रेप के समस्या का समाधान

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रोज रोज रेप होते हुये, एक वैश्या दुखी होकर बोली
आ जाओ हवस की दरिंदो,मैंने रेप की दुकान खोली

मेरे भी एक औरत है,एक औरत का दर्द समझती हूँ
पेट की भूख के कारण, कोठो पर हर पल सजती हूँ

मैंने इन दरिंदो के  लिये, यहाँ फ्री सेल लगा रक्खी है
मिटा ले अपनी हवस चौबीस घंटे दुकान खुली रक्खी है

पुलिस भी नाकाम हो चुकी है,बच्चियों को न बचा पाती है
सरे आम दरिन्दे घूमते फिरते है,उन्हें वह पकड न पाती है

हमने अब बीड़ा उठाया है,बच्चियों को रेप से अब बचाने का
हम में भी एक मानवता है,इरादा छोड़ दिया अब कमाने का

सरकार से है गुजारिश,हमारे धन्धे को कानूनी जामा पहना दे
बच्चियों का रेप बचाने के लिये, चाहे हमारे पर GST लगा दे

प्रशासन का काम हल्का होगा,बच्चिया भी रेप से बच जायेगी
इस तरह से सांप भी मर जाएगा,लाठी भी अब न टूट पायेगी

संसद कानून न बना सके,अध्यादेश तो जारी किया जा सकता है
इस तरह देश की बच्चियों को, रेप से अब बचाया जा सकता है

कभी कभी बुरी जगहों से,कुछ अच्छी बाते भी निकलती है
रस्तोगी के कूड़े ढेर से,कभी बहुमूल्य चीजे भी निकलती है

आर के रस्तोगी   

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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