शक के दायरे में सिंधिया के करीबी सुखदेव पांसे पर सबकी निगाह !!

रामकिशोर पंवार

जहां एक ओर जबसे प्रदेश की कांग्रेस सरकार को फ्लोर टेस्ट के दौरान बहुमत साबित करने का डर सता रहा है, वही दुसरी ओर इन संभावनाओ से इंकार नहीं किया जा सकता कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह जिला छिन्दवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री एवं राज्य सरकार के वर्तमान श्रम मंत्री सुखदेव पांसे से भी उन्हे धोखा मिल सकता है. जानकार सूत्र बताते है कि कुंबी समाज से आने वाले सुखदेव पांसे मराठी मानुष होने के साथ – साथ इनके पूर्वज मराठा शासनकाल में नागपुर के भोसले एवं ग्वालियर के सिंधिया तथा इन्दौर के होल्कर घराने के सैनिको के रूप में बैतूल जिले में आए थे. बैतूल जिले में जब मुगलो को परास्त कर मराठो का शासन खेरला किले पर था उस समय बैतूल जिले में आकर बसी कुंबी जाति के लोगो को बड़ी संख्या में मराठा शासको की सेना में सैनिको एवं गांवो की मालगुजारी के साथ गांव पटेली दी गई थी. तबसे लेकर आज तक कुंबी जाति के लोग छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर वर्तमान समय के मराठा शासको के वफादार करीबी व्यक्तियों में गिने जाते है. बीते माह 17 जनवरी 2020 को अचानक पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सुखदेव पांसे के घर पर पहुंचे तो उन्होने पूरे जिले में संदेश भेजने के लिए एक स्थानीय दैनिक समाचार पत्र में पूरे पेज पर अपने घर पधारे सिंधिया की तस्वीरो से समाचार पत्र को सजा डाला. सिंधिया ने यह कहा कि मेरे सुखदेव पांसे से पूराने सबंध है तथा सिंधिया की तरह सुखदेव पांसे भी मराठा है. 16 जनवरी 2020 गुरूवार की रात्री अपने समर्थक मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के घर डीनर करने के बाद अगली सुबह 17 जनवरी 2020 शुक्रवार को श्री सिंधिया अपने समर्थको एवं मंत्री के संग सीधे सुखदेव पांसे के घर पर नाश्ता करने पहुंचे. सुखदेव पांसे के बैतूल जिले में भाजपा नेताओ से करीबी सबंध काफी चर्चित रहे है. मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे स्वर्गीय विजय कुमार खण्डेलवाल के बारे में कहा जाता था कि उनका सुखदेव पंासे के संग गुप्त समझौता था जो वर्तमान में उनके पुत्र एवं प्रदेश भाजपा कोषाध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल के संग निभा रहे है. पांसे के खिलाफ कमजोर व्यक्ति को टिकट देकर जिताने के पीछे भाजपा के बैतूल जिले के नेताओ की सोची – समझी नीति एवं रीति रही है. सुखदेव पांसे के चलते ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जिस फर्जी आदिवासी सासंद श्रीमति ज्योति धुर्वे को जेल भिजवाना का दंभ भरती थी उस ज्योति धुर्वे का बालबांका कांग्रेस प्रदेश में सरकार बनने के 15 साल माह भी कुछ नहीं कर सकी. मुलताई हमारी, बैतूल तुम्हारी की नीति के तहत बने सबंधो का असर है कि आज भी भाजपा के नेताओ के काम सुखदेव पांसे के मंत्री बनने के बाद हुए है. जानकार सूत्र बताते है कि सुखदेव पांसे के भाजपा के नेताओ से करीबी सबंधो का परिणम रहा कि बैतूल जिला मुख्यालय की लोकसभा सीट बीते 30 वर्षो से कांग्रेस जीत नहीं सकी है. 4 बार स्वर्गीय विजय खण्डेलवाल, 1 बार हेमंत खण्डेलवाल, 2 बार श्रीमति ज्योति धुर्वे तथा वर्तमान में डी डी उइके भाजपा के सासंद है. बैतूल जिले में सिंधिया का भाजपा में जाने के बाद सबसे अधिक सिंधिया का स्वागत सत्कार एवं खुर्शियां मुलताई विधानसभ क्षेत्र में देखने को मिली जो वर्तमान में राज्य सरकार के श्रम मंत्री सुखदेव पांसे का कहलाता है. बैतूल जिले में सुखदेव पांसे के करीबी विधायको में से एक बह्मा भलावी के पास भाजपा के नेताओ के कई बार आफर आ चुके है. स्वंय इस बात की पुष्टि बह्मा भलावी कर चुके है. जानकार सूत्रो का कहना है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिरने की स्थिति में यदि फ्लो टेस्ट में कांग्रेस के विधायको का पूर्ण समर्थन न मिलने के पीछे की वज़ह पर कांग्रेस पार्टी ने विचार नहीं किया और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शब्दो को सही ढंग से नहीं लिया तो सिंधिया जैसे विभिषण जो सिंधिया के करीबी रहे है उनको भी भाजपा साध कर प्रदेश की कांग्रेस सरकार को गिरा कर ऐसे विधायको को जीत का पूरा यकीन दिलाने में लगी है कि मध्यावधि चुनाव में वह उनके खिलाफ कमजोर व्यक्ति को ही  टिकट देगी जो उनकी जीत का कारण बनेगा साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार में मंत्री तथा करोड़ो का बैंक बैलेंस भी बढाएगी.
बरहाल यह देखना बाकी है कि पूरे प्रकरण में फ्लोर टेस्ट की स्थिति में सिंधिया और उसके सिपाह सलाहकार किन – किन प्रदेश के मराठा जनप्रतिनिधियों को साधने का काम करते है क्योकि मराठा शासन यदि प्रदेश में लाना है तो प्रदेश की कांग्रेस सरकार को हर हाल में गिराना पड़ेगा

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