More
    Homeविविधाएयर इंडिया की पत्रिका शुभयात्रा में जगन्नाथ मंदिर पर लिखे लेख में...

    एयर इंडिया की पत्रिका शुभयात्रा में जगन्नाथ मंदिर पर लिखे लेख में मांसाहार के उल्लेख पर एयर इंडिया की माफी

    डॉ. शुभ्रता मिश्रा
    mahaprasad

    एयर इंडिया की पत्रिका शुभयात्रा के अक्टूबर 2016 वाल्यूम-4, इशु-9 के पृष्ठ 64-68 में प्रकाशित एक बिना लेखक के नाम वाले अँग्रेजी लेख “डिवोशन कैन बी डिलीशियस!” में कहा गया है कि ‘पुरी के जगन्नाथ मंदिर की रसोई जिसे देश में सबसे बड़ा बताया जाता है, में 500 रसोइयों और 300 सहायकों की पूरी फौज है जो रोजाना 1,00,000 लोगों को खाना खिला सकते हैं। इसका मतलब है कि यहां रोजाना शाकाहारी और मांसाहारी भोजन की करीब करीब 285 किस्में परोसी जातीं हैं।’ इस लेख में जगन्नाथ मंदिर के अलावा स्वर्ण मंदिर अमृतसर के गुरु का लंगर, इस्कान मंदिर के अक्षयपात्र और उडुपी के मंजुनाथ मंदिर के अन्नदानम व धर्मथाल और शिरडी के सांईबाबा मंदिर के सांई प्रसाद के भी उल्लेख किए गए हैं। इस लेख में लेखक का नाम कहीं नहीं लिखा है, परन्तु लेख के प्रारम्भ में लिखा गया है कि मधुलिका दास आपको भारत के पाँच अद्वितीय मंदिरों की पाकशालाओं और उनके स्वादिष्ट व्यंजनों से रुबरु कराएंगीं।
    इस लेख में जगन्नाथ मंदिर की रसोई का उल्लेख करते हुए जो यह बात कही गई है कि वहां प्रतिदिन मांसाहारी भोजन परोसा जाता है, यह बेहद आपत्तिजनक है। साथ ही मंदिर के व्यंजनों को बनाने वाले पंडितों के लिए रसोइयों और सहायकों की पूरी फौज जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी गलत है। जबकि वास्तविकता यह है कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पंडितों का एक विशेष वर्ग होता है, जिनकी सेवाएं प्रसाद बनाने के लिए ली जाती हैं। एयर इंडिया और लेखक का यह कहना कि उनकी मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी और वे इसके लिए माफी मांगते हैं। परन्तु क्या इतना बोल देना जगन्नाथ पुरी जैसे अथाह आस्था वाले मंदिर के लिए पर्याप्त हैॽ जगन्नाथ मंदिर में प्रसाद की शुद्धता के लिए इतना अधिक ध्यान रखा जाता है कि मंदिर परिसर में ही नहीं बल्कि आसपास की दूकानदार भी प्रसाद की शुद्धता का ध्यान रखते हैं तथा बेचे जाने वाले सामानों को भी झूठा नहीं किया जाता है। यहां तक कि कुछ वर्षों पहले तक तो पूरे जगन्नाथ मंदिर के क्षेत्र में किसी भी तरह की मांसाहारी वस्तुएं तक नहीं बेची जाती थीं। हालांकि यह ज्ञात नहीं है कि इनके लिए प्रशासन की तरफ से रोक लगी थी या आस्था को दृष्टिगत रखते हुए स्वेच्छा से वहां के लोग ऐसा करते थे क्योंकि पिछले कुछ सालों से परिसर के बाहर कुछ दूरियों पर कुछ मांसाहारी वस्तुएं भी बिकने लगी हैं।
    मुद्दा यह बनता है कि जो मंदिर प्रसाद की पवित्रता को लेकर इतना संजीदा माना जाता है, उसके लिए इस तरह के शब्द लिख पाना त्रुटिवश नहीं लगते। दूसरा प्रश्न यह भी उठता है कि जब कभी भी इस तरह के धार्मिक संवेदनाओं से जुड़े लेख लिखे जाते हैं, तब विशेषरुप से लेख के प्रकाशन के पूर्व प्रूफरीडिंग सावधानीपूर्वक की जाती है और जिस पर शुभयात्रा जैसी पत्रिका में इस तरह की गलती का होना एक बहुत बड़ी लापरवाही की श्रेणी में आता है। यह जाने-अनजाने में ही लोगों की आस्थाओं को प्रभावित कर देता है। यद्यपि यह पत्रिका आम लोगों की पहुंच से बहुत दूर है, इसलिए इसका बहुत अधिक प्रतिरोध नहीं देखने में आ सका, परन्तु इस तरह की छोटी-छोटी त्रुटियां ही माहौल को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ती हैं। हालांकि एयरइण्डिया ने अपनी विमान पत्रिका ‘शुभयात्रा’ के इस लेख के लिए माफी मांगते हुए नवम्बर माह का अंक आने के दो दिन पूर्व ही इस पत्रिका की प्रतियां तुरंत प्रभाव से हटा लीं हैं। परन्तु लगभग पूरे अक्टूबर माह के दौरान भारतीय और विदेशी विमानयात्रियों के समक्ष एक गलत जानकारी पहुंच चुकी है। अतः एक जिम्मेदार भारतीय निकाय होने के नाते एयरइण्डिया या अन्य कोई भी संस्थान से इस तरह की लापरवाही आगे न बरती जाए, इसकी आशा ही की जा सकती है।

    डॉ. शुभ्रता मिश्रा
    डॉ. शुभ्रता मिश्रा वर्तमान में गोवा में हिन्दी के क्षेत्र में सक्रिय लेखन कार्य कर रही हैं। डॉ. मिश्रा के हिन्दी में वैज्ञानिक लेख विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं । उनकी अनेक हिन्दी कविताएँ विभिन्न कविता-संग्रहों में संकलित हैं। डॉ. मिश्रा की अँग्रेजी भाषा में वनस्पतिशास्त्र व पर्यावरणविज्ञान से संबंधित 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । उनकी पुस्तक "भारतीय अंटार्कटिक संभारतंत्र" को राजभाषा विभाग के "राजीव गाँधी ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार-2012" से सम्मानित किया गया है । उनकी एक और पुस्तक "धारा 370 मुक्त कश्मीर यथार्थ से स्वप्न की ओर" देश के प्रतिष्ठित वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है । मध्यप्रदेश हिन्दी प्रचार प्रसार परिषद् और जे एम डी पब्लिकेशन (दिल्ली) द्वारा संयुक्तरुप से डॉ. शुभ्रता मिश्रा के साहित्यिक योगदान के लिए उनको नारी गौरव सम्मान प्रदान किया गया है।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Must Read

    spot_img