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    Homeसाहित्‍यकविताआक्रांता शक और विक्रमादित्य

    आक्रांता शक और विक्रमादित्य

    —विनय कुमार विनायक
    भारत आक्रांता शासक शक को
    वैवस्वत मनु के नौ में एक पुत्र
    नरिष्यन्त के वंशज कहे गए हैं,
    जो व्रत हीन आर्य बहिष्कृत थे!

    मध्य एशिया में है क्षीरोद समुद्र,
    जो क्षीर सागर कहलाता था वही
    क्षीरवान, कश्यप ऋषि के नामपर
    काश्यपसागर; कैस्पियनसागर है!

    यहीं सागरीय शाकद्वीप स्थान
    शक कबीला की थी आदि भूमि
    यूरेशिया द्वीप में डेन्यूब नदी से
    आलताई पर्वत श्रेणी तक फैली!

    ईसापूर्व दूसरी शती में चीन के
    यू-ची कुषाण ने शाकद्वीप से
    शकों को दक्षिण की ओर ठेला
    जिसने ईरान के पूर्वी भाग में
    किया बसेरा, शकिस्तान बसा!

    यही शकिस्तान अब सीस्तान
    कहलाता है फिर वहां से शक
    भारतीय सिंधु नदी के कांठे में
    आकर शकद्वीप बसा बैठा था!

    ये शक, मग पुजारी बन कर
    कृष्ण पुत्र साम्ब के कहने पर
    पूर्व में भी मुलतान में आए थे
    ये वैवस्वत मनु के पिता सूर्य
    की अराधना करनेवाले मग थे!

    जो सौराष्ट्र मगध में फैल गए
    शक मगों का भारत आने का
    सिलसिला रहा काफी पुराना ये
    मग,शक,पहलव हैं भाई-बांधव
    भारत को बना लिया ठिकाना!

    मग पार्थिया के हमलावर मोय;
    मोग के साथ भी आए,बस गए,
    तक्षशिला,मथुरा, उज्जैन में भी,
    जैन स्रोत कहता कि उज्जैन के
    ज्योतिषी कालक आचार्य मग ने
    शक आक्रांताओं को बुलाया था!

    उज्जैन महाराजा गर्दभिल्ल ने
    कालकाचार्य की बहन से बिना
    रजामंदी के दैहिक संबंध किया
    क्षुब्ध कालकाचार्य ने छियानबे
    ईरानी शाह शकों को बुलवाया
    और आक्रमण कराया राजा पे!

    पराजित हुआ राजा गर्दभिल्ल
    सौराष्ट्र,उज्जैन में छाया शक,
    पर संतावन ई.पू.में उज्जैन के
    गर्दभिल्ल पुत्र विक्रमादित्य ने
    शकों को पराजित कर चलाया
    नवसंवत् विक्रय संवत् नाम से!

    ये गर्दभिल्ल पौराणिक शासक
    गंधर्वसेन महेन्द्रादित्य मल्ल थे
    जिनके पुत्र विक्रम सेन शकारि
    प्रथम विक्रमादित्य बने संवत्सरी,
    जो थे कृत मालव संवत्सरी राजा
    कृतवीर्यपुत्र अर्जुन से सम्बंधित!

    इतिहास विश्रुत विक्रमादित्य राजा
    बड़े नीति निपुण औ’ शक्तिशाली थे
    उनका राज अरब, मिस्र तक फैला,
    कालिदास, वराहमिहिर सा नवरत्न
    उनके दरबार में उपलब्ध रहते थे!

    अंग्रेजों की साज़िश ने इस राजा
    विक्रमादित्य को मिथकीय नायक
    घोषित करके ईस्वी सन् चलाकर
    पूरे विश्व पर थोप डाला है किन्तु
    विक्रम भारतीय राष्ट्रीय संवत है!

    प्रथम विक्रमादित्य से पराजित
    शक भारत में रहने लगे थे फिर
    अवसर पा चन्द्रगुप्त द्वितीय के
    जमाने में उभरे, जिन्हें चन्द्र ने
    तीन सौ अस्सी में पराजित कर
    द्वितीय विक्रमादित्य विरुद लिए!

    दोनों विक्रमादित्य के नवरत्नों के
    नाम में साम्य है, लेकिन इतिहास
    इस गुत्थी पर चुप्पी साधे हुए है
    दोनों विक्रमादित्यों की उपस्थिति
    जनश्रुति और पुराण में मान्य है!

    शक बेशक आक्रांता थे, हिन्दू
    शकों को म्लेच्छ समझते, पर
    ये बने थे पक्के कृष्ण उपासक,
    वैष्णव,शैव,शाक्त, बौद्ध धर्मी,
    शक क्षत्रप हिन्दु ध्वजधारी थे!

    उन्होंने सिक्कों में हिन्दू देव
    देवियों को अंकित किया था,
    मथुरा के क्षहरात वंशी शक
    हंगाम, हगान,रजबुल, शोडास
    श्री कृष्ण,लक्ष्मी के भक्त थे!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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