सावधान ! जयचंद के षडयंत्र जारी हैं

राकेश कुमार आर्य
हम अक्सर यह कहते हैं कि — मेरा भारत महान और सचमुच ही मेरा भारत महान है । आइए , अपने भारत महान के बारे में कुछ विदेशी विद्वानों के विचारों पर दृष्टिपात करते हैं । भारतीय तत्वज्ञान के स्रोत उपनिषदों को लेकर विदेशी विद्वानों का कौतूहल और जिज्ञासा प्रारंभ से ही रही है । अनेकों विद्वानों ने विश्व के कोने कोने से आकर हमारे उपनिषदों का अध्ययन किया और लाभ अर्जित करने के उपरांत जीवन को बहुत ही शांत और निर्भ्रान्त बनाने में सफलता प्राप्त की। उपनिषदों पर आर्थर शोपेनहोवर ने बहुत सुंदर कहा है। वे लिखते हैं कि – ” देशभर में ऐसा कोई अध्ययन नहीं है , जो उपनिषदों जितना हितकारी और उदात्त हो । यही मेरे जीवन को शांति देता रहा है और वही मृत्यु में भी शांति देगा। ” भारत के वेद भी विदेशी विद्वानों को बहुत ही आत्मिक शांति देते रहे हैं । जिन जिन लोगों ने वेदों का अमृतमयी सोमरस पीकर अपने लिए अमरत्व का साधन संजोया उन सभी ने वेदों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है । हेनरी डेविड थोरो ने भारत की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि : — ” वेदों का जो सार मैंने पढ़ा है , वह मेरे लिए अति उच्च और अति शुद्ध ज्योतिर्मय पिंड के प्रकाश जैसा है , जो उन्नत मार्ग को बिना किसी जटिलता के सरल और सार्वभौम तरीके से समझाता है। वह मेरे लिए तारों भरी रात्रि में सुदूर आकाश से आने वाले चंद्रमा के प्रकाश जैसा है । ” जब उपनिषदों और वेदों की प्रशंसा की बात आती है तो गीता भी अपने आप को पीछे कैसे रख सकती है ? गीता का भी विदेशी विद्वानों ने अमृतरस निचोड़ कर पिया है और आनंद लाभ प्राप्त कर भारत के इस महान ग्रंथ की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। गीता के बारे में डेविड थोरोने ही कहा है कि – प्रातः काल मैं अपनी बुद्धिमत्ता को पूर्व और ब्रह्मांडव्यापी गीता के तत्व ज्ञान से स्नान कराता हूं । जिसकी तुलना में हमारा आधुनिक विश्व और उसका साहित्य अत्यंत क्षुद्र एवम तुच्छ जान पड़ता है । इसी प्रकार गीता के बारे में गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स ने कहा था कि भारत में गीता जैसे तत्व ज्ञान के संदेश तब भी जीवित रहेंगे जब अंग्रेजों के साम्राज्य का अस्तित्व भारत में से बहुत पहले ही नष्ट हो चुका होगा तथा संपत्ति और सामर्थ्य द्वारा उन्होंने प्राप्त किये हुए स्रोत काल स्मृति में नष्ट हो चुके होंगे ।गीता पर ऑलडस हक्सले ने भी बड़ा सुंदर कहा है ।वह कहते हैं कि :– स्थाई दर्शन का सुस्पष्ट एवं सर्वस्य सार है गीता । अतः इसका चिरंतन मूल्य न केवल भारतीयों के लिए अपितु समूची मानव जाति के लिए है।’ जबकि विलहन हंबोल्ट ने गीता के विषय में कहा है कि : — ‘ गीता एक अत्यंत सुंदर और संभवतः एकमात्र सच्चा दार्शनिक गीत है जो किसी अन्य भाषा में नहीं। वह एक ऐसी गहन एवं उन्नत वस्तु है जिस पर सारी दुनिया गर्व कर सकती है। ‘राल्फ वाल्डो एमरसन ने भी गीता के बारे में बहुत सुंदर कहा है वे लिखते हैं कि : — ‘ मैं भगवत गीता का अत्यंत ऋणी हूं। यह पहला ग्रंथ है जिसे पढ़कर मुझे लगा कि किसी विराट शक्ति से हमारा संवाद हो रहा है। इसमें क्षुद्रता और अनुपयुक्तता से परे उच्चतम प्रज्ञा की स्पष्ट शीतल तर्कशुद्ध ध्वनि है । जिसकी हुंकार बीते युग एवं माहौल की होते हुए भी वर्तमान समस्याओं का निदान एवं उपाय बताने में पूरी तरह सक्षम है।’