आज के दफ्तरों पर एक कुण्डली

अफसर करे न अफसरी,बाबू करे न काम | 
चपरासी भी सो रहा,लेकर कुर्सी है थाम ||
लेकर कुर्सी है थाम,अब कैसे काम चलेगा |
रिश्वत देने वाला आये,पूरा ऑफिस दौड़ेगा ||
कह रस्तोगी कविराय,कैसे सुंदर अवसर |
ऊपर से नीचे तक भ्रष्ट है सब अफसर ||

आर के रस्तोगी 
मो 9971006425

1 thought on “आज के दफ्तरों पर एक कुण्डली

  1. you can fix Matraas (meter) very easily, first two lines 13 and 11, rest four lines 11 and 13. ‘लेकर कुर्सी है थाम’ को लिखना चाहिए, ‘ले कुर्सी को थाम’

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