लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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मृत्युंजय दीक्षित
जब से कैराना से भाजपा संासद हुकुम सिंह ने कैराना में पलायन की पीड़ा को उजागर किया है और मीडिया में व्यापक पैमाने पर इस पर चर्चा प्रारम्भ हो गयी है तब से पता नहीं बिसाहड़ा कांड को लेकर सहिष्णुता बनाम असहिष्णुता पर बहस करने वाले ओैर पुरस्कार वापसी का नाटक करने वाले लोग कहां गायब हो गये हैं ? अब इस विषय पर जानी मानी फिल्मी हस्तियां और साहित्यकार आदि मौन हो गये हैं ?
कैराना पलायन प्रकरण शायद इस प्रकार से जनता व देश के सामने न आता यदि पश्चिमी उप्र का स्थानीय मीडिया और सांसद हुकुम सिंह इस प्रकार से सक्रिय न होते। यह अलग बात है कि कैराना और कांधला से हिंदू परिवारों के पलायन के कारणों की गहराई से जांच होगी तब सच्चाई सामने आ जायेगी। लेकिन आज प्रदेश में जिस प्रकार की असहिष्णुता की राजनीति खेली जा रही है और अपने – अपने वोटबैंक को सुरक्षित रखने के लिए भाजपा विरोधी दलों ने जिस प्रकार की भाषाशैली का प्रयोग किया है वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, आपत्तिजनक व निंदनीय है। जिसमें सबसे आपत्तिजनक भाषाशैली पश्चिमी उप्र की राजनीति में वापसी का मार्ग खोज रहे रालोद नेता अजित सिंह की रही हैं जिनको कहीं पर अपनाठौर नहीं दिखलायी पड़ रहा है। यह वहीं अजित सिंह है जो अपना राजनैतिक भविष्य सुधारने के लिए भाजपा के साथ आने के लिए उतावले हुए जा रहे थे। बसपा नेत्री मायावती व समाजवादियों ने भी कभी दिल से यह नहीं कहाकि वहां पलायन हुआ है अपितु यह सभी दल भाजपा पर ही आरोप लगाते रहे। कैराना व कांधला प्रकरण पर समाजवादी सरकार ने जिस प्रकार से रवैया अपना लिया है उसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में अवश्य दिखलायी पड़ेगा। जब आईबी की टीम के कैराना पहुंचनें की खबर आई और राष्ट्रीय मानवाधिकर आयोग ने सरकार से जवाब तलब कर लिया ,तब प्रदेश सरकार हरकत में आयी। कैराना व कांधला की पलायन की घटना को अब भाजपा व सभी हिंदू संगठनों ने हाथों हाथ ले लिया है। यही कारण है कि भाजपा विरोधी सभी दल एक सोची समझी साजिश के तहत विधानसभ चुनावांे के पहले प्रदेश में दंगे कराने की साजिश रच रही है। वहीं प्रदेश सरकार के मंत्रीगण तो अभी से कहने लग गये है कि भाजपा ने 2014 क लोकसभा चुनावों में जो वायदे किये थे वह पुरे करने में नाकाम रही है इसलिए मतों का धु्रवीकरण कराकर तथा जनता का ध्यान बंटाकर वह फिर से सत्ता में आने सपना देख रही है। भाजपा विरोधियों का मत है कि लोकसभा चुनावों के पहले मुजफ्फरनगर दंगो का पूरा लाभ भाजपा ने उठाया अब वहीं विधानसभा चुनावों के पहले कैराना के बहाने करना चाह रही है।
बसपा नेत्री मायावती यह तो मान रही हैं कि कैराना में पलायन हुआ है लेकिन वह अपराधी तत्वों की गुंडागर्दी के कारण हुआ है बाकी सब भाजपा अफवाह फैला रही है दंगों की साजिश रच रही है। एक प्रकार से इस मामले में भाजपा व हिंदू संगइनों को छोड़कर सभी दल पूरी ताकत के साथ सत्य को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं और मुस्लिम तुष्टीकरण पूरी बेशर्मी के साथ कर रहे हैं। सपा सरकार को अब किसी भी मामले की जांच में सीबीआई पर भरोसा नहीं रह गया है। साफ है कि चोर की दाड़ी में तिनका जरूर है। ज्ञातव्य है कि प्रदेश के भाजपा सांसदों व नेताओं ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग प्रारम्भ कर दी है। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक से रिपोर्ट मांगी गयी है। बसपानेत्री मायावती तो हरक्षण राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर रही है. लेकिन उत्तराखंड में मात खा चुकी भाजपा फिलहाल ऐसी कोई हरकत नहीं करने जा रही है। अभी वह और इंतजार करेगी।
फिलहाल आजकल मीडिया जगत में कैराना व कांधला छा गया है। पश्चिमी उप्र का कैराना का ऐतिहासिक महत्व है। कैराना की धरती को माना जाता है कि महाभारत काल के दानवीर कर्ण की जन्मभूमि माना गया है। किसी जमाने में पश्चिमी उप्र में कैराना कैराना भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए जाना जाता था जिसकी स्थापना महान गायक अब्दुल करीम खां नेकी थी। माना जाता है कि एक बार महान संगीतकार मन्ना डे जब किसी काम से कैराना गये थे तब इसी कैराना की धरती पर उतरने पर सम्मान करने के लिये अपने जूते उतारकर हाथ में ले लिये थे और कहा था कि कैराना की धरती महान संगीतज्ञांे की धरती है, हम उसका सम्मान करते हैं। भारतरत्न से सम्मानित भीमसेन जोशी का संबंध भी कैराना की धरती से रहा है।
