दुश्मनों पर बेरहम साबित होता है अपाचे

अपाचे है दुनिया का सबसे आधुनिक और घातक हेलिकॉप्टर

योगेश कुमार गोयल

            भारतीय वायुसेना को अमेरिकी एयरोस्पेस कम्पनी ‘बोइंग’ से खरीदे गए सभी 22 अपाचे हेलीकॉप्टर मिल गए हैं, जिसके साथ वायुसेना की ताकत काफी बढ़ गई है। ढ़ाई अरब डॉलर का यह रक्षा सौदा सितम्बर 2015 में हुआ था। इन हेलीकॉप्टरों की पहली खेप गत वर्ष 27 जुलाई को गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर पहुंची थी, जिन्हें पठानकोट एयरबेस पर तैनात कर दिया गया था। एएच-64ई अपाचे गार्जियन अटैक हेलीकॉप्टर दुनिया के सबसे खतरनाक हेलीकॉप्टरों में शामिल है। बोइंग द्वारा निर्मित अपाचे दुनिया का सबसे आधुनिक और घातक हेलिकॉप्टर माना जाता है, जो ‘लादेन किलर’ के नाम से भी विख्यात है। यह अमेरिकी सेना तथा कई अन्य अतंर्राष्ट्रीय रक्षा सेनाओं का सबसे एडवांस मल्टीरोल कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है, जो एक साथ कई कार्यों को अंजाम दे सकता है। अमेरिकी सेना अपने कई मिशनों में इसका इस्तेमाल कर चुकी है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, सिंगापुर, इजरायल, नीदरलैंड, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, मिस्र, ग्रीस, सऊदी अरब, कतर के अलावा कुछ अन्य देशों की सेनाएं भी इसका इस्तेमाल कर रही हैं। भारत दुनिया का 14वां ऐसा देश है, जिसने अपनी सेना के लिए इसका चयन किया है। वर्तमान में चीन के साथ विवाद के दौर में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका देखी भी गई है।

            अफगानिस्तान के संवेदनशील इलाकों में पांच वर्षों तक अपाचे हेलिकॉप्टर उड़ा चुके ब्रिटिश वायुसेना में पायलट रहे एड मैकी का कहना है कि अपाचे दुनिया की सबसे परिष्कृत किन्तु घातक मशीन है, जो दुश्मनों पर बहुत बेरहम साबित होती है। मैकी के मुताबिक किसी नए पायलट को अपाचे उड़ाने के लिए कड़ी ट्रेनिंग लेनी होती है और सेना को एक पायलट की ट्रेनिंग पर 30 लाख डॉलर तक खर्च करने पड़ सकते हैं। मैकी बताते हैं कि 16 फुट ऊंचे और 18 फुट चौड़े अपाचे को दो पायलट मिलकर उड़ाते हैं। मुख्य पायलट पीछे बैठता है, जिसकी सीट थोड़ी ऊंची होती है, वही हेलीकॉप्टर को नियंत्रित करता है जबकि आगे बैठा दूसरा पायलट निशाना लगाता है और फायर करता है। वह बताते हैं कि अपाचे का निशाना बहुत सटीक है, जिसका सबसे बड़ा फायदा युद्ध क्षेत्र में होता है, जहां दुश्मन पर निशाना लगाते समय आम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचता। यह सिर्फ दुश्मन पर हमला करने में ही नहीं अपितु सर्जिकल ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में भी वायुसेना के लिए बहुत मददगार साबित होता है। अपाचे युद्ध के मैदान में केवल दुश्मन के परखच्चे ही नहीं उड़ाता बल्कि युद्धस्थल की तस्वीरें खींचकर उन्हें अपने एयरबेस पर ट्रांसमिट भी कर देता है।

            अपाचे के बड़े विंग को चलाने के लिए इसमें दो इंजन फिट हैं, जिस कारण इसकी रफ्तार बहुत ज्यादा है। इसमें भारतीय वायुसेना की जरूरत के मुताबिक अपेक्षित बदलाव किए गए हैं। यह एक ऐसा अग्रणी बहुउद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जो दुश्मन की नाक के नीचे किसी भी मिशन को पूरा करने में सक्षम है। इसमें सटीक मार करने और जमीन से उत्पन्न खतरों के बीच प्रतिकूल हवाईक्षेत्र में परिचालित होने की अद्भुत क्षमता है। इसे छिपकर वार करने के लिए जाना जाता है, इसीलिए इसका इस्तेमाल दुश्मन के इलाके में आसानी से घुसने में भी किया जाता है। जमीन के काफी करीब उड़ान भरने, हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलों और बंदूकों से लैस, एक मिनट में 128 टारगेट निशाना बनाने, आसानी से टारगेट डिटेक्ट करने, रात में भी आसानी से कहीं भी जाने, किसी भी मौसम में उड़ान भरने, तथा दुश्मन के रडार को आसानी से चकमा देने जैसी अनेक खूबियों से लैस अपाचे पहली बार वर्ष 1975 में आसमान में उड़ान भरता नजर आया था, जिसे 1986 में अमेरिकी सेना में शामिल किया गया था।

            अपाचे का डिजाइन कुछ ऐसा है कि यह युद्ध क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में टिका रह सकता है और आसानी से दुश्मन की किलेबंदी को भेदकर उसके इलाके में बहुत सटीक हमले करने में सक्षम है। 280 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से उड़ने में सक्षम यह हेलीकॉप्टर तेज गति के कारण बड़ी आसानी से दुश्मन टैंकों के परखच्चे उड़ा सकता है। बहुत तेज रफ्तार से दौड़ने में सक्षम इस हेलीकॉप्टर को रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल है। यह बगैर पहचान में आए चलते-फिरते या रूके हुए लक्ष्यों को आसानी से भांप सकता है। यह किसी भी मौसम या किसी भी स्थिति में दुश्मन पर हमला कर सकता है और नाइट विजन सिस्टम की मदद से रात में भी दुश्मनों की टोह लेने, हवा से जमीन पर मार करने वाले रॉकेट दागने और मिसाइल आदि ढ़ोने में सक्षम है। टारगेट को लोकेट, ट्रैक और अटैक करने के लिए इसमें लेजर, इंफ्रारेड, सिर्फ टारगेट को ही देखने, पायलट के लिए नाइट विजन सेंसर सहित कई आधुनिक तकनीकें समाहित की गई हैं।

            अपाचे एक बार में पौने तीन घंटे उड़ सकता है और इसकी फ्लाइंग रेंज करीब 550 किलोमीटर है। इसमें 360 डिग्री तक घूम सकने वाला अत्याधुनिक फायर कंट्रोल रडार तथा निशाना साधने वाला सिस्टम लगा है। दो जनरल इलैक्ट्रिक टी-700 हाई परफॉरमेंस टर्बोशाफ्ट इंजनों से लैस इस हेलीकॉप्टर में आगे की तरफ एक सेंसर फिट है, जिसके चलते यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। इसका सबसे खतरनाक हथियार है 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता। दरअसल इसमें हेलिफायर, स्ट्रिंगर मिसाइलें, 70 एमएम हाइड्रा एंटी ऑर्मर रॉकेट्स लगे हैं और मिसाइलों के पेलोड इतने तीव्र विस्फोटकों से भरे होते हैं कि दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन होता है। इसके वैकल्पिक स्टिंगर या साइडवाइंडर मिसाइल इसे हवा से हवा में हमला करने में सक्षम बनाते हैं। अपाचे हेलीकॉप्टर के नीचे दोनों तरफ 30 एमएम की दो ऑटोमैटिक राइफलें भी लगी हैं, जिनमें एक बार में शक्तिशाली विस्फोटकों वाली 30 एमएम की 1200 गोलियां भरी जा सकती हैं। इसका सबसे क्रांतिकारी फीचर है इसका हेल्मेट माउंटेड डिस्प्ले, इंटीग्रेटेड हेलमेट और डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम, जिनकी मदद से पायलट हेलिकॉप्टर में लगी ऑटोमैटिक एम-230 चेन गन को अपने दुश्मन पर टारगेट कर सकता है। 17.73 मीटर लंबे, 4.64 मीटर ऊंचे तथा करीब 5165 किलोग्राम वजनी इस हेलीकॉप्टर में दो पायलटों के बैठने की व्यवस्था है। इसका अधिकतम भार 10400 किलोग्राम हो सकता है। डेटा नेटवर्किंग के जरिये हथियार प्रणाली से और हथियार प्रणाली तक, युद्धक्षेत्र की तस्वीरें प्राप्त करने और भेजने की इसकी क्षमता इसकी खूबियों को और भी घातक बना देती है।

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