबा दो / अछी बातें लिखा करो / इस्लाम बेवकूफों का मजहब है /कोई पैगम्बर कैसे ये कह सकता है की गैर इस्लाम काफिर है और उसे जलाकर मर देना चाहिए – कुरान: 9 अध्याय, छंद 5: “तब जब पवित्र महीने बीत चुके हैं, गैर इस्लाम (अन्य धर्मावलम्बी, यानि काफिर) तुम्हे जहाँ भी मिले उन्हें मिलके मार, और उन्हें पकड़ और उन्हें घेर, और उन्हें हर घात की तैयारी के लिए, लेकिन अगर वे पश्चाताप और इस्लामी जीवन शैली का पालन करे, तो उनके मुक्त रास्ता छोड़ दें. / सच तो यह है की मुहम्मद साहेब एक धर्मान्ध व्यक्ति थे, उन्होंने हजारो-लाखो लोगो को इस्लाम कबूल करवाने के लिए मौत के घाट उतरवा दिया / महम्मद साहेब एक मानसिक रूप से बिमाड व्यक्ति था / वो एक लूटेरा, असभ्य और बर्बर था /

  2. कोई पैगम्बर कैसे ये कह सकता है की गैर इस्लाम काफिर है और उसे जलाकर मर देना चाहिए – कुरान: 9 अध्याय, छंद 5: “तब जब पवित्र महीने बीत चुके हैं, गैर इस्लाम (अन्य धर्मावलम्बी, यानि काफिर) तुम्हे जहाँ भी मिले उन्हें मिलके मार, और उन्हें पकड़ और उन्हें घेर, और उन्हें हर घात की तैयारी के लिए, लेकिन अगर वे पश्चाताप और इस्लामी जीवन शैली का पालन करे, तो उनके मुक्त रास्ता छोड़ दें. / जिस धर्म का सिधांत ही गलत हो वो कहाँ सुधर सकता है -लेखक महोदय आपने ठीका ले रखा है क्या/ मुस्लमान कभी भी नहीं सुधर सकता है / यदि सुधारना है तो कुरान में संशोधन करबा दो / अछी बातें लिखा करो / इस्लाम बेवकूफों का मजहब है /

  3. हाँ,
    हमें सभी मुसलमानों से परहेज नहीं है….

    कलाम साहब ने देश को बहुत कुछ दिया है…
    रफ़ी को हम दुनिया में अब तक और आने वाली सदियों तक का अकेला हीरा मानते हैं…
    बिस्मिलाह खाँ के जाने के बाद भी उनकी शहनाई की गूँज हमारे कानों में है….
    फ़िदा हुसैन की तस्वीरों पर उठे बवाल पर भी चाहे अनजाने में ही सही (हो सकता है हम ग़लत हों..)..हम उसके साथ होते हैं…

    वहीदा रहमान और मीना कुमारी …ग़ालिब की शायरी की तरह साँसों में बसी हैं…

    लेकिन….

    अगर बात आतंक के नाम पर शक करने की आ जाए…
    तो ये सब लोग भी शक की लिस्ट में आयें तो आ जाएँ…इनके साथ हम जो सिर्फ और सिर्फ इनके फैन हैं…शक की लिस्ट में आजायें तो आ जाएँ…

    ग़ालिब भी..
    और हाँ….मीना कुमारी भी……

    आतंक से आम आदमी को बचाने के लिए हर शक जायज़ है..

  4. ब्लोगर्स तक का तो ई मेल आई डी….
    वेबसाईट…
    वगैरह भी माँगा हुआ है आपने…

    इसके बाद भी कुछ रहता है कहने के लिए….??

  5. इधर तो कमेन्ट बॉक्स ही उलटा है…
    और क्या सीधा होगा….?
    यूँ तो किसी भी उलटी चीज को सीधा करके देखने की आदत है..
    पर यहाँ पर अपनी समझ काम नहीं आ रही…

    हमारा जवाब अदा जी दे चुकी हैं…

  6. (१) Lashkar-e-Toiba,(२) Jaish-e-Mohammed,
    (३)Jamaat-ul-Mujahideen,(४) Al-Qaeda,(५) Hezbollah,(६) Fatah al-Islam,(७) Al-Aqsa, (८) Hamas,(९) Taleban,(१०) Islamic Jihad,(११) Armed Islamic Group,(१२) (१३) Abu Sayyaf Group,——–> यह Action है। —-> बजरंग दल और शिव सेना reaction है।
    पवन कुमार जी अब बतानेकी कृपा करे, कि पहले ऍक्शन या रिऍक्शन?

