एक बरस बाद है लौटा विदेश से ।।
अतिशय समृद्धि ले बेटा बसन्त ये ।
धरती माँ हुलसा रही ,
हृदय से लगा रही ।।
                            *
सूरज ने जग चमकाया ,
कोकिल ने गान सुनाया।
फूलों ने घर सजाया ,
उत्सव सा लग रहा ।।
                             *
ख़ुशियों में खोई सी ,
धरती माँ सोच रही ।
साल में एक बार ही तो 
ये अपने घर आता है।
सबको हरषाता है , 
धूम  मचा जाता है ।।
                                *
लौट फिर जाएगा ,
बेटा ये विदेश को ।
बरस  बाद ही तो फिर,
अपने घर आएगा ,
बेटा बसन्त ये।।
                                *********
शकुन्तला बहादुर

1 thought on “आया बसन्त

  1. ऋतु वर्णन में आप की अनोखी सिद्धि प्रकट करता काव्य नितान्त सुन्दर बन पाया है। –धन्यवाद –मधुसूदन

Leave a Reply

%d bloggers like this: