अरब का खलीफा शासन

—विनय कुमार विनायक
जीते जी मुहम्मद पैगम्बर थे-
कानून निर्माता, न्याय कर्ता,
सेनापति, ईश्वर के प्रतिनिधि
एक बहुआयामी हस्ती!

उन्होंने मदीना को सत्ता केन्द्र बना
वर्ग-वंश का भेद मिटा संगठित किया
अरब की जीर्ण कबिलाई बस्ती!

धार्मिक आदर्शवाद और शरीयत पर आधृत
उनके ईश्वरीय गणराज्य का खुदा बादशाह
जिनका वे सुन्ना थे
(सुन्ना यानि ईश्वर का प्रतिनिधि शासक)
वर्ग विशेषाधिकार विहीन वंशवाद विरोधी
सुन्ना हुए ईश्वर के प्रतिनिधि रुप में सत्तासीन
किन्तु राज्य उतराधिकार प्रथा के प्रति
वे रहे सर्वदा उदासीन!

ईस्वी सन् छः सौ बत्तीस में उनकी मौत के बाद
सर्वसम्मतिवश अबू बकर बना खलीफा
ईश्वर के प्रतिनिधि का प्रतिनिधि
तब से चली खिलाफत की यह नयी विधि!

फिर छः सौ चौंतीस से छः सौ चवालीस ईस्वी तक
दस साल उमर हुआ खलीफा बहाल!

फिर छः सौ चवालीस से छः सौ छप्पन ईस्वी तक
उस्मान की खलीफा रूप में रही शान!

छः सौ छप्पन से छः सौ बासठ ईस्वी तक
अली बना खलीफा,जिसकी राजधानी मदीना नहीं,
थी बेबीलोन के निकट कूफा!

शरा के अनुसार खलीफा का शाब्दिक अर्थ होता-
‘प्रतिनिधि खुदा का’ पर व्यवहार में यह उपाधि दी गई
उनको जो-‘प्रतिनिधि/उतराधिकारी थे पैगम्बर का’
इस्लाम नहीं मानता वंशवादी पादशाहत राजसंस्था,
जहाँ खुदा पर एकमात्र आस्था
जहाँ खुदा ही एकमात्र बादशाह
वहाँ खलीफा द्वारा मनोनीत व्यक्ति
चलाता इस्लामी राज व्यवस्था।

ऐसे ही चल निकला खिलाफत
जिसने पहली बार झेला आफत
जब खलीफा था उस्मान
पक्षपाती और विरोधी भाव युक्त
हो गए मुसलमान
ईस्वी सन्. छः सौ बासठ में
मुबयिआ ने विद्रोह किया
खलीफा अली को जान से मार
उनके पुत्र हसन को करके दरकिनार
उमय्या खिलाफत का नींव दिया।

मुबयिआ से ही खिलाफत
पादशाहत में बदला
और चला उतराधिकार प्रथा
तब तथाकथित ईश्वरीय राज्य
लौकिक राज्य में ढला!

बना मुबयिआ मलिक या
इतिहास का प्रथम शासक!
वंशवाद का संस्थापक
सौंपा पुत्र याजिद को उतराधिकार
चला वंश उमय्या का सत्ताधिकार
(छः सौ बासठ से सात सौ अडतालीस तक।

उमय्याओं के अति केन्द्रित शासन ने
अफगानिस्तान, बिलोचिस्तान मध्य एशिया
एवं भारतीय सिन्ध राज्य तक
विस्तृत किया मुस्लिम साम्राज्य!

ईस्वी सन छः सौ बाईस में उद्भूत
नव इस्लामी राज्य सात सौ अड़तालीस तक
अरब, इराक, सीरिया, फारस तथा
उत्तरी अफ्रीका तक जा फैला अति द्रुत।

जब आया आठवीं शती का मध्यकाल
उठा खुरासान में एक भूचाल
उमय्या वंश जिससे उजड़ा,
अब्बासी वंश सत्ता से जुड़ा
(749 ई.से 890 ई.तक)!

अब्बासी थे हजरत मुहम्मद के
चाचा अब्बास के वंशधर
जिन्होंने ईरानियों और शिया के
सहयोग से सियासत पाया
दमिश्क छोड़ बगदाद में
नयी राजधानी बसाया।

पूरा अब्बासी काल
749 ईस्वी से 900 ई.तक शांति
और समृद्धि के लिए ख्यात,
किन्तु इस्लाम में नव दीक्षित तुर्कों ने
इसी खिलाफत पर किया था आघात।

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