अर्पण जैन "अविचल"

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आज़ाद भारत के वैचारिक समन्वयक बाबा साहब

बाबा साहब भारत के टुकड़े होने पर सहमत भी नहीं थे, दरअसल, अंबेडकर का भारत को देखने का बिल्कुल ही अलग नजरिया था। वे पूरे राष्ट्र को अखंड देखना चाहते थे, इसलिए वे भारत के टुकड़े करने वालों की नीतियों के आलोचक रहे। भारत को दो टुकड़ों में बांटने की ब्रिटिश हुकूमत की साजिश और अंग्रेजों की हाँ में हाँ मिला रहे इन तीनों ही भारतीय नेताओं से वे इतने नाराज थे कि उन्होंने बाकायदा पाकिस्तान के विभाजन को लेकर एक पुस्तक ‘थॉट्स ऑन पाकिस्तान’ लिखी थी जो बहुत ही चर्चा में आई।

वेब पत्रकारिता का चमकता भविष्य

आज वेब-संस्करण चलाने बाली समाचार-पत्र और पत्रिकाओं की संख्या कम है. भविष्य में हर पत्र-पत्रिका ऑन-लाईन होगी. साथ ही साथ स्वतंत्र न्यूज पोर्टल की संख्या में भी वृद्धि होगी. पत्रिका ‘न्यूज वीक’ ने अपने प्रिंट संस्करण को बंद कर ऑनलाईन संस्करण जारी रखने का फैसला किया है. ‘जनसत्ता’के बारे में यह आसार लगाया जा रहा है कि समाचार-पत्र घाटे से बचने के लिए प्रिंट संस्करण बंद कर ऑन-लाईन से अपनी सेवा जारी रखेगा. बात स्पष्ट है कि जिस पत्र का लक्षित समूह उच्च वर्ग है और जिनके पास इंटरनेट आसानी से उपलब्ध है, वह धीरे-धीरे प्रिंट संस्करण बंद कर पूर्ण रूप से ऑन-लाईन हो जायेगा.

मोदी युग की प्रचंडता और यूपी का चुनावी बहुमत

दलित उत्थान में योगदान करनेवाले कई सामाजिक क्षत्रपों की मूर्तियां इतिहास के पन्नों से निकलकर 21वीं सदी में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है, तो यूपी में इसकी वजह मायावती ही है| हालांकि बीते शासनकाल में मूर्तियों और स्मारकों के निर्माण में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार की वजह से ही उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी| अब तमाम विवादों और आरोपों को दरकिनार कर मायावती ने पांचवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी पर अपना दावा तो ठोका पर किस्मत के साथ-साथ खराब सोशल इंजीनियरिंग उन्हे ले डूबी |

माँ, ममता और महिला

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ की आध्यात्मिक ताक़त वाला राष्ट्र जिसकी रगों में नारी का सम्मान बसा हुआ है, किंतु दुर्भाग्य इस कलयुगी पौध का जो यौवन के मदमास में अपने गौरवशाली इतिहास की किताबो को कालिख पोतते हुए अपमान के नए अंगवस्त्र तैयार कर रही है, वो भूल गई ‘यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्रफला: क्रिया’ अर्थात जिन घरों में स्त्रियों का अपमान होता है, वहां सभी प्रकार की पूजा करने के बाद भी भगवान निवास नहीं करते हैं।

500-1000 के नोट का चलन बंद

इन सब के पीछे कूटनीतिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा चाहे जो कुछ भी हो, किंतु प्रथम दृष्टया यह आदेश देश में जमा अघोषित नगदी के बारे में पता लगा कर आगामी कार्यवाही करना ही नज़र आ रहा है| भारत की अर्थव्यवस्था की उन्नति में देशवासियों का आय से अधिक खर्च न करने की मानसिकता भी कारगर है इसी को ध्यान में रखते हुई तिजोरियों में जमा अघोषित पूंजी को सामने लाने के लिए भी इस तरह का आदेश लाया जा सकता हैं इसमे कोई अतिशयोक्ति नहीं हैं|

पत्रकारिता : मानक नहीं मान्यता बदलना होगी

आज के दौर में पत्रकारिता के मानक जो नये बन रहे है वो आने वाली पीढ़ी के साथ भी न्याय नहीं कर रहे है, वर्तमान की कलम ने भविष्य के अध्याय जो लिखने लगे है वो कालांतर में शर्म का विषय बन कर रह जाएँगे | अब तो कोई राजेंद्र माथुर , माखन लाल चतुर्वेदी नहीं बनना चाहता, कोई संघर्ष कर के अस्तिस्व नहीं बचना चाहता ……
हालात इतने बदतर होते जा रहे है की सोच कर भी सिहरन उठ जाती है ,किस दौर में आ गई पत्रकारिता , कैसे कैसे हालत बन गये , आख़िर क्या ज़रूरत थी मानको के साथ खिलवाड़ करने की , कौन सा अध्याय लिख आई ये पीढ़ी पत्रकारिता की अवधारणा में ?