लोकसभा चुनाव से जुड़ी रोचक जानकारियाँ

राकेश कुमार आर्य

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है । अब जबकि हमारे देश में 17वीं लोकसभा के चुनाव हो रहे हैं तो विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र के बारे में कुछ विशेष जानकारी रखना हम सबके लिए उपयोगी होगा ।इस लेख में हम कुछ ऐसे ही तथ्यों पर प्रकाश डालने का प्रयास करेंगे जो हमारे पाठकों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
भारत में पहली बार लोकसभा चुनाव 1951-52 में हुए थे। यह चुनावी यात्रा तब से सतत जारी है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी को मनाया जाता है।चुनावों में खड़े होने वाले प्रत्याशियों के लिए प्रयोग किए जाने वाला शब्द ‘ Candidate’ लैटिन भाषा के ‘ Candidatus’ से आया है।  कहने का अभिप्राय है कि कैंडिडेट शब्द इंग्लिश का मूल शब्द नहीं है, बल्कि इंग्लिश ने लैटिन से लिया है और हम इसे ज्यों का त्यों अपने यहां प्रयोग करते हैं।
चुनावों में भारत में प्रत्याशियों के खड़े होने की संख्या निश्चित नहीं है । एक ही विधानसभाई या संसदीय क्षेत्र से एक से अधिक कितने ही उम्मीदवार खड़े हो सकते हैं । 1996 में तमिलनाडु के मोडाकुरिची विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में एक सीट के लिए 1033 उम्मीदवार खड़े हुए थे। उस समय मतपत्र एक पुस्तिका के रूप में छापना पड़े थे! स्वतंत्रता के पश्चात भारत वर्ष में जितने भी चुनाव अभी तक हुए हैं ,उन सब में सबसे अधिक उम्मीदवार खड़े होने का अभी तक का रिकॉर्ड तमिलनाडु की इसी विधानसभा के नाम दर्ज है। 
अमेरिका को भी विश्व का एक लोकतांत्रिक देश माना जाता है। यह भी एक संयोग की बात है कि वहां की रिपब्लिकन पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘हाथी ‘ है ,जो भारत में मायावती की बहुजन समाज पार्टी का चुनाव चिह्न है! 

-लोकसभा चुनावों के समय कोई भी प्रत्याशी भारत में किसी भी लोकसभा क्षेत्र से अपना नामांकन कर सकता है। इसी प्रकार किसी राज्य में हो रहे विधानसभा चुनावों में एक प्रत्याशी के रूप में खड़े होने के लिए किसी भी व्यक्ति के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह जहां से चुनाव लड़ रहा है वहीं का मतदाता हो , वह पूरे प्रदेश में कहीं से भी चुनाव लड़ सकता है। सामान्यतया लोकसभा के लिए चुनाव लड़ने वाले नेता अपने लिए किसी एक संसदीय क्षेत्र को ही चुनकर रखते हैं कभी कभी एक से अधिक संसदीय क्षेत्र एक नेता के नाम हो जाते हैं । अभी तक अटलबिहारी वाजपेयी चार राज्यों (उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश और दिल्ली) से निर्वाचित होने वाले एकमात्र राजनेता हैं! 
– अटलबिहारी वाजपेयी एकमात्र ऐसे राजनेता हैं, जिन्होंने 6 पृथक निर्वाचन क्षेत्रों से जीत दर्ज की। वे 1957, 1967 में बलरामपुर से, 1971 में ग्वालियर से, 1977, 1980 में नई दिल्ली से, 1991 में विदिशा से, 1996 में गांधीनगर से और 1991, 1996 व 1998 में लखनऊ से जीते।  एक से अधिक स्थानों से चुनाव लड़ने को अटल जी की कमजोरी मानना गलती होगी। वास्तव में वह इस प्रकार के राजनेता रहे जो स्वयं भी कह दिया करते थे कि पूरा भारत वर्ष ही मेरे लिए अपना लोकसभा क्षेत्र है, मैं कहीं से भी चुनाव लड़ सकता हूं।
भारतवर्ष में चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए और अधिक से अधिक मतदान कराने के लिए विभिन्न मतदान स्थलों का चयन किया जाता है ,जिससे कि लोगों को अपना मतदान करने में किसी प्रकार की असुविधा का अनुभव ना हो । इसका लाभ भी हमें मिला है, परंतु इस सब के उपरांत भी एक मतदान केंद्र पर सबसे कम मतदान 3 है। ऐसा अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला जिले में हुआ था! 
जब 1952 में भारत में पहला लोकसभा चुनाव हुआ तो उस समय मतपत्र के प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अलग मतपेटी का प्रयोग किया गया। अलग-अलग रंग की मतपेटी, अलग-अलग पार्टी से संबंधित थी!  कहने का अभिप्राय है कि यदि आप कांग्रेस को वोट देना चाहते थे तो आप उसके नाम की रखी गई अलग मतपेटी में अपना मत डाल देते थे और यदि आप किसी अन्य पार्टी को अपना मत देना चाहते थे तो उससे संबंधित रंग वाली मतपेटी में अपना मत डाल देते थे।

भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी का जन्म 1980 में हुआ । 1984 के लोकसभा चुनावों में इस पार्टी ने अपने प्रत्याशी उतारे तो इसे केवल 2 सीटें ही प्राप्त हुई । भाजपा ने लोकसभा में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सबसे पहले 1998 में सीटें जीती थीं!
  भारत की लोकसभा में जनप्रतिनिधियों को भेजने के लिए देश के कुल 543 संसदीय क्षेत्रों का चयन किया गया है । यह चयन प्रक्रिया कहीं आबादी के दृष्टिकोण से रहती है तो कहीं क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से इसका सीमांकन होता है । देश के 5 संसदीय क्षेत्र ऐसे हैं जो क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से सबसे बड़े हैं—
* लद्दाख (जम्मू-कश्मीर) – 173266.37 वर्ग-किमी 
* बाड़मेर (राजस्थान) – 71601.24 वर्ग-किमी
* कच्छ (गुजरात) – 41644.55 वर्ग-किमी 
* अरुणाचल प्रदेश (पश्चिम) – 40572.29 वर्ग-किमी 
* अरुणाचल प्रदेश (पूर्व) – 39749.64 वर्ग-किमी इसी प्रकार  क्षेत्र के मुताबिक देश के 5 सबसे छोटे निर्वाचन क्षेत्र भी हैं । जिनका विवरण निम्न प्रकार है,—
* चांदनी चौक (दिल्ली) – 10.59 वर्ग-किमी 
* कोलकाता उत्तर पश्चिम – 13.23 वर्ग-किमी 
* मुंबई दक्षिण – 13.73 वर्ग-किमी 
* मुंबई दक्षिण मध्य – 18.31 वर्ग-किमी 
* दिल्ली सदर – 28.09 वर्ग-किमी
अब आते हैं भारत के राजनीतिक दलों की स्थिति पर। भारत के संसदीय लोकतंत्र में बहुदलीय व्यवस्था की गई है ।यहां पर कितने ही राजनीतिक दल हो सकते हैं। उनकी संख्या निश्चित नहीं है कि इतने से अधिक राजनीतिक दल देश मे नहीं हो सकते ।वर्तमान में 2200 से अधिक पंजीकृत राजनीतिक दल भारत में है।
* 53 क्षेत्रीय दल हैं। 
* 6 राष्ट्रीय दल हैं। 
* 2009 में 7 राष्ट्रीय दल, 34 क्षेत्रीय दल और अन्य 322 पंजीकृत दल चुनावी मैदान में थे। इनमें से 11 क्षेत्रीय दलों एवं 314 पंजीकृत दलों का तो खाता भी नहीं खुला।
हमारे देश के निर्वाचन क्षेत्रों के बारे में भी कुछ जानना आवश्यक होगा । निर्वाचन क्षेत्रों का क्षेत्रफल एक स्वतंत्र परिसीमन आयोग द्वारा निर्धारित किया जाता है। 
25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक हुए पहले आम चुनाव के बाद पहली बार 21 फरवरी 1952 को लोकसभा विधिवत् रूप से गठित की गई थी।  पहली लोकसभा का पहला सत्र 13 मई 1952 को प्रारंभ हुआ था।  13 मई 1952 से हम प्रत्येक वर्ष इस दिवस को संसदीय दिवस के रूप में मनाते हैं , क्योंकि स्वतंत्र भारत में पहली बार स्वतंत्र देश के स्वतंत्र मतदाताओं ने स्वतंत्र मतदान करके अपनी पहली लोकसभा का गठन इस दिन किया था ।
पहली लोकसभा, जिसका कार्यकाल 15 मई 1952 से 27 फरवरी 1957 तक था, उसके अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर थे। लोकसभा में 545 सदस्य होते हैं, जिनमें से 543 सदस्य सीधे राज्यों और संघीय राज्यों से चुनकर आते हैं। दो सदस्यों का चयन भारतीय राष्ट्रपति द्वारा आंग्ल भारतीय समुदाय से किया जाता है। 
एक वर्ष में लोकसभा के तीन सत्र बुलाए जाते हैं। पहला सत्र (बजट सत्र) फरवरी से मई तक, दूसरा सत्र (मॉनसून सत्र) जुलाई से अगस्त तक तथा तीसरा सत्र (शीतकालीन सत्र) नवंबर से दिसंबर तक। साधारणतया सदन में बैठक का पहला घंटा प्रश्नों और उत्तरों के लिए होता है, जिसे ‘प्रश्न काल’ कहा जाता है। 
लोकसभा टीवी, लोकसभा का अपना चैनल है, जिसका मुख्यालय संसद के प्रांगण में ही है।  इस चैनल के माध्यम से देश के लोग अपने सर्वोच्च पंचायतघर में हो रही कार्यवाही को सीधे देखने का लाभ उठाते हैं।
संसद का गठन लोकसभा , राज्यसभा और राष्ट्रपति से मिलकर होता है । लोकसभा निचला सदन है, जिससे निम्न सदन या लोअर हाउस भी कहा जाता है । जबकि राज्यसभा ऊपरी सदन है , जिसे उच्च सदन या अपर हाउस भी कहा जाता है ।लोकसभा और राज्यसभा में अंतर- 
* लोकसभा संसद का निचला सदन होता है, जबकि राज्यसभा ऊपरी सदन कहलाता है। लोकसभा में अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं, वहीं राज्यसभा में 250 सदस्यों की एक निश्चित संख्या होती है। 
* लोकसभा में कुछ सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामित किए जा सकते हैं। इसी प्रकार राज्यसभा की सदस्यता के लिए भी राष्ट्रपति द्वारा सदस्यों को नामित किया जा सकता है। इन सदस्यों का नामांकन कला, विज्ञान, साहित्य और खेल के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता पर निर्भर करता है।  लोकसभा सदस्य चुने जाने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 तथा राज्यसभा के लिए 30 वर्ष होनी चाहिए।
अब से पूर्व भारत की 16 लोकसभाओं का निर्वाचन हो चुका है। वर्तमान में हमारे देश की 16वीं लोकसभा चल रही है ।जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी रहे हैं , जबकि लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन रही हैं । अब 17वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम 23 मई को आने हैं। यह चुनाव अपने आप में ऐतिहासिक हो रहे हैं । देश की वर्तमान ज्वलंत समस्याओं के मद्देनजर देश के मतदाता क्या निर्णय लेते हैं ? – यह तो समय ही बताएगा , परंतु अभी तक के जो सर्वेक्षण एजेंसियों के निष्कर्ष सामने आ रहे हैं उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगता है फिर से एक बार भाजपा सरकार बनने जा रही है।

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