भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के नये संदर्भ

लगभग सभी गैर कानूनी कार्यों में पैसों का लेनदेन बि‍ना कि‍सी तृतीय पक्ष (बैंक आदि‍ सरकारी यंत्रणा) के होता है, इससे गैर कानूनी धंदों में दि‍न दूगनी और रात चौगुणी प्रगती होती हैं। इन सभी गोरखधंदों को बंद करने का यह रामबाण उपाय हैं। इसमें भारतीय रि‍ज़र्व बैंक के अर्थशास्‍त्री और वि‍शेषज्ञों का योगदान है। नये नोटों को सैटेलाइट द्वारा ट्रैक करने की सुवि‍धा के कारण आगे आने वाले नोटों की ट्रैकिंग से नोटों का प्रयोग हो रहे स्‍थानों का पता लगाया जा सकेगा इससे भवि‍ष्‍य में नकली नोटों को बनाने में के खतरे को भी टाला जा सकेगा।

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रात 8 बजे प्रधानमंत्री महोदय ने कैबीनेट की वि‍शेष बैंठक में सार्वजनि‍क रूप से जब `500 और `1000 के नोट चलनबाह्य होने की घोषणा की तब सबके कान खड़े हो गए। हालाकि‍ कुछ लोगों में इससे अपने पैसों के बेकार होने का भय और चिंता सताने लगी कि‍ अब उनके पास रखें हुए नोटों का क्‍या होगा, यह यक्षप्रश्‍न उपस्‍थि‍त हुआ।

यह कदम भ्रष्‍टाचार और आंतकवाद को बढाने वाले `500 और `1000 के नोटों के अंतरण में होने वाली सुवि‍धा को देखते हुए कि‍या गया। पाकि‍स्‍थान से नकली नोटों को बनाकर भारत में भेजने का सि‍लसि‍ला पि‍छले कई दशकों से चल रहा था। सरकार को इसकी खबर थी, लेकि‍न कड़े कदम उठाने में सरकार की दृढ इच्‍छा शक्‍ति‍ का अभाव दि‍खाई दे रहा था। प्रधानमंत्री मोदी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार और भारतीय रि‍ज़र्व बैंक के द्वारा सुझाए प्रस्‍तावों को ध्‍यान में रखकर चलन में जारी `500 और `1000 के सभी प्रकार के नोटों को बाजार से चलनबाह्य करने का फैसला लि‍या गया। इससे एक फायदा यह होगा कि‍ जि‍स कि‍सी के पास असली और नकली नोट हैं, उन्‍हें बैंक में जमा करना होगा। जो पैसा सरकार की ति‍जोरी के रि‍कॉर्ड में दर्ज होगा। व्‍यवहार में लाए जाने वाले 50 से 60 प्रति‍शत नोटो में अधि‍कतर पैसा अवैध तरि‍कों से कमाया होने की संभावना होगी, टैक्‍स देने के डर से लोगों ने यह पैसा सरकार और आयकर वि‍भाग से छुकापर रखा था। बैंक में 30 दि‍संबर तक जो पैसा जमा कि‍या जाएगा। उसके लि‍ए आपको अपना पहचान पत्र (पहचान क्रमांक के साथ) दि‍खाना होगा। इससे यदि‍ जि‍स कि‍सी के पास अपने व्‍यवसाय से प्राप्‍त होने वाली आय से अधि‍क पैसा हैं तो उसकी तुरंत पहचान हो जाएगी।

