लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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प्रेम के इक गीत पर मैं

आज तेरा नाम लिख लूँ

 

पंछियों की चहक मीठी

शहद जैसे मन में घोले

कोकिला की मृदु कुहुक पर

आज तेरा नाम लिख लूँ

 

रंग हर ऋतु का अलग है

ढंग भी उसका नया है

धूप के हर क़तरे पर मैं

आज तेरा नाम लिख लूं

 

फूल बागों में खिले हैं

जैसे मधुऋतु आ गयी है

मैं गुलाबों पर सुनहरा

आज तेरा नाम लिख लूँ

 

जगमगाता चाँद पूरा

व्योम का सिंगार हो ज्यों

छिटकी – छिटकी चाँदनी पर

आज तेरा नाम लिख लूँ

 

श्वेत चंपा औ चमेली

हैं धवल मनमोहनी सी

इनकी भीनी खुशबुओं पर

आज तेरा नाम लिख लूँ

 

पेड़ कितने ही यहाँ पर

नाम जिनके हैं अजाने

उनके पत्ते – पत्ते पर मैं

आज तेरा नाम लिख लूँ

 

ज़िन्दगी की ताल मीठी

और उसका सुर निराला

जी में आता है कि उस पर

मै आज तेरा नाम लिख लूँ।

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