72 साल के ‘लालू प्रसाद’ : क्या यह शख़्स आज भी प्रासंगिक है ?

■ डॉ. सदानंद पॉल

श्री लालू प्रसाद एक व्यक्ति है या एक संस्था है या एक सज़ायाफ्ता अपराधी है या साजिश के शिकार हैं या संसद/विधानमंडल के सभी सदनों के सदस्य रहे हैं या केंद्रीय मंत्री रहे हैं या मुख्यमंत्री रहे हैं या बैकवर्ड लोगों के मुख की बोली है…. क्या है लालू प्रसाद ? विकिपीडिया के अनुसार, राँची जेल में सजा भुगत रहे लालू प्रसाद की लोक सभा की सदस्यता समाप्त कर दी गयी। चुनाव के नये नियमों के अनुसार लालू प्रसाद अब 11 साल तक लोक सभा चुनाव नहीं लड़ पायेंगे। लोक सभा के महासचिव ने प्रसाद को सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने की अधिसूचना जारी कर दी। इस अधिसूचना के बाद संसद की सदस्यता गँवाने वाले लालू प्रसाद भारतीय इतिहास में लोक सभा के पहले सांसद हो गये हैं।

ध्यातव्य है, 11 जून 1948 को जन्मे लालू प्रसाद ‘बिहार’ के राजनेता व राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वे 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। बाद में वे 2004 से 2009 तक केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार में रेल मंत्री बने, जबकि वे 15वीं लोकसभा में सारण (छपरा) से सांसद थे, उन्हें चारा घोटाला मामले में रांची स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अदालत ने 5 साल कारावास की सजा सुनाई थी। विदित हो, 1997 में जब केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उनके खिलाफ चारा घोटाला मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया, तो प्रसाद को मुख्यमन्त्री पद से हटना पड़ा, फिर पत्नी राबड़ी देवी को सत्ता सौंपकर वे राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष बन गये और अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता की कमान अपने हाथ में रखी। 

बिहार के गोपालगंज जिले में एक यादव परिवार में जन्मे लालू प्रसाद ने राजनीति की शुरूआत जयप्रकाश नारायण (JP) के आन्दोलन से की, तब वे एक छात्र नेता थे और उस समय के राजनेता सत्येंद्र नारायण सिन्हा के काफी करीबी रहे थे। वर्ष 1977 में आपातकाल के बाद हुए लोक सभा चुनाव में लालू प्रसाद जीते और पहली बार 29 साल की उम्र में लोकसभा पहुँचे। 1980 से 1989 तक वे दो बार विधानसभा के सदस्य रहे और विपक्ष के नेता पद पर भी रहे। चूँकि 1985 में वह बिहार विधानसभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए थे। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की मृत्यु के बाद लालू प्रसाद 1989 में बिहार विधानसभा के विपक्ष के नेता बन गए। उसी वर्ष वह लोक सभा के लिए भी चुने गए थे। वर्ष 1990 में वे बिहार के मुख्यमंत्री बने एवं 1995 में भी भारी बहुमत से विजयी रहे। 23 सितंबर 1990 को प्रसाद ने राम रथयात्रा के दौरान समस्तीपुर में श्री लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार किया और खुद को एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में प्रस्तुत किया।

लालू प्रसाद ने 1970 में पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (PUSU) के महासचिव के रूप में छात्र राजनीति में प्रवेश किया और 1973 में PUSU के अध्यक्ष बने। सन 1974 में उन्होंने जयप्रकाश नारायण की अगुवाई वाली छात्र आंदोलन में शुल्क बढ़ोतरी, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ शामिल हो गए थे।

लालू प्रसाद की राजनीति को हमेशा से जातिवादी और भेदभावपूर्ण बताकर बदनाम करने की कोशिश की जाती रही है, लेकिन वंचितों के राजनीति के नज़रिए से देखने पर हम लालूजी को ‘भारत का नेल्सन मंडेला’ कह सकते हैं ! लालू प्रसाद एक हास्य नेता है  इनकी लोकप्रियता इनकी भाषणों को लेकर भी है। लालू प्रसाद का भाषण देने का अंदाज कुछ अलग ही है।

सनद रहे, विधि स्नातक रहे ‘लालू प्रसाद’ का विद्यालयीय व प्रमाणपत्र के अनुसार नाम ‘लालू प्रसाद’ है, न कि लालू यादव या लालू प्रसाद यादव ! उनके पिताजी स्व. कुंदन राय थे, जिनके उपनाम ‘राय’ है, ‘यादव’ नहीं!

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