किसानों से निवेदन

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क्यों भारत तुम बन्द करते हो,
क्यों आफत तुम मोल लेते हो।
अपने को भी तुम कष्ट देते हो,
दूसरो को भी तुम कष्ट देते हो।

तुम तो देश के अन्नदाता हो,
भारत के भाग्य विधता हो।
क्या मिलेगा भारत बन्द करने मे,
केवल नफरत के बीज बोते हो।

तुम तो हल को धारण करते हो,
क्यों दूजो की बंदूक धारण करते हो ?
नहीं काम है तुम्हारा गोली चलाना
तुम तो सारी जनता का पेट भरते हो,

तुम्हारा काम है केवल खेतो पर,
नहीं आओ तुम किसी की बातो पर,
ये खेल खराब तुम्हारा कर देंगे,
अपना उल्लू सीधा कर तुमको मूर्ख बना देंगे।

रखा नहीं कुछ भारत बन्द करने में,
दूसरों की बंदूके अपने कंधे रखने मे,
देखना ये एक दिन छोड़ चले जाएंगे,
आओ नहीं तुम इन सबके बहकाने मे।

बात करने मे मामले सुलझ जाते है,
बहकाने मे ये सब उलझ जाते है
जरा हाथ बढ़ाओ सब मिल कर,
अच्छे व्यक्ति हमेशा झुक जाते हैं।

आर के रस्तोगी

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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