‘एक्सीडेण्टल पीएम’ बनाम ‘सेक्युलरटाइटिस’ के 4-एम


                                        मनोज ज्वाला
      भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तत्कालीन हालत बयां
करने वाली फिल्म- ‘एक्सीडेण्टल पीएम’ पर कांग्रेसियों ने आपत्ति जताते
हुए उसके प्रदर्शन को बाधित कर रखा है, क्योंकि उसमें पीएम को सोनिया
‘मैडम का मुलाजिम’ के तौर पर पेश किया गया है । किन्तु गम्भीर हास्य व
तीखे व्यंग्य से सराबोर फिल्मी कथा-युक्त उपन्यास की एक पुस्तक, जिसमें
सोनिया को विदेशी विषकन्या तथा मनमोहन सिंह को मैडम के पीएम (पर्सनल मेन)
का जीएम(जेनरल मैनेजर) अभिहित किया गया है और महात्माजी के द्वारा देश के
तमाम धर्मनिरपेक्षी नेताओं-अभिनेताओं को बेपर्द कर मोदीजी को महानायक
स्थापित किया गया है , सो तो वर्ष २०१४ में ही बिना किसी शोर-शराबे के
चुपके से जारी हो चुकी , जिसकी पूरी सियासी कथा अब चरितार्थ हुई दिखती है
। इस उपन्यास के दो-दो संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं और इसके कथानक
भारतीय राजनीति में आज भी घटित हो रहे हैं , जिसमें सोनिया गांधी सहित
पूरी कांग्रेस की ऐसी-तैसी हुई है । जिस प्रकार ‘गीता’ मूल ग्रन्थ-
‘महाभारत’ के मध्य से निःसृत  हुई है , उसी प्रकार ‘सेक्युलरटाइटिस’ नामक
यह उपन्यास उस मूल पुस्तक- ‘महात्मा की बेटी और सियासत’ का उतर-भाग है ,
जिसके सम्बन्ध में एक समालोचक ने लिखा है- “इसे पढने के दौरान आप भारतीय
राजनीति रुपी युवती को नंगा होते देख शर्म के मारे अपनी हथेलियों से
आंखें बन्द कर लेने के बावजूद उंगलियों के बीच छिद्र बना कर उसकी पूरी
देह का उत्थान-पतन देख लेने का मोह नहीं छोड पाएंगे ”।  इसके वे तथ्य जो
आज भी हमारे देश के राजनीतिक परिदृश्य में सत्य के तौर पर कायम हैं , उसे
संवाद के रुप में पढ लेने मात्र से आप ‘एक्सीडेण्टल पीएम’ नहीं देख पाने
के मलाल से उबर जाएंगे । अभी अवसर चूंकि एक्सीडेण्टल पीएम का है , इसलिए
पहले उसी से सम्बन्धित संवाद पढिए , यथा-
–        …बडी त्यागी महिला हैं मैडम,…इतनी त्यागी हैं मैडम कि इस देश की
इतनी बडी सेवा करते रहने के बावजूद वो इस देश की किसी भी चीज का इस्तेमाल
खुद नहीं करती हैं….भारत की किसी भाषा तक का इस्तेमाल नहीं
करती….बोलती तो अंग्रेजी हैं ही, हिन्दी में जो भाषण करती हैं वह भी इस
देश की देवनागरी लिपि में नहीं , इटली की रोमन लिपि में लिखा हुआ होता है
…समझे ?….मैडम इस देश की भाषा व लिपि का भी इस्तेमाल नहीं
करती…..वो इतनी त्यागी हैं कि उन्होंने अपने पी०एम० को ही इस देश का
जी०एम० बना कर जनता की सेवा में लगा रखा है ।
–       क्या मतलब ? कुछ समझा नहीं, पीएम तो किसी सरदार जी को बताया जाता है ,
किन्तु जीएम का क्या मतलब ?
–       जी, मैडम के पीएम अर्थात उनके दर्जनों ‘पर्सनल मेन’ इस देश की सरकार के
मंत्री हैं और अपने उन सब पीएम के सरदार मौनमोहन सिंह को मैडम ने सरकार
का महामंत्री अर्थात जनरल मिनिष्टर- ‘जीएम’ बना रखा है , समझे ? मैडम ने
अपने पीएम के सरदार को बना रखा है सरकार का ‘जीएम’ और अपनी ‘पीपी’ को बना
दिया है- प्रेसिडेण्ट ऑफ नेशन …. इतनी त्यागी और करामाती हैं हमारी
मैडम !
–       लेकिन प्रेसिडेण्ट तो कोई प्रतिमा पाटिल बतयी जाती हैं !
–       जी वही तो बता रहा हूं- मैडम की पीपी हैं, इस देश की प्रेसिडेण्ट !
–        पीपी, अर्थात वो महिला पाटिल या…..?
–       जी, मैडम की प्राइवेट पर्सन !
–       वाह ! तब तो सचमुच बडी करामाती हैं आपकी मैडम !- महात्माजी ने अपना
चश्मा उतारते हुए कहा तो नटवर अपने होंठों पर जीभ फेरने लगे ।
       महात्मा गांधी के ‘हिन्द-स्वराज’ की स्थिति व कश्मीर-समस्या की
त्रासदी को केन्द्र में रख कर कांग्रेसी मैडम, प्रधानमंत्री मनमोहन एवं
ऐतिहासिक महात्मा व भाजपाई मोदी (४-एम) किरदार बनाते हुए लिखे गए इस
धारावाहिक उपन्यास का उतरवर्ती भाग ‘सेक्युलरिज्म’ की अनर्थकारिता को
‘सेक्युलरटाइटिस’ नामक राष्ट्रघाती राजनीतिक महामारी के भीषण संक्रमण और
‘एम-एम’ (महात्मा व मोदी) के हाथों उसके उन्मूलन तथा कांग्रेसी मैडम की
सत्ता के विसर्जन पर केन्द्रित है , जिसके कतिपय संवाद विशेष पठनीय हैं ;
यथा-
–       लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है ? हमें तो व्याकरण में हमारे मास्टर ने
बताया था कि गुजरात संज्ञा है व्यक्तिवाचक और कर्ता के अनुसार क्रिया
होती है निष्पादित, किन्तु आप तो कह रहे हैं कि क्रिया के अनुसार कर्ता
होता है निर्धारित ?
–       जी मैं ठीक कह रहा हूं- गुजरात क्रिया है , संज्ञा नहीं और क्रिया के
अनुसार मैडम उसका कर्ता निर्धारित करती हैं ।
–       वाह ! गुजरात संज्ञा से क्रिया हो गया ! लेकिन यह तो अनर्थ है- महात्मा
जी कूंढने लगे-  ….मगर क्रिया से कर्ता का निर्धारण आखिर कैसे होता है
जी ?
–       देखिए , संज्ञा को क्रिया में बदलना एवं क्रिया के अनुसार उसके कर्ता
का निर्धारण करना मैडम के बाएं हाथ का खेल है , क्योंकि देश की सरकार
मैडम के दांए हाथ में रही है और दोनों कमानिष्ट पार्टियां उनके बाएं हाथ
में ही हैं । गोधरा-काण्ड की प्रतिक्रिया में पूरा गुजरात भडक उठा तब
मैडम के बाएं हाथ में ऐसी हरकत हुई कि मीडिया से ले कर जांच एजेन्सी तक
सबने गोधरा को गंगा-जमुनी तहजीब की मिशाल और गुजरात को नरेन्द्र मोदी के
कर्तृत्व की बेमिशाल खुनी क्रिया घोषित कर दी । इस तरह से मैडम ने क्रिया
के अनुसार कर्ता के निर्धारण का समीकरण स्थापित कर दिया । मैंने कहा नS
मैडम एकदम करिश्माई महिला हैं…. आप अपने जमाने के स्कूली मास्टर की बात
करते हैं…! …किन्तु इस जमाने में मैडम से बडा स्कॉलर कोई नहीं है, वो
बोलती सिर्फ अंग्रेजी हैं, लेकिन अपने बाएं हाथ की करामात से किसी भी
भाषा का व्याकरण व शब्दकोश और शिक्षा का पाठ्यक्रम कांग्रेस की जरुरत के
हिसाब से ऐसे गढ देती हैं कि बडे-बडे साहित्यकार भी तदनुसार ही व्यवहार
करने लगते हैं । अभी हाल ही में इन्होंने सहिष्णुता व असहिष्णुता शब्द को
नया अर्थ प्रदान किया है ।- धिग्गी बाबू ने अपने होठों पर जीभ फेरते हुए
कहा । तभी दूसरी ओर से आवाज उभरी-
–       वामपंथी मास्टरों ने किया है भाषा व साहित्य में यह परिवर्तन और उननें
ही रचा है नया शब्दकोश  व नया व्याकरण । देश के तमाम बौद्धिक संस्थानों व
मीडिया-प्रतिष्ठानों में इस हेतु आजादी के बाद से ही सक्रिय हैं वामपंथी
प्राध्यापक सम्पादक पत्रकार साहित्यकार ।
–       नहीं कांग्रेस ही है इसका श्रेय लेने की असली हकदार , क्योंकि मैडंम की
कांग्रेसी सरकार से सुविधायें पा-पा कर ही वामपन्थी कर सके हैं ऐसा
बौद्धिक आविष्कार । ये वामपंथी तो खुद असहिष्णु हैं जी !