भारत सरकार के भारतीय रि‍ज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर कि‍ए गए नोटों के स्‍वरूप में परि‍वर्तन के बावजुद जाली नोटों का कारोबार बड़ी मात्रा में फैल रहा था। पि‍छले कुछ दशको में नकली नोटों के नि‍र्माण में लगे पाकि‍स्‍थान जैसे आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों ने नकली नोटों को बनाने के कारखाने अपने देश में बनाकर रखें हैं। पाकि‍स्‍थान की सेना और सरकार का भी इन्‍हें अप्रत्‍यक्ष सपोर्ट रहा हैं। नकली नोटों के व्‍यापार के जरि‍ए पाकि‍स्‍थान अपने देश में आतंकवादी गति‍वि‍धि‍यों के शि‍बीर चलाता है। इन शि‍बीरों द्वारा भारत वि‍रोधी सोच को वि‍कसि‍त करना और आत्‍मवि‍घातक आतंकवादि‍यों की फौज तैयार कर उसें संसद पर हमलों में, ताजमहल होटल पर आतंकी हमलें और वि‍मान अपहरणों जैसी आतंकी गति‍वि‍धि‍यों को जन्‍म देने की गति‍वि‍धि‍यों में इस नकली मुद्रा का यह कार्य पाकि‍स्‍थान के द्वारा खुलेआम हो रहा था। इन सभी गति‍वि‍धि‍यों को वि‍त्तीय पोषण करने वाली संस्‍थाओं और यंत्रणा को घ्‍वस्त करने के लि‍ए यह कदम आवश्‍यक था। `500 और `1000 के नोटों को आसानी से कभी लेकर जाने के कारण इन पैसों की तस्‍करी में समाजवि‍घातक तत्‍वों को सुलभता हो रही थी। स्‍मगलिंग में इससे बढौत्‍तरी हो रही थी। `500 और `1000 के नोटों की कम संख्‍या में अधि‍क राशि‍ समावि‍ष्‍ठ होने कारण रि‍श्‍वत, भ्रष्‍टाचार, अमली पदार्थों की खरीद-फरोख्‍त, अपहरण आदि‍ क्रि‍याओं में भी इसका भारी मात्रा में प्रयोग होता था। नकली नोटों के नि‍र्माण से भारत की आंतरि‍क अर्थव्यवस्‍था के साथ-साथ सीमा पर आतंकवादी गति‍वि‍धि‍यों में भारी मात्रा में बढौत्तरी हुई। जमीन, फ्ल्‍ैाट और स्थायी संपत्ति‍यों की खरीद फरोख्‍त में होने वाले नकली नोटों की बैंक आदि‍ सरकारी यंत्रणा में कही भी ऐन्‍ट्री न होने के कारण समाज के कुछ वि‍शेष वर्ग के पास ऐसे गैर कानूनी नोटों के संचय के कारण गरीब और समाज आर्थि‍क रूप से कमजोर वर्ग को इन पैसा का लाभ भी नहीं मि‍ल पाता है। सरकार के पास दर्ज पैसा ही देश की वास्‍तवि‍क संपत्ती हो सकती है। समाज के पास गैर-कानूनी ढंग से संचि‍त धन ”काले धन” में ही गि‍ना जाऐगा। आयकर के डर से सरकार से छुपाए गए धन का दूरूपयोग करने से इसका फायदा समाज की वि‍कृत प्रवृत्ति‍यों को होने से देश आंतरि‍क और बाहरी सुरक्षा खतरे में आती है। देश में जाति‍वाद, धर्मवाद के जहर घोल कर वातारण को अस्‍थि‍र बनाना और बाहरी आतंकी हमलों द्वारा देश की जनता को भय के साए में जीने के लि‍ए मजबूर करने के लि‍ए दुश्‍मन देश सदैव तैयार रहता है। इसमें नकली नोट और गैरकानूनी आय सहायक सिद्ध होते हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्‍था को मज़बूत करने वाली योजना जैसे जन-धन योजना, स्‍वर्ण मुद्रीकरण योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, डीबीटी और अन्‍य योजनाओं के द्वारा देश के सभी तबकों को बैंकिंग वि‍त्तीय सुवि‍धा उपलब्‍ध कराने वाली योजना से देशवासि‍यों में सरकार के प्रति‍ सकारात्‍मक सोच वि‍कसि‍त हो रही थी। इस सकारात्मक और खुशहाली के माहौल में उड़ी जैसी आतंकी हमलों के जरि‍ए देश के वातावरण को कलुषि‍त करने के कार्य पि‍छले दि‍नों से सरेआम हो रहे थे।

सभी प्रकार के आंतकी शि‍बीरों को पाकि‍स्‍थानी सेना और वि‍त्तीय सहायता से अंजाम दि‍या जा रहा था, ऐसी स्थि‍ति‍ में आंतक को पोषण करने वाले नकली नोटों के कारोबार को रातोरात बंद करने के लि‍ए सरकार ने जो कदम उठाया वह प्रशंसनीय हैं।

