अमेठी बनाम कलावती – ब्रजेश कुमार झा

अमरावती की दलित गरीब महिला कलावती और अमेठी की दलित गरीब महिला शकुंतला की कहानी राहुल गांधी की सियासी मार्केटिंग को समझने का माध्यम है। राहुल ने संसद में…

untitled1अमरावती की दलित गरीब महिला कलावती और अमेठी की दलित गरीब महिला शकुंतला की कहानी राहुल गांधी की सियासी मार्केटिंग को समझने का माध्यम है।

 

राहुल ने संसद में अमरावती क्षेत्र में रहने वाली गरीब महिला कलावती का किस्सा मार्मिक ढंग से बयान किया था। लेकिन, स्वयं उनके संसदीय क्षेत्र में रहने वाली गरीब दलित महिला शकुंतला उन्हें कभी याद नहीं आई। जबकि कलावती के घर वे बिजली पहुंचवा चुके हैं।

 

दलितों की झोपड़ी में ठहर कर सियासी मार्केटिंग का फार्मूला उन्होंने कहां से सीखा है। इसका सच तीन दशक पीछे लौटकर ही बेहतर समझा जा सकता है। साथ ही अमेठी की गरीब दलित शकुंतला की कहानी बाकी सच बयां करती है। 27 दिसंबर 1970 को इंदिरा गांधी ने लोकसभा भंग कर फरवरी 1972 के अपने नियत कार्यकाल से 1 वर्ष पहले ही चुनाव कराने का निर्णय लिया। चुनाव में उनके विरोधियों ने इंदिरा हटाओ का नारा दिया। दूसरी तरफ इंदिया गांधी ने इससे अगल गरीबी हटाओ जैसा अधिक असरदार नारा दिया।

 

जनता ने इंदिरा गांधी की बातों पर विश्वास किया और कांग्रेस को चुनाव में भारी जीत दिलाई। पार्टी को लोकसभा के 518 सीटों में से 352 स्थान प्राप्त हुए। जनता ने पार्टी को वह दो-तिहाई बहुमत प्रदान किया, जिससे सरकार को संविधान में संशोधन करने के लिए भी किसी का मुंह नहीं देखना पड़ता। इंदिरा गांधी को जनता ने भारतीय राजनीति में वर्चस्वकारी स्थिति में पहुंचा दिया।

 

लेकिन अब करीब चालिस वर्ष बाद इंदिरा गांधी और सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी झूठी साबित हो रही है। देश की करोड़ों आबादी गरीबी रेखा से नीचे अपना जीवन काट रही है। ऐसा मालूम पड़ता है कि गांधी परिवार के शाहजादे राहुल गांधी को भी देश की जनता से किया गया अपनी दादी मां का वादा संभवतः याद नहीं है। वे देश के नए मतदाताओं व युवा पीढ़ी को अपनी दादी मां का जुम्ला नए तरीके से पढ़ाते हुए एक तीर से दो निशाना साधने में लगे हैं। पहला गरीबों का मसिहा बनकर उन्हें प्रभावित करने की जुगत में हैं। साथ ही अपने राजनीति विरोधियों को पछाड़ने का काम कर रहे हैं। इसलिए कभी अमरावती तो कभी बुंदेलखंड की गरीबी उन्हें नजर आती रही।

 

उन्हें अमेठी की गरीब महिला शकुंतला कभी याद नहीं आई।  हालांकि, प्रहार नाम की एक संस्था और अचलपुर (अमरावती) के निर्दलीय विधायक बच्चू कुडू ने अमेठी पहुंचकर राहुल गांधी के सच को उजागर कर दिया है। गत 25 फरवरी को अमेठी में बच्चू कुडू और प्रहार के सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने दिन भर श्रमदान कर गरीब शकुंतला के लिए एक छोटे से घर का निर्माण किया। इस कार्य में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक के.एन. गोविंदाचार्य ने भी भाग लिया।

 

इस श्रमदान के माध्यम से बच्चू ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि देश के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवार तीन दशकों से अमेठी के लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसके बावजूद वहां के दलितों की स्थिति और गरीबी दहलाने वाली है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि देश की दशा सुधारने का दम भरने वाले स्वयं अपने क्षेत्र यानी अमेठी के लिए अब तक क्या कर सके ?

 

बच्चू ने कहा कि राहुल कभी कलावती की खोज तो कभी दलित सुनीता और शिव कुमारी के झोपड़े में रुक कर अपनी सियासी मार्केटिंग कर रहे हैं। इससे किसी का कोई भला नहीं होगा। यदि सचमुच कुछ करना है तो केंद्र को कोई ठोस नीति बनानी चाहिए।

 

यहां एक जनसभा में देश के विकास की बात करने वाले लोगों को आड़े हाथों लेते हुए गोविंदाचार्य ने कहा कि दुनिया के दस धन कुबेरों में चार भारतीयों के शामिल होने पर इतराने वाले लोग यह क्यों नहीं समझते कि देश के छह करोड़ लोगों के पास अपना सिर छुपाने के लिए झोपड़ी तक नहीं है।

 

 

प्रहार के कार्यकर्ताओं ने हाथ में फावड़े-तसले लिए अमेठी में श्रमदान कर वहां के विकास की असलियत सामने लाने की कोशिश की है। प्रहार के तमाम होर्डिंग अमेठी में लगे हैं, जो एक तरफ विकास का दम भरने और दूसरी तरफ गरीबी के नाम पर सियासी मार्केटिंग करने वाले राहुल गांधी का मुंह चिढ़ा रही है। ऐसा मालूम पड़ता है कि वे एक बार फिर गरीबों का मसिहा बनकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि गत 40 वर्षों में देश की जनता ने अपने राजनेताओं के आचरण से बहुत कुछ सीखा व सबक लिया है।

 

brajesh-4-copyलेखक: ब्रजेश कुमार झा

 स्वतंत्र पत्रकार

मो.: 9350975445
ईमेल: jha.brajeshkumar@gmail.com

9 thoughts on “अमेठी बनाम कलावती – ब्रजेश कुमार झा

  1. ब्रजेश जी सही घटना का जिक्र किया है। लेकिन, राहुल गांधी को आईना दिखाना भी राजनीति का दूसरा पक्ष है।

  2. ब्रजेश जी ने अपने लेख में जिन घटनाओं का जिक्र किया है, दोनों ही राजनीति से प्रेरित है। गोविंदाचार्य का अमेठी जाना उसी का हिस्सा मालूम पड़ता है। लेकिन, झूठ को आईना दिखाने के लिए उन्होंने जो किया वह सही है।

  3. राहुल गांधी को आत्म परिक्षण करना चाहिए। अच्छा लेख है।

  4. कांग्रेस अपनी परंपरा का ही निर्वाह कर रही है।

  5. बहुत सही लिखा है आपने। सलाहकारों के बल पर ऐसी ही राजनीति की जा सकती है। उम्मीद है राहुल अपनी समझ का भी इस्तेमाल करेंगे।

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