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    स्नेह

    न वफ़ा है न शर्त है
    रुसवाई है न बेवफाई
    इसमें न कुछ खोजते हैं
    न इसमें कुछ तौलते हैं

    खुद-ब-खुद बहती है
    खुद-ब-खुद सिमटती है
    हिसाब मांगती नहीं कभी
    उत्तर चाहती नहीं कभी

    सिर्फ देती ही रहती है
    लेती नहीं कभी भी कुछ
    न कुछ बोलते हुए भी
    बोलती रहती सब कुछ

    निर्गुण है पर सघन है
    हँसता हुआ रुदन है
    बहती है तो खिलती
    रुकती तो मुर्झा जाती

    स्नेह की यह धार
    है बड़ी ताकतवर
    कहीं जान डाल दे
    कहीं प्राण हर ले।

    -अनिल सोडानी

    अनिल सोडानी
    अनिल सोडानी
    संपर्क न.: 9818226901 इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर। साहित्य में गहन रुचि। आसपास की घटनाओं से आहत।

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