  7. Swapna Manjusha ‘ada’ जी। आपसे १०० प्रतिशत सहमति। आपकी टिप्पणीसेहि मुझे अच्छी जानकारी प्राप्त हुयी।साधुवाद।लेखको कोई पढे या ना पढे, आपकी टिप्पणी अवश्य पढे।

  8. आपका ओजपूर्ण भाषण पढ़ा
    और अब आप सुनिए की क्यूँ कहा जाता है, आपने सिर्फ शिव सेना और बजरंग दल का ही नाम सुना होगा
    अब आप ये लिस्ट देखिये…:
    Lashkar-e-Toiba
    Jaish-e-Mohammed
    Jamaat-ul-Mujahideen
    Al-Qaeda
    Hezbollah
    Fatah al-Islam
    Al-Aqsa
    Hamas
    Taleban
    Islamic Jihad
    Armed Islamic Group
    Abu Sayyaf Group
    लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद

    इनके अलावा भी सैकड़ों हैं हमें नाम नहीं याद ..लेकिन हैं…ये सारे ग्रुप भारत में भी काम कर रहे हैं…
    किसी पर कोई भी इल्जाम नहीं लगाना चाहता है …आप खुद ही सोचिये अगर हिन्दू सहनशील नहीं होते तो क्या भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं बन गया होता …अदना सा नेपाल तक बन गया है…आखिर यह सहनशीलता ही तो है…’जियो और जीने दो” वाली बात ही तो है…आखिर पकिस्तान इस्लामिक राष्ट्र क्यूँ है जबकि दोनों देश एक ही दिन आज़ाद हुए हैं.. आप हिन्दुओं की सहनशीलता की तो बात ही मत कीजिये ..इतना सहशील कौम आपको दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी…आप खुद को ही देखिये न…आप हिन्दू हैं लेकिन आप पक्ष ले रहे हैं उनका…आप कल्पना भी नहीं कर सकते किसी को पकिस्तान या सौदी अरब में जो हिन्दुओं के पक्ष में खड़ा हो जाए …कुछ घटनाएं घटित हुई है…अगर २० हिन्दुओं के लिए हुई है तो २ मुसलामानों के लिए भी हुई है…यह नहीं होना चाहिए लेकिन हुई हैं…
    और बात तभी हाथ से निकलती है जब पानी सर के ऊपर से चला जाता है…आप याद कीजिये हमारा भारत ८० के दशक से ही आतंक का सामना कर रहा है…बसों में स्टेशन पर हर जगह लिखा होता था…’किसी अनजान वास्तु को न छुवें बम हो सकता है’ हमर तो बचपन ही बीता है इन साइन को पढ़ कर…

    एक बात और ..इतनी लम्बी चौड़ी बातें भी आप इसलिए बोल गए क्योंकि आप भारत में है …यही भाषण अगर आप पकिस्तान या सौदी में देते तो आपका सर धड से जुदा नहीं रहता
    यह सच है की गेहूं के साथ घुन भी पिस जाता है…कुछ बिलकुल निर्दोष लोगों को यह सब झेलना पड़ता है…तो ऐसा ही है…अब मैं हिन्दू हूँ..और कनाडा में रहती हूँ…लेकिन मुझे भी शक की नज़र से देखा जाता है…क्यूंकि हमारा रंग हमारे आड़े आता है…कितने सिख भाईयों को रोज ही साबित करना पड़ता है की वो ओसामा बिन लादिन के रिश्तेदार नहीं हैं.. और यही हमारी नियति बन गयी है…अब आप ज़रा ये बताइए…हम क्यूँ भुगत रहे है जब की हमारा ओसामा तो दूर उसके पोस्टर तक से कोई रिश्ता नहीं है…तो हम फिर भी उस कमीने की करनी की वजह से हमारी ज़िन्दगी हालाक हो रही है…
    जो आज़ादी आपको मिली है उसका आदर कीजिये…क्योंकि ऐसी आज़ादी दुनिया के किसी भी देश में नही है…दुनिया में एक मात्र भारत ही ऐसा देश है जिसने सही मायने में धर्मनिरपेक्षता को बरकरार रखा है…मैं यह कह सकती हूँ क्योंकि मैं…कई देशों में रह चुकी हूँ..
    जी हां मैं आपकी इस बात से सहमत हूँ …की बाल ठाकरे का क्षेत्रीयवाद बहुत ही कलुषित दीमाग की उपज है…और मैं इसकी भर्त्सना करती हूँ…लेकिन शाहरुख़ की बात का विरोध मैं भी करुँगी….क्योंकि यह समय नहीं था इस बात का …अभी-अभी मुंबई में आतंक की आग ठंडी नहीं हुई थी….और पकिस्तान के हथकंडों से लोग उबार नहीं पाए थे…शाहरुख़ जैसी हस्ती जो मुंबई में ही रहता है…इस तरह पकिस्तान का पक्ष लेकर लोगों की भावनाओं से ही खिलवाड़ कर गया ….जाहिर सी बात है ..बुरा लगेगा ही और लगना भी चाहिए…आप नहीं समझेंगे…जाके पाऊँ न फटे बिवाई सो का जाने पीर पराई..
    आप खुस ही कल्पना कीजिये अगर कोई हिन्दुस्तानी , पकिस्तान में ऐसे गोलियां चलता हुआ पकड़ा जाए तो क्या पाकिस्तानी सरकार उसे इतने दिनों तक दामाद बना कर रखेगी ?? सोचिये ज़रा….आपको यू tube पर मिल जायेंगे कई वीडियो जिसमें दहशतगर्द किसी काफ़िर का सर तलवार से उदा रहे हैं…वो सारे के सारे जिहादी ही हैं और आखिर में एक बाल ठाकरे के साथ पूरे हिन्दू वर्ग से सवाल करना उचित नहीं है….क्योंकि अगर एक ऊँगली आप इधर दिखाते हैं तो तीन उंगलियाँ उधर भी है…
    बोलिए ज़रूर क्योंकि यह आपका अधिकार है …लेकिन सोच समझकर…
    धन्यवाद..

