शारदीय नवरात्रों के लिए आकर्षक रूप से सजे मां भवानी के तीनों धाम भोजावाली मंदिर, देवसर धाम व पहाडी माता मंदिर

भगवत कौशिक

आस्था और धर्म की बात हो ओर छोटी काशी यानि भिवानी का जिक्र ना हो ऐसा संभव नहीं है। छोटी काशी भिवानी में छोटे बड़े चार सौ से अधिक मन्दिर स्थित है।जहां पर नवरात्रों के समय में श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा देखने को मिलती है। भक्तजन अपने-अपने तरीके से माता के मन्दिर में हाजिरी भरते हैं।

नवरात्रों में मां के विभिन्न रूपों के चर्चे किस्से तो अक्सर देखे सुने जाते होंगे। कई किस्से तो ऐसे हें जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हें कि क्या ऐसा भी हो सकता है।आज हम भिवानी जिले के ऐसे ही तीन मंदिरों की बात कर रहे है जो अपने चमत्कारिक और अलौकिक शक्ति के कारण शहर ,राज्य, देश ही नहीं अपितु विदेशों मे भी अपनी पहचान रखते है।नवरात्रों मे देश विदेश से लाखों श्रद्धालु माता रानी के इन मंदिरो मे अपनी मन्नत मांगने व शीश झुकाने आते है।

1.भोजावाली देवी मंदिर

भिवानी के रोहतक गेट से नया बाजार को जाने वाले रास्ते पर स्थित माता भोजावाली मंदिर भिवानी ही नहीं अपितु देश के कोने कोने सहित विदेशों मे भी अपनी प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है।नवरात्रों के दिनों मे मंदिर मे श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमडता है। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां देवी की प्रतिमा विभिन्न रूप बदलती है, ये हम नहीं कह रहे, बल्कि यहां बरसों से आ रहे श्रद्धालु ये सब बयां कर रहे हैं।

◆ मूर्ति अपनी जगह से नहीं हिली

भिवानी की ऐतिहासिक धरोहरों में एक भोजावाली देवी मंदिर की खासियतें अगर आप जानेंगे तो शायद विश्वास ना कर पाएं मगर यहां आने वाले हर श्रद्धालु के आने की वजह इस मंदिर की ये खासियतें ही हैं। किंवदंतियों के अनुसार जिस जगह पर सात सौ साल पूर्व ये मंदिर बनाया गया वहां झाड़ झंखाड़ थे। एक मूर्ति राजस्थान ले जाने के लिए कहीं से लाई जा रही थी तो रात्रि विश्राम के लिए मूर्ति ले जाने वाले यहां रूके व अगले दिन जब जाने लगे तो मूर्ति अपनी जगह से नहीं हिली। लाख कोशिशों के बावजूद मूर्ति नहीं हिली। थक – हारकर मूर्ति को वहीं स्थापित करना पड़ा।

◆ प्रतिमा से आंसू निकलते है

मंदिर के पुजारी व अन्य की मानें तो मूर्ति की खासियत यह है कि इसकी नाक बिंधी हुई है जो कि शायद ही हिंदुस्तान में कहीं होगी। वही मूर्ति की आंख से आंसू निकलते है तो मूर्ति को पसीने भी आते हें। इसकी वजह ये बताई जा रही है कि भीड़ को माता महसूस करती है तथा इसी वजह से प्रतिमा को भी पसीने आते हैं। वही माता की प्रतिमा नवरात्रों में 9 दिन नये-नये रूप बदलती है, ऐसा श्रद्धालुओं का मानना है।

  1. देवसर धाम,भिवानी

भिवानी शहर से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव देवसर मे पहाडी पर मां भवानी का विशाल मंदिर बना हुआ है।देवसर धाम के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर मे भारतवर्ष से और विदेशों से भक्तगण अपनी मन्नतें मांगने देवसर धाम में आते हैं और यहां आकर भक्तों की सारी मन्नतें पूरी होती हैं। मंदिर के प्रति आस्था और विश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मंदिर में नवरात्रों के मौके में श्रद्धालुओं की गिनती हजारों में नहीं लाखों में होती है। अपनी मन्नतों को लेकर श्रद्धालु जहां वाहनों, पैदल यहा तक कि कई श्रद्वालु पेट के बल लुढ़क- लुढ़क कर मां के दर्शन करने पहुंचते है। इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां उनकी हर मुराद पूरी होती है।

