एक गजल बेटा बाप को नहीं देखता

जीता हूँ अपनी धुन में,इस दुनिया का कायदा नहीं देखता
रिश्ते निभाता हूँ दिल से  कभी अपना फायदा नहीं देखता

लिखता हूँ  अपने दिल से, कभी किसी का दिल नहीं दखाता
शब्दों की माला पिरोता हूँ कभी किसी की कविता नहीं चुराता

आँखे सभी की दो दो है,पर वह अपने पापो को नहीं देखता
अँधा पापो को महसूस करता है पर वह आँखों से नहीं देखता

मोदी देश के विकास को देखता,पर प्रधानमंत्री पद नहीं देखता
पप्पू प्रधानमंत्री पद देखता है,पर देश का विकास नही देखता

झांकते है दुसरे के गिरेबान में,कोई अपना गिरेबान नहीं देखता
बनना चाहते है प्रधानमंत्री,कोई अपनी काबिलियत नहीं देखता

रस्तोगी और क्या ज्यादा लिखे,अब कोई किसी को नहीं देखता
दूर अब मत जाईये कही,अब तो बेटा सगे बाप को नहीं देखता

आर के रस्तोगी 

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