  9. अब तक चार जगह तो यह लेख पढ़ चुका हूँ. लगता है लेखक महोदय ने जेहादियों की छवि-सुधार का ठेका ले लिया है. ९०% आंतकवादी मुस्लिम समाज से आते हैं. ऐसे में शक उन पर होना जायज ही है. बेहतर होगा कि लेखक के इस सवाल का जवाब खुद मुस्लिम समाज अपने भीतर ढूंढें.

  10. jo tareeka conversion ka aur apni sankya badane ka apanaya ja raha hai…wo hi in logon ki sabse badi galti hai. Atankwad ne puri dunia ko nark bana diya hai. Sadhwi per aarop galat hain. agar sahi bhi hain to marta kya na karta wali baat suni hai. Afjal jaise to roz hi hamla kar rahe hain. hajaron hamle agar kisi per honge to uska jawab bhi aayega. Vichardharon ka takrao nischit hai, vishvayudh bhi hoga. Ab agar kuch cheez is dunia ko ekjut kar sakti hai to wo hai, Dusari Dunia ke logon ka Hamari dunia per hamla.

  11. महाशय, पवन कुमार उप्रेती जी
    हक बात कहने के लिए में आपको बधाई और उन लोगों (जो इस लेख को पढ़ कर सच का सामना नहीं कर पाएंगे) की हालत पर तरस खाना चाहता हूँ!
    बचपन से एक तराना सुनता आ रहा हूँ “न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्तान वालो, तुम्हारी दास्ताँ तक न रहेगी दास्तानों में”
    अगर यही हाल रहा तो वोह दिन दूर नहीं जब ये पंक्ति “सच” में बदल जाएगी
    और रही मुसलमानों की बात तो उनका विरोध, हिन्दुस्तान से निकालने की कौशिश तो बहुत पहले से होती आ रही है
    ठाकरे खुले आम कर रहे हैं तो आस्तीन के साँपों की संख्या भी कम नहीं है
    तभी तो पाकिस्तान बना अगर आपसे कोई कहे “आप अपना घर छोड़ कर कहीं और चले जाओ ” तो क्यू जायेंगे आप? हरगिज़ नहीं जाओगे
    और अगर आपको कोई परेशानी है तो बिलकुल आप घर, गाव, शहर यहाँ तक की देश भी छोड़ने पर मजबूर हो जाओगे
    लेकिन फिर भी कुछ लोग हिन्दुस्तान में रहे ये समझ कर की अपना मुल्क है
    उनकी मिसाल मैं तो इस प्रकार देना चाहूँगा
    “कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं है उनकी ”
    नहीं तो कौशिश तो पूरी की जाती है
    अफजल गुरु और अन्य लोगों की फांसी की मांग तो लगभग मैं रोजाना ही सुनता रहता हूँ लेकिन——–
    “साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित” जैसे लोग क्या इस पुरस्कार (फाँसी) के हक़दार नहीं हैं ? उन्हें पुरस्कृत करना तो नामुमकिन है लेकिन उनके पुरस्कार की मांग तो करनी चाहिए
    यही दशा रही तो कल कोई और पाकिस्तान बन जायेगा और कुछ जिद्दी लोग फिर हिन्दुस्तान में रह जायेंगे
    लेकिन समस्या जस की तक रहेगी होने वाला कुछ नहीं है

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