लेख साहित्य जब महावीर हनुमान ने सीता,लक्ष्मण,भरत के प्राणों की रक्षा की January 14, 2020 / January 14, 2020 | Leave a Comment गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरित्र मानस रामायण में महावीर हनुमान के अनेक स्वरूप के दर्शन होते हैं। जहॉ मारूति, आंजनेय,बजरंगवली, महावीर,हनुमान जैसे अनेक नामों से वे विख्यात हुये वही शिवजी के 11 वे रूद्र का अवतार होने से वे सबसे बलवान और बुद्धिमान भी है और उनके पराक्रम एवं चार्तुय से ही सुग्रीव, माता सीता, […] Read more » महावीर हनुमान
कविता साहित्य काश हर घर आँगन हो January 10, 2020 / January 10, 2020 | Leave a Comment कितना अच्छा था जब हम बच्चे थे तब घर के आँगन में इकट्ठा हो जाता था पूरा परिवार। कैलाश,शंकर, विनिया चन्दा आँगन में खूब मस्ती करते थे तब आँगन किसी खेल के मैदान से कमतर नहीं था जिसमें समा जाता था सारा मोहल्ला घर-द्वार। मकान से जुड़ा हुआ आँगन आँगन से बाहर तक घर का […] Read more »
कविता जीवन का अधूरापन January 10, 2020 / January 10, 2020 | Leave a Comment मुझे याद है प्रिय शादी के बाद तुम दूर-बहुत दूर थी मैं तुम्हारे वियोग में दो साल तक अकेला रहा हॅू। बड़ी शिद्दत के बाद तुम आयी थी तुम्हारे साथ रहते तब दिशायें मुझे काॅटती थी और तुम अपनी धुन में मुझसे विलग थी। तुम्हारा पास होना अक्सर मुझे बताता जैसे जमीन-आसमान गले मिलने को […] Read more »
लेख साहित्य पण्डित-पंडताई के बीच झगड़ा January 7, 2020 / January 7, 2020 | 1 Comment on पण्डित-पंडताई के बीच झगड़ा लेखक आत्माराम यादव पीव (आकाश मार्ग से नारद जी हाथों में वीणा लिये भारत के एक गाँव की ओर प्रस्थान कर रहे है और जॅपते जा रहे है- श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि …. श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि . वे गाँव की सीमा में प्रवेश करते है तभी उन्हें एक भक्त मिलता है) भक्त- […] Read more » पण्डित-पंडताई के बीच झगड़ा
कविता ईश्वर को नौकर रख सकता है इंसान January 3, 2020 / January 3, 2020 | Leave a Comment जिस दिन ईश्वर ने अपना वसीयतनामा इंसान के नाम लिख दिया इंसान ने खोद डाली सारी खदानें सोना,चान्दी, हीरे-मौती निकाल कर अपनी तिजौरी भर ली। धरती की सारी सुरंगे स्वार्थी इंसान ने खोज ली और सारी तिजौरियों को बहुमूल्य रत्न भण्डारों से भर ली। उसने पहले नदियों के पानी को बेचा नदियों के किनारों की […] Read more » ईश्वर को नौकर रख सकता है इंसान
कविता छेदवाली नाव पर सवार पत्रकार January 3, 2020 / January 3, 2020 | Leave a Comment मुद्दत से चली आ रही पत्रकारिता की पुरानी कई छिद्रवाली नाव पर सवार है मेरे शहर के तमाम पत्रकार इस पुरानी नाव में कुछ छेद पार कर चुके लोगों ने तो कुछ छेद इस नाव पर सवार लोगों ने किये है। इस पुरानी नाव को चट्टानों के बीच भयंकर तूफानों को भी झेलना होता है […] Read more » पत्रकार
कविता क्यों हुये डाक्टर लुटेरा एक समान January 2, 2020 / January 2, 2020 | Leave a Comment ओ नाच जमूरे छमा-छम, सुना बात पते की एकदम हाथपैर में हड़कन होती है, सर में गोले फूटे धमा-धम आं छी जुकाम हुआ या सीने में दर्द करे धड़ाधड़क, छींकें गरजे तोपों सी या खून नसों में फुदकें फुदकफुदक मेरा जमूरा बतायेगा, क्यों डाक्टर लूटेरा नहीं किसी से कम सुन मेरे प्यारे सुकुमार जमूरे तेरी […] Read more » doctors have become looters क्यों हुये डाक्टर लुटेरा एक समान डाक्टर लुटेरा एक समान
व्यंग्य ब्रज नही बचो कान्हा के समय जैसों January 2, 2020 / January 2, 2020 | Leave a Comment (ब्रजदर्शन के बाद ) जे वृन्दावन धाम नहीं है वैसो, कान्हा के समय रहो थो जैसो समय बदलते सब बदले हाल वृन्दावन हुओ अब बेहाल। कान्हा ग्वालो संग गईया चराई, वो जंगल अब रहो नही भाई निधि वन सेवाकुंज बचो है, राधाकृष्ण ने जहाॅ रास रचो है। खो गयी गलियाॅ खो गये द्वारे, नन्दगाॅव की […] Read more » कान्हा
कविता कब होगी सुख की भोर December 31, 2019 / December 31, 2019 | Leave a Comment कह रहे है माता-पिता अब जीवन कितना बाकी है कब तक धड़केगा यह दिल और कितनी साॅसें बाकी है। बेटा बहू पोता नहीं आते ममता से धड़के छाती है। बेटे से बतियाना कब होगा मुश्किल से कटती दिन-राती है। पोते को कंठ लगाने की यह प्यास अभी तक बाकी है। घर अपने बहू क्यों नहीं […] Read more » कब होगी सुख की भोर
राजनीति कुर्सी की राजनीति में उलझी पत्रकारिता का हुआ चीरहरण December 31, 2019 / December 31, 2019 | Leave a Comment कौरवों की राजसभा में द्रौपदी को उसकी इच्छा के विरूद्घ लाया गया था जबकि वह रजस्वला थी और उसे परपुरूष द्वारा हाथ लगाना ही अपने आप में महापाप था, लेकिन भरी सभा मे उसे केश पकडक़र लाया गया और उसके चीरहरण की कोशिश की गयी। ऐसा ही होशंगाबाद जिला मुख्यायलय की पत्रकारिता के साथ हो […] Read more »
कविता ये पत्रकार बड़े है December 31, 2019 / December 31, 2019 | Leave a Comment शहर में इनकी खूब चर्चा है अतिक्रमण हटाने वाली टीम के अधिकारियों से चलता खर्चा है। ये शौकीनमिजाज है सभी जगह खबू चरते-फिरते है सांडों को इनपर नाज है। ये सरकारों से बड़े है इनका नाम खूब चलता है ये सरदार बड़े है। ये जो तंबूओं से तने बने है नौकर इनके पढ़े लिखे है […] Read more » ये पत्रकार बड़े है
कविता हम जो छले, छलते ही गये December 30, 2019 / December 30, 2019 | Leave a Comment 15 अगस्त की वह सुबह तो आयी थी जब विदेशी आंक्रान्ताओं से हमें शेष भारत की बागड़ोर मिली हम गुलाम थे, आजाद हुये आजादी के समय भी हम छले गये थे आज भी हम अपनों के हाथों छले जा रहे है। भले आज हम आजादी में साॅसे ले रहे है पर यह कैसी आधी अधूरी […] Read more » छलते ही गये हम जो छले