लेकिन आज यही कैराना विरान सा हो गया है। कहा जा रहा है कि 1990 में यहां पर हिंदुओं की आबादी 30 प्रतिशत थी जो अब घटकर मात्र 8 प्रतिशत रह गयी है। आखिर यह सब कैसे सम्भव हुआ ? वहां से जो खबरें छनकर सामने आ रही है कि उससे संकेत मिल रहे हैं कि कश्मीर घाटी में 1990 में जो कुछ हिंदुओे के साथ हुआ वहीं अब 2016 में कैराना व आसपास के इलाकों में हो रहा है। यही कारण है कि समस्त हिंदूवादी संगठन और भाजपा तेजी से सक्रिय हो गये हैं। स्थानीय मीडिया व समाचारपत्रो में कैराना की घटनाएं व्यापक पैमाने पर छप रही हैं। लेकिन प्रशासन मौन है। स्थानीय नागरिकांे का कहना है कि यहं पर धर्मविशेष से जुड़ें बड़े अपराधियों व गुंडों आदि का जबर्दस्त आतंक है। यह गुंडे आये दिन स्कूल जाती हुयी बच्च्यिों को छेड़ते हंै तथा उनके साथ अश्लील हरकतें आदि करते हैं। जिसके कारण इन बच्चियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया है। यदि जाती भी हैं तो उनके साथ कोई न कोई उनको छोडने ओर लेने के लिए जाता है। एक प्रकार से महिलायें डरी सहमी हैें। दुराचार की कई घटनाएं घट चुकी हैंै । लेकिन समाजवादी प्रशासन पूरी तरह से नकारा है। वह किसी भी मामले की रिपोर्ट तक नहीें लिखता है। महापंचायत आदि से भी कोई परिणाम नहीे निकला। वहीं दूसरी ओर व्यापारियों से रंगदारी मांगी जा रही है। कहा जा रहा है कि अब तक चार हिंदू व्यापारियों की रंगदारी के चलते हत्या हो चुकी है। चर्चा है कि एक कुख्यात अपराधी मुकीम काला जो कि विभिन्न अपराधों के चलते जेल में बंद है के गुर्गांे का आतंक व्याप्त है। इसके गैंग में दोनो ही धर्मो के बेरोजगार युवा शामिल हैं। इन गुंडो का पुलिस प्रशासन में बड़ा हस्तक्षेप है। भाजपा के फायर ब्रंाड नेता योगी आदित्यनाथ व साक्षी महाराज आदि सभी लोग पूरे प्रकरण को पूरे जोर शोर से उठा रहे हैं। भाजपा की नौ सदस्यीय टीम कैराना प्रकरण की जांच करने गयी।
राजनैतिक दबाव में समाजवादी सरकार जांच तो रका रही है लेकिन वह कैसी जंाच होगी सब जानते हैं। वहीं सपा को कंेद्रीय जांच पर भरोसा नहीं रहा है। फिर मामले का पटाक्षेप कैसे होगा। लोकतंत्र में जना के समक्ष सच कैसे सामने आयेगा। आज किसी समय महान हस्तियों की भूमि रहा कैराना पूरी तरह से बेरोजगारी से त्रस्त है। विकास का घोर अभाव है। नशे व हथियारों की तस्करी आदि का गढ़ बनता जा रहा है।
मुजफ्फरनगर के पूर्व जिलाधिकारी रहे पूर्व आइएएस सूर्य प्रताप सिंह का दावा है कि,” हालात तो इतने खराब हैं कि कैराना के कुछ मुहल्लो में दिन में भी पुलिस नहीं घुस सकती। उन्होनें अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि कैराना को संभालो कहीं देर न हो जाये। स्थिति कभी भी विस्फोटक हो सकती है।” वहीं विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि कैराना की घटना जिहादियों के षड़यंत्र का नतीजा है। विहिप का कहना है कि 40 वर्ष पहले जो कैराना हिंदू बहुल था वहां केवल 8 प्रतिशत हिंदू रह गये हैं। उप्र में कैराना के अलावा कई शहर व कस्बे ऐसे हैं जहां से हिंदुआंे का पलायन काफी तेजी से हो रहा है। कैराना, कांधला व गंगोह के अलावा पश्चिमी उप्र के कई हिस्सों का बुरा हाल हो रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए पूर्व राज्यपाल महामहिम राजेश्वर राव ने चेतावनी दी थी कि प्रदेश में कई पाकिस्तान पनपते हुए दिखलायी पड़ रहे हैं। आज यह दुर्भग्यपूर्ण हालात निश्चय ही मुस्लिम तुष्टीकरण और विकृत मानसिकता की राजनीति का ही परिणाम है। अगर अभी पूरी निष्पक्षता के साथ इस प्रकरण का समाधान नहीं कियागया तो आगे आने वाला चुनाव समाजवादियो और बसपाईयों के लिए वाटरलू साबित हो सकता है। इस प्रकार की सभी समस्याओं का अंत तभी हो सकता है जब प्रशासन पूरी तरह से निष्पक्षता ओैर ईमानदारी के साथ अपना काम करे तथा विकास की गंगा बहे। जनता को उचित न्याय मिले।

One Response to “कैराना से कांधला तक विकृत राजनीति की खुलती पोल”

  1. mahendra gupta

    बहुत ही सही विश्लेषण किया है आपने , अब न तो वे सहिष्णुवादी बोल रहे हैं न उनके आका राजनेता , दादरी में भग कर जाने वाले राहुल। केजरी, और अन्य अब कहाँ जा कर छिप गए अब उनकी फूटी जुबां कहाँ चली गयी , इन सब नेताओं व दलों को जनता द्वारा सबक सिखाया जाना चाहिए

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