आज-कल नोटों और सि‍क्‍कों के पर्यायी साधन उपलब्‍ध हैं, जैसे डेबि‍ट कार्ड, क्रेडि‍ट कार्ड, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग इत्‍यादि‍। इन साधनों में सबसे बड़ी सुवि‍धा यह होती हैं कि‍ आपको नकद पैसों को साथ में रखने की आवश्‍यकता नहीं है। पुराने `500 और `1000 के सभी प्रकार के नोटों के स्‍थान पर वैकल्‍पि‍क वि‍तरण चैनल का प्रयोग बढेगा, जि‍सका फायदा ग्राहकों को होगा। गैर कानूनी ढंग से कमाये गए पैसों का हि‍साब देने के कारण वह पैसा अब या तो दानधर्म में खर्च करना होगा या फि‍र उसे मंदि‍रों और अन्‍य धार्मि‍क स्‍थानों को दान देने का प्रचलन बढेगा। दान मेंदी गई राशि‍ का धार्मि‍क संस्थान धर्मदाय कार्यों में खर्च कर सकती है। अनाथालय और वृद्धाश्रमों में दि‍ए जाने वाले दान रूपी पैसों का उचि‍त कार्यों में प्रयोग होने से अर्थशास्‍त्र का धर्मशास्‍त्र भी सुधरेगा। मुद्रा के रूप समय-समय पर बदले रहे हैं, कि‍सी समय दूर्लभ पत्‍थर, धातु, शंख, कवडियॉं आदि‍ का मुद्रा के रूप में प्रयोग होता था। रूपया शब्‍द प्राकृत के ”रूपं” से बना है, जि‍सका अर्थ मराठी में चांदी है क्‍योकि‍ प्राचीन काल में सोना और चांदी का उपयोग वि‍नि‍मय की मुद्रा के रूप में होता था। आज मि‍श्रि‍त धातु के सिक्के, नोट आदि‍ ने इनकी जगह ले ली है। समय के साथ गाय, घोड़े आदि‍ पशु को मुद्रा के रूप में प्रयोग में लाया जाता था। समय के साथ ”प्‍लास्‍टि‍क मनी” अर्थात डेबि‍ट कार्ड और क्रेडि‍ट कार्ड आदि‍ ने मुद्रा का रूप ले लि‍या है। हमें समय के साथ चलते हुए इनका प्रयोग करना चाहि‍ए जि‍समें नोटों के खो जाने, फटने, चोरी होने और गि‍रने की समस्‍या से मुक्‍ति‍ मि‍ल सकती है। आज-कल अधि‍कतर सुवि‍धाओं का भुगतान ऑनलाईन हो चुका है। इससे समय और मेहनत में भी कमी आई है, इसका लाभ अवश्‍य उठाया जाना चाहि‍ए।

इस वि‍षय का दूसरा पहलू यह हैं कि‍ सभी `500 और `1000 के पुराने नोट जब बैंकों में जमा कि‍ए जाऐंगे तब वह बैंक के रि‍कॉर्ड में आऐंगे। इससे पहले जि‍स व्‍यक्‍ति‍ का खाता बैंक में नहीं खुला हैं, ऐसे व्‍यक्‍ति‍ के पास संचि‍त पैसों का कोई रेकॉर्ड सरकार के पास नहीं होता था। जि‍ससे गैर कानूनी और आय से अधि‍क कमाये गए धन पर लगने वाले टैक्‍स से भी लोग बच जाते। पुराने नोटों को चलन बाह्य करने से ऐसे नोंटों को घर में रखने के बजाए अपने खातों में जमा करने की कोशि‍श करेगा। आयकर वि‍भाग के नि‍यमानुसार यदि‍ आपकी आय 2 लाख 50 हजार से अधि‍क हैं, तो आपको 30प्रति‍शत और अघोषि‍त आय पर 200 प्रति‍शत का जुर्माना भरना पड़ेगा। इससे गैर कानूनी और अघोषि‍त आय अपने आप ही सरकार के सामने आ जाएगी। अघोषि‍त आय एक प्रकार का अपराध है। प्रति‍वर्ष आयकर वि‍भाग द्वारा अपने आय की घोषणा करने की कवायद चलती थी, लेकि‍न इसमें लोगों की नि‍ष्‍क्रि‍यता दि‍खाई देती थी। सरकार पास आपके आय का वि‍वरण होने से सरकार को देश की वास्‍तवि‍क संपत्ती की पहचान करने में सुवि‍धा होती है। वर्तमान में यह स्‍थि‍ति‍ नहीं थी, कि‍सके पास कि‍तना धन हैं, इसकी घोषणा करने की आवश्‍यकता महसूस करने वाले व्‍यक्‍ति‍ को भी अपनी आय घोषि‍त करनी ही होगी साथ ही उस आय का स्रोत भी बताना होगा। इससे गैर-कानूनी स्रोतों का और संचि‍त संपत्ति‍ का अपने आप ही उजागर होगी। पैनल्टी के रूप में लगने वाले टैक्‍स से सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्‍व की प्राप्‍ति‍ होगी।