◆ आठ सौ साल पुराना है देवसर धाम का इतिहास

कहा जाता है कि करीब आठ सौ साल पहले पहाड़ी के पास से एक बंजारा जब अपनी गऊएं लेकर जा रहा था तो उसकी गऊएं कहीं खो गई। रात को सपने में उसे देवी मां ने दर्शन दिए तथा कहा कि पहाड़ी पर दबी प्रतिमा को स्थापित करवाया जाए तो उसकी गाएं मिल जाएंगी। बंजारे ने ऐसा ही किया तथा उसकी सभी गऊएं भी मिल गई। तब से माता की वह प्रतिमा मंदिर में ही है। देवसर माता के मंदिर में पांच सौ एक अखंड ज्योत नौ दिन लागतार जलती रहती है। माता के मंदिर में न केवल हरियाणा से बल्कि देशभर के विभिन्न हिस्सों से भक्त माथा टेकने आते हैं। यही नहीं नेपाल सरीखे देशों से भी श्रद्धालु इस पहाड़ी माता के मंदिर में दर्शनार्थ के लिए आते हैं।

  1. पहाडी माता मंदिर, पहाडी

जिला हेड क्वार्टर भिवानी से 50 किलोमीटर दूर लोहारू हलके के गांव पहाडी में स्थित पहाड़ी माता देवी मंदिर और इसके प्रति गहरी आस्था ने गांव पहाड़ी को देशभर ही नहीं विदेशों में भी पहचान पाई है। गांव पहाड़ी की ऊंची पहाड़ी पर स्थित पहाड़ी माता का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

◆ अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने लिया था आश्रय

गांव पहाड़ी के पहाड़ पर स्थित प्रसिद्ध पहाड़ी माता मंदिर है जो कि करीब 850 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पांडव भी अज्ञातवास के दौरान यहां से निकलते समय माता के दर्शनों के लिए ठहरे थे। पहाड़ी माता मंदिर की मान्यता इस कदर है कि नवरात्रों के दौरान देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं। हजारों श्रद्धालु प्रत्येक वर्ष नवरात्रों के समय अलग-अलग राज्यों से पैदल जत्थे के रूप में पहाड़ी माता पहुंचते हैं वहीं श्रद्धालु कोलकाता, दिल्ली, आसाम, सिलीगुड़ी, गोवा, बैंगलुरू से छपारिया, काजड़िया, नकीपुरिया परिवारों के भक्तजन माता दर्शन को पहुंचते हैं।

◆ नवविवाहित जोड़े की धोक और बच्चों के मुंडन के लिए उमडती है भारी भीड

खास बात यह है कि माता के चरणों में सबसे अधिक धोक लगाने नवविवाहित जोड़े आते हैं। बच्चों के प्रथम मुंडन के लिए भी भीड़ उमड़ती है। राजस्थान की सीमा से सटे लोहारू आसपास के क्षेत्र के गांवों में कुलदेवी के रूप में पहाड़ी माता की मान्यता है। पहाड़ी माता अतिथि सदन के कर्मचारी ईश्वर सिंह ने बताया कि मंदिर परिसर में ही बाहर से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सभी सुख-सुविधाओं से युक्त करीब 45 धर्मशालाएं बनी हुई हैं। जहां पर चाय, पानी, नहाने, धोने, खाने, पीने के लिए सेठ लोगों ने व्यवस्था कर रखी हैं सभी सुविधाएं श्रद्धालुओं को निशुल्क मुहैया कराई जाती है। करीब 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना है । नवरात्र के अवसर पर प्रतिवर्ष लाखों लोग देशभर से यहां माता के चरणों में शीश नवाने के लिए आते हैं। गांव में स्थित 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर माता की भव्य प्रतिमा भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु माता के मन्दिर में मनोकामनाएं लेकर आते हैं, उनकी मनोकामनाएं माता के दर्शन से पूरी हो जाती हैं। जो श्रद्धालु एक बार पहाड़ी माता के दर्शनों के लिए आता है, वह सदैव के लिए माता का भक्त बन जाता है तथा माता उसकी रक्षा करती है। उन्होंने बताया कि एक उल्लेख के अनुसार दिल्ली के तोमर वंश के राजा पहाड़ी माता की पूजा व आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां आते थे।

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