भारत एवं हिंदुत्व के बारे में विदेशी विद्वान इसी प्रकार की टिप्पणियां अपने निष्कर्षों के रूप में करते रहे हैं। जिससे भारतीय संस्कृति की महानता और विशालता का बोध हमें सहज रूप में ही हो जाता है । इसी प्रकार की एक टिप्पणी एनी बेसेंट ने भी की है । वह कहती हैं कि वह भारत एवं हिंदुत्व से बहुत प्रभावित हैं। इसलिए उन्होंने लिखा : – ‘ विश्व के विभिन्न धर्मों का लगभग 40 वर्ष अध्ययन करने के पश्चात मैं इस नतीजे पर पहुंची हूं कि हिंदुत्व जैसा परिपूर्ण वैज्ञानिक दार्शनिक एवं आध्यात्मिक धर्म और कोई नहीं । इसमें कोई भूल न करें कि बिना हिंदुत्व के भारत का कोई भविष्य नहीं हिंदुत्व ऐसी भूमि है , जिसमें भारत की जड़ें गहराई तक पहुंची हैं । उन्हें उखाड़ा गया तो यह वृक्ष निश्चय ही अपनी भूमि से उखड़ जाएगा । हिंदू ही यदि हिंदुत्व की रक्षा नहीं करेंगे तो और कौन करेगा ? – अगर भारत के सपूत हिंदुत्व में विश्वास नहीं करेंगे तो कौन उनकी रक्षा करेगा ? भारत ही भारत की रक्षा करेगा , भारत और हिंदुत्व एक ही हैं । ‘अभी अमेरिका की ओर से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आ रही है । जिसमें कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश को मिलाकर एक देश बनाने की तैयारियां की जा रही हैं । यदि यह रिपोर्ट अपने आप में सच है और ऐसी तैयारियां हो रही हैं तो निश्चय ही अपने भारत के भविष्य को लेकर हिंदू ही सबसे अधिक सक्रिय होना चाहिए । पश्चिम बंगाल में हमारे देश से प्रेम करने वाले लोगों के साथ जो कुछ इस समय हो रहा है वह बहुत ही दुखद और चौंकाने वाला है । वहां पर चुनाव इस समय निश्चित रूप से राष्ट्रवाद और आतंकवाद के बीच हो रहा है । जो लोग देश के विरोध में जाकर नया देश बनाने की तैयारी में लगे हैं , लोगों को उन्हें इस समय सबक सिखाने की आवश्यकता है। एनी बेसेंट के शब्दों पर विचार नहीं अपितु इस समय क्रियान्वयन होना चाहिए कि हिंदू ही हिंदू को बचाएगा , हिंदू ही भारत को बचाएगा और हिंदू ही हिंदुत्व को बचाएगा । जो लोग किसी वाद में या पार्टी की विचारधारा के साथ बंधकर देश के साथ न रहकर दूसरी तरफ जा रहे हैं , उन्हें अपनी भूमिका पर विचार करना होगा और हमारे देश के बारे में उपरोक्त विद्वानों की दी गई टिप्पणियों पर विचार कर अपने हिंदुत्व की और अपनी संस्कृति की रक्षा करने के लिए आगे आना होगा।पिछले 70 वर्ष से जिन लोगों ने अपने देश की संस्कृति , इतिहास , धर्म और उन मानवीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ घृणास्पद उपहास करने का प्रयास किया है अब उनके प्रयास फलीभूत होने का समय आने लगा है । क्योंकि अब वह खुलकर सामने आने में कोई संकोच नहीं कर रहे हैं । इसका कारण यह है कि अब उन्हें भीतरी ‘ जयचंद ‘ का भरपूर समर्थन मिल रहा है । यही कारण है कि इस समय देश की राष्ट्रवादी शक्तियों को एक साथ आकर ‘ जयचंद ‘ के छल छंदों का सामना करना होगा । जिन विदेशी विद्वानों ने हमारे देश का गुणगान किया है , भारत के भीतर बैठे इन जयचंदों को वह गुणगान कभी रास नहीं आया । यही कारण है कि जिस दिन देश स्वतंत्र हुआ था उसी दिन से वह शक्तियां देश में सक्रिय हो गई जो या तो मुगलिस्तान बनाने का सपना ले रही हैं या देश का विभाजन कर किसी और प्रकार से देश को खंड खंड करने की तैयारियों में लगी हैं ।