लेखक परिचय

डॉ. मुनीश रायजादा

डॉ. मुनीश रायजादा

लेखक शिकागो स्थित शिशुरोग विशेषज्ञ हैं और एक सामाजिक-राजनीति विश्लेषक हैं।

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चंदा बंद सत्याग्रह (नो लिस्ट: नो डोनेशन) के संयोजक, डॉ. मुनीश रायज़ादा ने हाल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अमित शाह द्वारा भाजपा की राजनैतिक फंडिंग का जून के अंत तक पूर्णतया कैशलेस होने की घोषणा का अभिनन्दन किया है।
टाइम्स नाउ को दिए एक साक्षात्कार में श्री शाह ने कहा कि भ्रष्टाचार की जड़ अवैध तरीकों से करी गयी राजनैतिक अनुदानों में बसी हुई है। अगर भ्रष्टाचार मिटाना है तो इसकी शुरूआत राजनैतिक अनुदानों में पारदर्शिता लाने से करनी होगी। एक चर्चा के दौरान उठे सवाल की ‘क्या राजनैतिक पार्टियों को आर.टी.आई. के कानून में शामिल करना चाहिए’पर शाह ने इस बात से सहमति जताई की राजनैतिक पार्टियों को आर.टी.आई. के दायरे में आना ही चाहिए।
डॉ रायज़ादा ने श्री शाह के बयानों की सराहना करते हुए कहा की भ्रष्टाचार पर नियंत्रण एवं काले धन पर अंकुश लगाने के लिए तात्कालिक सख्त प्रावधानों की आवश्यकता है।
अगर भाजपा आने राजनैतिक अनुदानों को पूर्णतया कैशलेस करती है तो वह भविष्य में सभी राजनैतिक पार्टियों के लिए एक नैतिक उदाहरण स्थापित करेगी।
रायज़ादा – जो २ सप्ताह के लिए अमेरिका गए हुए हैं -आगे कहते हैं की अनियमित, अघोषित और अपारदर्शी राजनैतिक अनुदान ही भ्रष्टाचार की जड़ है, और अब समय आ गया है की इसकी कार्यप्रणाली में पर्याप्त सुधार किये जाएँ।
रायज़ादा वर्तमान में आम आदमी पार्टी से एक आतंरिक लड़ाई लड़ रहे हैं। वे दिसम्बर 2016 से ही पार्टी के खिलाफ चल रहे चंद बंद सत्याग्रह (नो लिस्ट: नो डोनेशन) का नेतृत्व कर रहे हैं। सत्याग्रह दिल्ली में वर्तमान में चल रहा है.
इस सत्याग्रह का उद्देश्य आम आदमी पार्टी के अंदर पनप रहे भ्रष्टाचार को जनता के समक्ष लाना है। साथ ही यह अनुरोध करना है की तब तक आम आदमी पार्टी को वित्तीय सहयोग ना दें जब तक पार्टी अपने दानकर्ताओं की लिस्ट को सार्वजनिक नहीं कर देती।

 

आम आदमी पार्टी ने राजनीति में प्रवेश इस निश्चय के साथ किया था की वह अपने राजनैतिक फंडिंग में 100 % पारदर्शिता रखेगी। परंतु बीते वर्ष, जून 2016 से पार्टी ने अपनी वेबसाइट से दानकर्ताओं की सूची को हटा दिया है। रायज़ादा का कहना है की दानकर्ताओं की लिस्ट छुपा कर आम आदमी पार्टी का चंदाचोर गैंग न केवल  जनता को गुमराह कर रहा है, बल्कि वह अपने स्वयं के सिद्धांतों का भी उल्लंघन कर रहा है।
चंदा बंद सत्याग्रह इस तथ्य को बार बार दोहराना चाहता है की भारत में राजनैतिक दलों को दिए अनुदानों में पारदर्शिता लाने की संभावना बहुत प्रबल है, ज़रूरत है तो सिर्फ एक राजनितिक मंशा की। साथ ही, केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से यह अनुरोध है की वह चुनाव सुधार कानून के माध्यम से इस दिशा में एक परिपक्व कदम उठाये।

संपर्क: डॉ मुनीश रायजादा

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