आधुनिक भारत में किसान हाशिए पर

संजय कुमार

कुछ समय पहले राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट आई जिसके अनुसार पिछले 16 वर्षों में 2.5 लाख से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी कर ली है। वहीं महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक में किसानों की दशा ओर भी खराब है। मध्यप्रदेश में हर दिन 4 किसान खुदकुशी कर रहे है। इन आंकडों और रिपोर्ट ने सरकार के कार्यक्रम भारत निर्माण पर सवाल खड़े कर दिये है। भारत जैसे देश में जहां 60 फीसदी लोग आज भी कृषि पर आश्रित है। कृषि क्षेत्र की स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत निर्माण कहां हो रहा है।

कृषि क्षेत्र के सुधार के लिए 90 के दशक में हरित क्रांति को अपनाया गया था। उसके बाद कुछ वर्षों तक कृषि क्षेत्र में सुधार हुआ। लेकिन इस पद्धति में रसायनिक उर्वरकों का और अधिक जल का प्रयोग किया गया । जिसके कारण आज भूमि की उर्वरता नष्ट हो गई है।

वहीं दूसरी ओर कृषि को व्यवसाय बनाने के प्रयास हो रहे है । इसके साथ ही किसानों की भूमि का अधिग्रहण करके औद्योगिकीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को कृषि क्षेत्र से दूर किया जा रहा है।

वैश्वीकरण के बाद नकदी फसलों को बढ़ावा दिया गया । इन नकदी फसलों पर खर्च अधिक होता है। जिसके कारण किसानों को अधिक कर्ज लेना पड़ता है। वहीं अगर फसल किसी कारण से बर्बाद हो जाती है तो किसान के पास कर्ज चुकाने का कोई रास्ता नहीं होता है। तो वहीं एक अन्य कारण फसल बीमा में धोखाधड़ी भी है। किसानों को फसल बीमा भी पूरा नहीं मिल पाता है। इस कारण किसानों को खुदकुशी करने को मजबूर होना को पड़ता है। भारत की कृषि मानसून पर निर्भर होती है।

वहीं हम पश्चिमी देशों से तुलना करने लग जाते है। जबकि पश्चिमी देशों की कृषि मशीनों और भारी अनुदान पर टिकी हुई है। वहीं भारत में कृषि क्षेत्र पर अधिक बजट भी खर्च नहीं किया जाता है। इसके साथ ही औद्योगिकीकरण और निजीकरण के कारण कृषि हाशिए पर चली गई है।

आज जीडीपी में कृषि का अनुपात 14.2 फीसदी रह गया है। इसके साथ ही कृषि की वृद्धि दर भी पिछले वर्ष की तुलना में 5.4 से गिरकर 3.2 फीसदी हो गई है। कृषि मंत्रालय का एक अध्ययन जिसमें बताया गया है कि किसानों को विकल्प मिले तो वह कृषि को छोड़ दे।

अब सवाल यह उठता है कि किसानों की स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो देश को खाद्य संकट से गुजरना पड़ेगा। हमें विकास पर जोर देना चाहिए लेकिन हमें टिकाऊ विकास पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। टिकाऊ विकास के लिए हमें गैर-रसायनिक या जैविक कृषि पर जोर देना होगा ताकि कृषि की लागत में कमी आए। इससे किसानों को भी लाभ होगा। इसके साथ ही फसलों के समर्थन मूल्यों में वृद्धि की जानी चाहिए। जिससे किसानों को कृषि के लिए प्रोत्साहित किया जा सके ।

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