–       कैसे ?
–       ऐसे कि देश में सभी धर्मनिरपेक्षी ताकतों की कमान मैडम के हाथों में है
, मैडम ही हैं युपीए की चेयरमैन , तब भी धर्मनिरपेक्षता का सारा श्रेय
खुद ले लेना चाह रहे हैं वामपंथी ।
–       लेकिन हमारी बिन्दिया दी ने ही बनवाया है एनडीए के खिलाफ युपीए ,
अन्यथा किसकी चेयरमैन होती आपकी मैडम ? हमारी दिदी साम्प्रदायिक शक्तियों
के विरूद्ध हमेशा बनवाते रहती हैं नया-नया मोर्चा और गठबन्धन , इन दिनों
वे महागठबन्धन बनवा रही हैं समझे ?
–       आपकी दिदी नया मोर्चा बनवायें या नया गठबन्धन, उससे कोई फर्क नहीं
पडता…हमारी मैडम की धर्मनिरपेक्षाता है सबसे भारी-भरकम । भांड में जाये
आपकी दिदी का महागठबन्धन !
–       ऐ  ! जुबान सम्हाल कर बोलो …..हम वर्दाश्त नहीं करेंगे दिदी की ऐसी
तैसी…. जानते हैं मैडम भी हैं कैसी….
–       मैडम के टुकडों पर पलने वाले हरामखोरों ! जिसकी खाते हो उसी को नीचा दिखाते हो ?
     तूं-तूं मैं-मैं से गरमाया हुआ माहौल जब हिंसक होने लगा तब महात्मा
जी भी भडकते हुए बोल उठे- आप लोग बन्द करें यह बकवाद ! संज्ञा को क्रिया
बना कर और क्रिया के अनुसार कर्ता के निर्धारण का उल्ट-पुल्टा सियासी
व्याकरण रचने-पढाने वाले सत्तालोलुप राजनीति के हेहर-थेथर धूर्त्त मास्टर
! जनता को चुनावी सर्कस का चौपाया मान खुद बन बैठे हैं , रिंग-मास्टर ?
घोर साम्प्रदायिकता को धर्मनिरपेक्षता का नाम दे कर इसे ही
साम्प्रदायिकता का विपरीतार्थ सिद्ध करने में अत्यन्त चतुर चतुराई के साथ
लगे हुए हैं सब जोकर ! सेक्युलरिज्म नामक इस छद्म-साम्प्रदायिकता के
कारनामें बडे खतरनाक हैं , इसके संक्रमण से फैली सेक्युलरटाइटिस की
बीमारी बहुत खौफनाक है……….(क्रमशः) । आगे इस उपन्यास की कथा का
विस्तार कांग्रेस के सियासी सतरंज का पाशा पलटने से ले कर भाजपा-मोदी के
राज्यारोहण तक हुआ है, जो पूरी तरह से सत्य प्रमाणित हो चुकी है ; किन्तु
इस पर फिल्म बनना अभी बाकी है, जबकि इसकी प्रक्रिया जारी है ।

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