शिवराज के संकट स्थिति में सफलता के सौ दिन

शिवराज सिंह चौहान ने अपने चौथे कार्यकाल के पहले सौ दिनों में  कोरोना संकट से किस तरह डटकर सामना किया है इस बात की प्रमाण इस परिणाम से हो जाता है कि आज मध्यप्रदेश में कोरोना की ग्रोथ रेट सबसे कम है, वहीं रिकवरी रेट के मामले में मध्यप्रदेश राजस्थान के बाद दूसरे नंबर पर  है।

शिवराज का  सफल सूत्र IITT

कोरोना लड़ाई में मध्यप्रदेश रिकवरी रेट में देश में दूसरे स्थान पर है तो इसका सबसे बड़ा कारण प्रदेश में कोरोना मरीजों की सहीं समय पर पहचान होकर उनका इलाज होना है। प्रदेश में कोरोना मरीजों के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर आई.आई.टी.टी. (आईडेंटिफाई, आइसोलेट, टैस्ट एण्ड ट्रीट) रणनीति पर काम किया गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चौथे कार्यकाल के पहले सौ दिन मंगलवार को पूरे होने जा रहे है। शिवराज ने ऐसे समय में सत्ता संभाली थी जब तक कोरोना प्रदेश में पैर पसार चुका था और आज किसी को भी ये कहने में गिलानी  नहीं  हो रही है कि शिवराज की दूरदृष्टि , सोच सूझबूझ ,प्रशासनिक कौशल और बेहतर अनुभव से  पहले 100 दिन में कोरोना को कंट्रोल करने में एक हद तक सफल हुए है।

कोरोना पर हावी शिवराज 

शपथ लेते ही शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना पर तेजी से एक्शन लिया । 23मार्च रात्रि से सत्ता  की बागडोर संभालने वाले  चौहान अपने अनुभवों के आधार पर  कोरोना संक्रमण की भयावहता का अनुमान लगा चुके थे, राजभवन से सीधे शासन पर शिंकजा कसा, आधी आधी रात तक मंत्रालय में अफसरों के साथ   संक्रमण स्थिति और समस्याओं  की समीक्षा की।
  अपने अनुभव से पहली बैठक में ही सीएम  चौहान ने इस बात का अंदाजा  लगा लिया था कि  लड़ाई लंबी है ।
चुनौतियों से घिरे चौहान ने   अपनी जनता को भरोसा दिलाया कि वो कोरोना संकट से प्रदेश को बचा लेंगे।
लॉकडाउन का कड़ा पालन और लोगों का उत्साहवर्धन – 
24 घण्टे हुए शिवराज के सामने  24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा
किये गए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा और उसका पालन करना संकटों से भरी संघर्षपूर्ण स्थिति थी। ऐसी परिस्थिति में  उन्होंने इस पर सफलता की सीढ़ी चढ़ी। जनता के हौसले और हुनर से तालाबंदी का शिवराज व जनता ने सख्ती से पालन किया।
जरूरतमंद जनता के बीच सरकार ने जरूरी सामग्री पहुँचवाई। लेटलतीफी करने वाले और लॉक डाउन का सही से पालन कराने में असमर्थ  अफसरों पर सरकार ने कतई कोतिहाई  नहीं बरती। जनता को सर्वोपरि मानकर चलने वाले मामा ने अधिकारियों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की।कोरोना को परास्त करने और लोगों की मदद ,व आर्थिक सहयोग के लिए खुद सीएम चैहान  ने आगे आते हुए एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा के साथ ही एक साल तक मुख्यमंत्री के तौर पर मिलने वाला वेतन 30 परसेंट कम लेने का एलान किया। इसके साथ उन्होंने फैसला किया कि कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाव के लिए विधायक अपनी विधायक निधि का उपयोग अपने क्षेत्र में कर सकेंगे।

कोरोना से लड़ाई में फ्रंट लाइन पर तैनात सरकारी कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों का हौंसला बढ़ाने और जीत की उम्मीद कायम  रखने के लिए सीएम खुद उनके बीच पहुंचे। राज्य के कई इलाकों का दौरा  कर सफाई व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाला वालों का धन्यवाद भी दिया, इसके साथ ही  मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों,
स्वयं सेवी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। हौंसला बढ़ाने के लिए कई अधिकारियों से डायरेक्ट  फोन पर बातचीत की। इसके साथ कोविड-19 में लगे सरकारी, प्राइवेट डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों के 50 लाख का बीमा करने का फैसला भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोरोना के भय को मन से निकाल कर सही समय पर संक्रमण को पहचान लिया जाए तो यह साधारण सर्दी,जुकाम से ज्यादा कुछ भी नहीं है।लोगों में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जीवन अमृत योजना के तहत एक करोड़ से अधिक लोगों को आयुर्वेदिक काढ़ा बांटा जा रहा है।

21 अप्रैल को शिवराज ने अपनी मिनी कैबिनेट बनाई।जिसमें मुख्य विभाग अपने भरोसेमंद नेता नरोत्तम मिश्रा को ग्रह और स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया ।जिन्होंने जिम्मेदारी को जनता के मुताबिक निभाया।

बेघर मजदूरों की मदद

लॉकडाउन के दौरान अन्य राज्यों में फंसे मध्यप्रदेश के  मजूदरों को अपने घर वापस लाने और उनकी मदद करने के लिए मुख्यमंत्री  चौहान ने कई बड़े निर्णय लिए। बात चाहे राज्य के बाहर फंसे मजदूरों को आर्थिक मदद के लिए उनके खाते में रूपए डालने की हो या प्रदेश लौटे  मजदूरों को संबल योजना के दायरे में लाकर उनकी हर मदद करने की शिवराज ने संकट काल में तेजी से फैसले लिए।

प्रदेश लौटे  बेरोजगार मजदूरों को मनरेगा में रोजगार देने के लिए श्रम सिद्धी अभियान शुरू किया गया, अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे मजदूर जिनके जॉब कार्ड नहीं है उनके जॉब कार्ड बनाकर उनको काम दिलाया जा रहा है। कोरोना काल में प्रदेश लौटे प्रवासी मजदूरों का सर्वे कर मध्यप्रदेश देश के उन पहले राज्यों में शामिल हो गया जो अब मजदूरों की स्किल की पहचान कर उसके मुताबिक रोजगार देने की व्यवस्था कर रहा है, इसके लिए प्रदेश में रोजगार सेतु पोर्टल लॉन्च हो चुका है और अब तक बड़ी संख्या में रोजगार भी मिल चुका है।   

संवाद और भरोसा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया के माध्यम से  जनता से संवाद कर लोगों को भरोसा दिलाया कि संकट में सरकार पूरी तरह उनके साथ है। मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन के दौरन सभी गरीबों को पांच महीने का राशन मुफ्त देने का भी  एलान किया। मध्यप्रदेश देश के उन पहले राज्यों में शामिल हो गया है जिसने वन नेशन, वन राशन कार्ड की योजना शुरु कर दी है।

जब देश के कई राज्य  मजदूरों के पलायन की समस्या जूझ रहे थे तब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मजदूरों की मदद के लिए आगे आये। उन्होंने प्रदेश के मजदूरों को उनके घर तक बसों और ट्रेनों के जरिए पहुंचाया ।वहीं प्रदेश से गुजरने वाले अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूरों के खाने पीने का इंतजाम करने के साथ ही उनके गृहराज्य की सीमा तक बसों के जरिए पहुंचाने के निर्देश दिए।

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