दीपावली 2019 के शुभ मुहूर्त…

सम्पूर्ण विश्व में कार्तिक महिनें के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन प्रदोष काल में दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। यदि दो दिनों से अधिक समय तक अमावस्या तिथि और प्रदोष काल एक साथ न हों तो अगले दिन दिवाली मनाई जाती है। शास्त्रों मे इस मत को विशेष मान्यता दी गई है। वहीं एक और मत के अनुसार दो दिनों तक प्रदोष काल और अमावस्या न हो तो तो एक दिन पहले ही दिवाली मनानी चाहिए और यदि दिवाली के दिन अमावस्या न हो चतुदर्शी के बाद सीधे प्रतिपदा तिथि आरंभ हो जाए तो चतुदर्शी के दिन ही दिवाली मना लेनी चाहिए।  दिवाली या दीपावली हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है. यह पर्व अंधेरे पर प्रकाश की जीत, असत्य पर सत्य की जीत, बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस दिन लोग लक्ष्मी माता, गणेश जी और धन के देवता कुबेर की पूजा-अर्चना करते हैं।✍?✍?

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?सुख-समृद्धि का त्योहार है दिवाली—हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने के 15वें दिन यानी अमावस्या के अवसर पर दिवाली मनाई जाती है. दिवाली को समृद्धि और खुशियों का त्योहार माना जाता है, जिस दिन लोग अपने परिजनों के साथ घर को दीपों के साथ ही खुशियों से भी सजाते हैं और पकवान-मिठाई खाते हैं। इस दिन लोग अपने सगे संबंधियों को गिफ्ट और मिठाई बांटने के साथ ही गरीबों को भी खाना खिलाते हैं और उन्हें कपड़े देते हैं।✍?✍?

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?दीपावली का इतिहास–इस त्योहार के मनाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं हैं, जिनमें एक ये है कि जब भगवान श्रीराम लंका नरेश रावण को युद्ध में पराजित कर और उसके चंगूल से अपनी धर्म पत्नी सीता को आजाद कर 14 साल का वनवास भोग वापस अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्या के लोगों ने अपने प्रिय राम और सीता माता के स्वागत में पूरे प्रदेश को दीपों से सजाया था। तब से दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। प्रभु श्री राम की अयोध्या वापसी पर लोगों ने उनका स्वागत घी के दिये जलाकर किया। अमावस्या की काली रात रोशन भी रोशन हो गई। अंधेरा मिट गया उजाला हो गया यानि कि अज्ञानता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश हर और फैलने लगा। इसलिये दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडीत दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की दिवाली का त्यौहार जब आता है तो साथ में अनेक त्यौहार लेकर आता है। एक और यह जीवन में ज्ञान रुपी प्रकाश को लाने वाला है तो वहीं सुख-समृद्धि की कामना के लिये भी दिवाली से बढ़कर कोई त्यौहार नहीं होता इसलिये इस अवसर पर लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्यौहार दिवाली के साथ-साथ ही मनाये जाते हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक हर लिहाज से दिवाली बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है। वर्तमान में तो इस त्यौहार ने धार्मिक भेदभाव को भी भुला दिया है और सभी धर्मों के लोग इसे अपने-अपने तरीके से मनाने लगे हैं। हालांकि पूरी दुनिया में दिवाली से मिलते जुलते त्यौहार अलग-अलग नामों से मनाये जाते हैं लेकिन भारतवर्ष में विशेषकर हिंदूओं में दिवाली का त्यौहार बहुत महत्व रखता है।
पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार इस शुभ दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए स्थिर लग्न को पूजन हेतु शुभ लग्न माना जाता है। स्थिर लग्न में किया गया कोई भी काम शुभ फल ही प्राप्त कराता है। इसलिए दिवाली पूजन के लिए स्थिर लग्नों को अधिक महत्वता दी जाती है। स्थिर लग्नों में की गई पूजा कई गुना लाभ देती है। इसके अलावा अस्थिर लग्नों में कि गई पूजा का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता। अगर अस्थिर लग्नों में दिवाली के दिन मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है तो मां लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती है। जिसका कोई लाभ प्राप्ति नहीं होता। इसलिए दिवाली के दिन स्थिर लग्नों को ही प्रधानता दी गई है।इस वर्ष में (दिवाली 2019 ) के अनुसार इस बार का शुभ मुहूर्त प्रदोष काल और महालनिशीथ काल में बन रहा है। इस साल सूर्योस्त के बाद तीन मूहूर्त दिवाली पूजन के लिए अति उत्तम है। जिनमें प्रदोष काल, वृषभ काल और सांयकाल मुहूर्त अति उत्तम है। अगर आप इस दिन स्थिर लग्न में पूजा करते हैं तो आपको दिवाली पूजन का अत्याधिक लाभ प्राप्त होगा। स्थिर लग्न वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ को कहा जाता है। दिवाली के दिन मां काली की भी पूजा की जाती है। इसके लिए महानिशीथ काल का मुहूर्त सर्वाधिक उत्तम है। यह समय तांत्रिक पूजा और सिद्धि प्राप्ति के लिए विशेष माना जाता है।✍?✍?

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?दिवाली 2019 का पंचांग–
तिथि- अमावस्या तिथिचंद्र राशि – तुलासूर्य राशि – तुलानक्षत्र- चित्रायोग-प्रीतिकरण- नाग✍?✍?

