मनोज ज्वाला

* लेखन- वर्ष १९८७ से पत्रकारिता व साहित्य में सक्रिय, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से सम्बद्ध । समाचार-विश्लेषण , हास्य-व्यंग्य , कविता-कहानी , एकांकी-नाटक , उपन्यास-धारावाहिक , समीक्षा-समालोचना , सम्पादन-निर्देशन आदि विविध विधाओं में सक्रिय । * सम्बन्ध-सरोकार- अखिल भारतीय साहित्य परिषद और भारत-तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य ।

महाकाल की परिवर्तनकारी चेतना का प्रकाशपुंज है गायत्री तीर्थ ‘शांतिकुंज’

मनोज ज्वालाभारत सरकार ने हरिद्वार में अवस्थित ‘गायत्री तीर्थ शांतिकुंज’ कीस्वर्ण जयन्ती के अवसर पर पिछले गंगा दशहरा के दिन...

ईसाई-विस्तारवाद का वीभत्स अंजाम : स्कूलों में कब्रिस्तान!

मनोज ज्वालाखबर है कि कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक दशकों पुरानेस्कूल के भीतर कब्रिस्तान मिला है और उस...

कोरोना त्रासदी और भारतीय ज्ञान-विज्ञान को नकारने की गलती.

मनोज ज्वाला Frozen Vegetables Mix कोरोना महामारी की रोकथाम को लेकर अंग्रेजी चिकित्सा पद्धति में अभीतक दवा की खोज नहीं...

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