पश्चिम बंगाल में पड़ोसी बांग्लादेश से चुनावों के समय आतंकी नेताओं का चुनाव प्रचार के लिए आना और फिर अपने लोगों को ममता बनर्जी के लिए वोट करने के लिए कहना क्या संकेत करता है ? इसके पश्चात भारी संख्या में मतदान होना , मतदान के दौरान चुनावी हिंसा होना और ममता बनर्जी का देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन फानी जैसे तूफान के समय भी नहीं उठाना और यह कह देना कि मैं नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री नहीं मानती ?- यह सब स्थितियां हमें क्या सोचने के लिए विवश कर रही हैं ? सचमुच देश के ये सत्ता स्वार्थी नेता देश को बेचने की और टुकड़ों टुकड़ों में बांटने की साजिशों में लगे हैं । सत्ता का स्वाद एक बार यदि इनके मुंह लग जाए तो फिर यह उसे किसी भी मूल्य पर छोड़ने को तैयार नहीं होते । देश को इस प्रकार के नेताओं से मुक्त कराने का समय आ गया है । लगता है दूसरी आजादी तभी पूर्ण होगी जब देश ऐसे ‘ जयचंदों ‘ के हाथों से मुक्त होकर किसी ‘ पृथ्वीराज चौहान ‘ के हाथों में आ जाएगा।इसके लिए हमें स्वामी विवेकानंद के इन शब्दों को भी याद रखना होगा कि हिंदुत्व में भारत की जीवन शक्ति विद्यमान हैं और जब तक हिंदू जाति अपने पूर्वजों की विरासत को नहीं भूलती तब तक धरती की कोई भी शक्ति उसे नष्ट नहीं कर सकती ।समय अपने पूर्वजों की विरासत को याद करने का है। जी हां , उन्हीं पूर्वजों की विरासत , जिन्होंने इस देश की इंच इंच भूमि के लिए लड़ाई लड़ी । उन्ही पूर्वजों की विरासत जनता ने अपने राजा के न होने पर अपनी सेना खड़ी की और जनता का कोई भी वीर पुरूष उस सेना का सेनापति बन कर जाकर शत्रु से भिड़ गया। हमारा यही गौरवमयी इतिहास हमें यह बताता है कि इस समय देश के राजा की भी प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है । हर व्यक्ति अपने आप को जहां खड़ा है वही एक सैनिक समझे ,चौकीदार समझे । चौकीदार एक भावना है , एक विचार है । उस विचार को पकड़ने की आवश्यकता है।सावरकर जी ने यह शब्द ऐसे ही नहीं कह दिए थे कि राजनीति का हिंदूकरण और हिंदुओं का सैनिकीकरण होना चाहिए । उनके इन शब्दों का कोई मूल्य था और वह मूल्य केवल यही था कि राजनीति का इस प्रकार मानवीयकरण हो जिसमें राजा का प्रजावत्सल भाव कदम कदम पर झलकता हो । जबकि देश के नागरिकों अर्थात हिंदुओं का सैनिकीकरण इसलिए हो कि हर व्यक्ति जहां खड़ा है ,वहीं पर अपने आप को देश का चौकीदार या प्रहरी या सैनिक समझ कर खड़ा हो जाए। जब यह भावना जन जन में व्याप्त हो जाएगी तो देश में कोई भी ‘ जयचंद ‘ फिर एक नया पाकिस्तान बनाने या बांग्लादेश के साथ बंगाल को मिला देने की किसी भी योजना के बारे में सोच तक भी नहीं पाएगा । देश की जनता को चाहिए कि ना नरेंद्र मोदी का इंतजार करे और ना किसी दूसरे मोदी का इंतजार करे , वह स्वयं जागरूक हो जाए ,शत्रु अपने आप परास्त हो जाएगा। लेकिन यह याद रखना होगा कि शत्रु बहुत बड़ी साजिश में लगा हुआ है , अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया तो हमारा अस्तित्व मिट जाएगा । बहुत सावधानी से संभलने की आवश्यकता है।

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