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?दिवाली के दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दिवाली पूजन के लिए शुभ मुहूर्त का जानना भी अति आवश्यक है। अगर आप दिवाली के दिन शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं तो आपको धन लाभ के साथ-साथ सुख और समृद्धि भी प्राप्त होगी, इसलिए दिवाली पूजन के सही मुहूर्त का ही चुनाव करें।  पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिये इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। घर में सुख-समृद्धि बने रहे और मां लक्ष्मी स्थिर रहें इसके लिये दिनभर मां लक्ष्मी का उपवास रखने के उपरांत सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न (वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है) में मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये। लग्न व मुहूर्त का समय स्थान के अनुसार ही देखना चाहिये।
अगर आप दिवाली का शुभ मुहूर्त नहीं जानते तो ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी आपको इस दिन पूजन के शुभ मुहूर्त बता रहे हैं —✍?✍?

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?दिल्ली में दिवाली 2019 पूजन का शुभ मुहूर्त —
लक्ष्मी पूजन महूर्त- शाम 6 बजकर 43 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019)✍?✍?

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?प्रदोष काल में मंदिर में दीपदान, रंगोली और पूजा से जुडी अन्य तैयारी इस समय पर कर लेनी चाहिए तथा मिठाई वितरण का कार्य भी इसी समय पर संपन्न करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त द्वार पर स्वास्तिक और शुभ लाभ लिखने का कार्य इस मुहूर्त समय पर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इस समय पर अपने मित्रों व परिवार के बडे सदस्यों को उपहार देकर आशिर्वाद लेना व्यक्ति के जीवन की शुभता में वृ्द्धि करता है। मुहूर्त समय में धर्मस्थलो पर दानादि करना कल्याणकारी होगा।✍?✍?

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प्रदोष काल महूर्त- शाम 5 बजकर 40 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019)✍?✍?

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वृषभ काल महूर्त – शाम 6 बजकर 43 मिनट से रात 8 बजकर 39 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019 )✍?✍?

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?दिवाली 2019 महानिशीथ काल मुहूर्त —
धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त समय का प्रयोग श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य मंन्त्रों का जपानुष्ठान करना चाहिए। महानिशीथ काल में मुख्यतः तांत्रिक कार्य, ज्योतिषविद, वेद् आरम्भ, कर्मकाण्ड, अघोरी,यंत्र-मंत्र-तंत्र कार्य व विभिन्न शक्तियों का पूजन करते हैं एवं शक्तियों का आवाहन करना शुभ रहता है। इस अवधि में दीपावली पूजन के पश्चात गृह में एक चौमुखा दीपक रात भर जलता रहना चाहिए। यह दीपक लक्ष्मी एवं सौभाग्य में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।महानिशिथ काल में पूजा समय चर लग्न में कर्क लग्न उसके बाद स्थिर लग्न सिंह लग्न भी हों, तो विशेष शुभ माना जाता है। महानिशीथ काल में कर्क लग्न और सिंह लग्न होने के कारण यह समय शुभ हो गया है जो शास्त्रों के अनुसार दिपावली पूजन करना चाहते हो, वह इस समयावधि को पूजा के लिये प्रयोग कर सकते हैं ।
लक्ष्मी पूजन मूहूर्त- रात 11 बजकर 39 मिनट से रात 12 बजकर 30 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019)
महानिशीथ काल मूहूर्त- रात 11 बजकर 39 मिनट से रात 12 बजकर 30 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019)
सिंह काल मुहूर्त – रात 1 बजकर 15 मिनट से सुबह 3 बजकर 33 मिनट तक (28 अक्टूबर 2019)✍?✍?

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?दिवाली 2019 के लिए शुभ एवम लाभकारी चौघड़िया मुहूर्त–
प्रात: मुहूर्त्त(लाभ, अमृत ) – सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 12 बजकर 5 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019)
अपराह्न मुहूर्त्त (शुभ) – दोपहर 1 बजकर 28 मिनट से 2 बजकर 52 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019)
सांयकाल मुहूर्त (शुभ, अमृत) – शाम 5 बजकर 36 मिनट से शाम 8 बजकर 51 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019)
उषाकाल मुहूर्त्त (शुभ)- सुबह 4 बजकर 53 मिनट से 6 बजकर 29 मिनट तक (28 अक्टूबर 2019)✍?✍?

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?महानिशीथ काल मुहूर्त —
लक्ष्मी पूजन मूहूर्त- रात 11 बजकर 39 मिनट से रात 12 बजकर 30 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019)
महानिशीथ काल मूहूर्त- रात 11 बजकर 39 मिनट से रात 12 बजकर 30 मिनट तक (27 अक्टूबर 2019)
सिंह काल मुहूर्त – रात 1 बजकर 15 मिनट से सुबह 3 बजकर 33 मिनट तक (28 अक्टूबर 2019)✍?✍?

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?पूजन के पश्चात माँ लक्ष्मी जी आरती करना ना भूलें –✍?✍?

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?लक्ष्मीजी की आरती—
जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निशिदिन सेवत हर विष्णु धाता ॥ ॐ ॥ उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता । सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ ॥ दुर्गा रुप निरंजिनि, सुख सम्पति दाता । जो कोई तुमको ध्यावत, ऋधि सिधि धन पाता ॥ ॐ ॥ तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता । कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता ॥ ॐ ॥ जिस घर तुम रहती तह सब सदुण आता । सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता ॥ ॐ ॥ तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता । खान पान का वैभव सब तुमसे आता ॥ ॐ ॥ शुभ गुण मन्दिर सुन्दर क्षीरोदधि जाता । रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता ॥ ॐ ॥ महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता । उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता ॥ ॐ ॥

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