लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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-बीनू भटनागर-

poem

एक टेढ़ी मेढ़ी रेखा,

उत्तरी ध्रुव से चली,

दक्षिण के ध्रुव से,

जाकर के मिली,

प्रशांत महासागर के,

रस्ते से गई।

रेखा ये ऐसी वैसी नहीं,

इसके बांई ओर,

तारीख हो आठ,

तो दांई ओर होगी नौ,

ये नहीं गुज़रती,

थल से कहीं,

तिथि के कारण,

भ्रम हो न कहीं,

इसलिये,

समुद्र में ही सफ़र करती,

टेढ़े मेढ़े रस्ते चलती,

इसका नाम सभी जाने,

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा,

प्रशांत महासागर में रहती।

One Response to “एक टेढ़ी मेढ़ी रेखा”

  1. vijay nikore

    आजकल आपकी रचनाओं का और ही मज़ा आ रहा है। बहुत, बहुत बधाई।

    Reply

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