इस निर्णय से घरों और जमीन की कि‍मतों में भारी गि‍रावट की संभावना बताई जा रही है। क्‍योकि‍ जमीन जायदाद की खरीद में बेनामी संपत्ती का नकद प्रयोग कि‍या जाता है। जि‍ससे इस मुद्रा का सर्कुलेशन समाज में गैर कानूनी ढंग से होता रहता है। आय से अधि‍क संपत्ती के संदेहास्‍पद स्रोतो के उजागर होने के समाज में मानहानी का सामना भी कुछ लोगों को करना पड़ सकता है।
पुराने `500 और `1000 के नोटों को अचानक बंद करने से लोगों को असुवि‍धा का सामना करना पड़ सकता हैं। सामान्‍य व्यक्‍ति‍ यह भी सोचता है कि, `500 और `1000 के पुराने नोटों के चलन बाह्य होने से क्‍या भ्रष्‍टाचार सच में रूक जाएगा। जि‍न लोगों ने पहले ही अपने काले पैसों को संपत्ति‍ में दबदि‍ल कर लि‍या है उनका तो कु्छ नहीं होगा, जि‍न्‍होंने सोना खरीद कर रखा है, वह फायदे में रहें आदि‍। लेकि‍न यहॉं एक बात समझने की यह है कि‍ जबतक ऐसे नकली नोटों का कारोबार को चोट पहुँचाने वाले कदम नहीं उठाऐ जाते तब तक आतंकवाद को सहायक तत्वों और यंत्रणा को अवरूद्ध नहीं कि‍या जा सकता ।

लगभग सभी गैर कानूनी कार्यों में पैसों का लेनदेन बि‍ना कि‍सी तृतीय पक्ष (बैंक आदि‍ सरकारी यंत्रणा) के होता है, इससे गैर कानूनी धंदों में दि‍न दूगनी और रात चौगुणी प्रगती होती हैं। इन सभी गोरखधंदों को बंद करने का यह रामबाण उपाय हैं। इसमें भारतीय रि‍ज़र्व बैंक के अर्थशास्‍त्री और वि‍शेषज्ञों का योगदान है। नये नोटों को सैटेलाइट द्वारा ट्रैक करने की सुवि‍धा के कारण आगे आने वाले नोटों की ट्रैकिंग से नोटों का प्रयोग हो रहे स्‍थानों का पता लगाया जा सकेगा इससे भवि‍ष्‍य में नकली नोटों को बनाने में के खतरे को भी टाला जा सकेगा। रूपया पैसा व्‍यक्‍ति‍ के जीवन को सुलभ बनाता है। पैसा एक चलन होता हैं जि‍ससे आपको उपभोग्‍य वस्तुओं की प्राप्‍ति‍ होती हैं। रूपया-पैसा साधन है, न कि‍ साध्‍य। जो लोग इस वास्‍तवि‍कता को नहीं समझते हैं, वह पैसों की ‘माया’ के जाल में फसकर अपना और समाज का नुकसान कर बैठते हैं। जि‍स प्रकार रास्‍ते से होकर हमें हमारी मंजील तक पहॅुंचना होता हैं, मंजि‍ल आने के बाद रास्‍ते को छोड़कर अपने गंतव्‍य पर जाना ही बुद्धि‍मानी है, न कि‍ रास्‍तें को पकड़े रहने में। लेकि‍न समाज के वह लोग पैसों को ही सबकुछ समझते हैं, इस वास्‍तवि‍कता को समझे बि‍ना अपने गैर कानूनी धंदों से कमाए गए पैसों से देश का नुकसान कर बैठते हैं। पैसा साधन है, साध्‍य नहीं। कि‍तनी भी भुख लगें कोई नोटों को चबा-चबाकर खा नहीं सकता। यह वास्तवि‍कता जब समझ में आ जाएगी उस दि‍न प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति‍ अपने पास रखें पैसों को छुपाकर रखने के बजाए उसें समाज की आवश्‍यकताओं के लि‍ए खर्च करेंगा। इसी में देश, समाज और संपूर्ण वि‍श्‍व का हीत समाहि‍त है।

”गोधन, गजधन, वाजिधन, और रतन धन खान ।
जब आवे संतोष धन, सब धन धूरि समान ॥”

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