राजनीति विधि-कानून न्यायपालिका, आलोचना और लोकतंत्र : क्या न्यायालयों को आलोचना से भयभीत होना चाहिए? May 7, 2026 / May 7, 2026 | Leave a Comment रत में न्यायालय की अवमानना का कानून औपनिवेशिक मानसिकता की देन माना जाता है। संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों को अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 भी इस शक्ति को परिभाषित करता है। Read more » न्यायालयों को आलोचना
राजनीति गंगोत्री से गंगासागर तक : कमल की दस्तक May 6, 2026 / May 7, 2026 | Leave a Comment गंगोत्री से गंगासागर तक कमल Read more » गंगोत्री से गंगासागर तक कमल
समाज शहर और शहरी होने की दौड़ में गाँव और ग्रामीण : कितना सही, कितना गलत May 2, 2026 / May 2, 2026 | Leave a Comment जब हम किसी व्यक्ति के जीवन का मूल्यांकन इस आधार पर करने लगते हैं कि वह शहर में रहता है या गाँव में, कि वह अंग्रेज़ी बोलता है या भोजपुरी, कि वह सूट पहनता है या धोती — तो हम दरअसल उस व्यक्ति की मनुष्यता को एक सांस्कृतिक पदानुक्रम की सीढ़ियों पर तोलने की कोशिश कर रहे होते हैं। और इस तोल में, अनिवार्य रूप से, गाँव और ग्रामीण हमेशा नीचे पाए जाते हैं — कम विकसित, कम आधुनिक, कम सभ्य। Read more » शहर और शहरी होने की दौड़ में गाँव और ग्रामीण
मनोरंजन मीडिया कलम का कालजयी कारवां: हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की कालजयी कीर्ति May 2, 2026 / May 2, 2026 | Leave a Comment पेड न्यूज और प्रायोजित सामग्री ने विश्वसनीयता के जिस बुनियादी ढांचे को नष्ट किया है, उसकी भरपाई करना आज के दौर में सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हम एक ऐसे सूचना-समाज में जी रहे हैं जहाँ जानकारी का अंबार तो है, पर ज्ञान का अभाव है, और इस भीषण कोलाहल में सत्य की धीमी आवाज अनसुनी रह जाती है। Read more » विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस
समाज “दोष का दर्पण: हर बुराई के लिए केवल सरकार को जिम्मेदार ठहराना ठीक” ? April 30, 2026 / April 30, 2026 | Leave a Comment स्वच्छता का उदाहरण अत्यंत स्पष्ट है। हम चाहते हैं कि हमारे शहर साफ-सुथरे हों, नालियाँ स्वच्छ हों, सड़कें चमकती रहें लेकिन जब वही नागरिक घर का कूड़ा सड़क पर फेंक देते हैं, प्लास्टिक का उपयोग बिना सोचे-समझे करते हैं, और सार्वजनिक स्थानों को अपना नहीं समझते, तब समस्या पैदा होती है। Read more » दोष का दर्पण
लेख श्रम का सम्मान, समानता का संधान: सरकारी-निजी वेतन का समान विधान April 29, 2026 / April 29, 2026 | Leave a Comment जब हम न्यूनतम वेतन की अवधारणा की बात करते हैं, तो इसका मूल उद्देश्य कामगार को जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं—रोटी, कपड़ा और मकान—के साथ-साथ गरिमापूर्ण जीवन व्यतीत करने का अधिकार देना होता है। सरकारी क्षेत्र में न्यूनतम वेतन का निर्धारण सातवें वेतन आयोग Read more » श्रम का सम्मान
लेख समाज हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की समृद्ध संग्रामगाथा : सशक्त संवाद से सृजित सामाजिक संरचना April 28, 2026 / April 28, 2026 | Leave a Comment उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हिंदी पत्रकारिता ने एक नए बौद्धिक और सांस्कृतिक चरण में प्रवेश किया, जहाँ साहित्य और पत्रकारिता का अद्भुत संगम देखने को मिला। Read more » A social structure created through powerful dialogue The rich story of 200 years of Hindi journalism हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष
समाज भारत की अधिकांश समस्याओं की जड़ है अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि April 26, 2026 / April 26, 2026 | Leave a Comment भारत में जनसंख्या वृद्धि का स्वरूप जटिल है, क्योंकि एक ओर कुल प्रजनन दर में गिरावट देखी जा रही है, तो दूसरी ओर जनसंख्या का कुल आकार इतना विशाल है कि प्रतिवर्ष करोड़ों लोगों की वृद्धि अभी भी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार देश की कुल प्रजनन दर लगभग 2.0 के आसपास आ चुकी है Read more » अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि
विश्ववार्ता क्या हम नेपाल की नई सरकार से कुछ सीखेंगे? April 10, 2026 / April 10, 2026 | Leave a Comment जब निजी स्कूल और कोचिंग संस्थान अनियंत्रित रूप से बढ़ते हैं तो वे एक समानांतर शिक्षा व्यवस्था खड़ी कर देते हैं, जिसमें गुणवत्ता और अवसर दोनों ही आर्थिक क्षमता पर निर्भर हो जाते हैं। Read more » नेपाल
राजनीति 2027 की तैयारी : उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ बनाम ‘हार्ड हिंदुत्व’ का नया अध्याय April 8, 2026 / April 8, 2026 | Leave a Comment उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई बहस छिड़ी हुई है — और यह बहस अगले साल फरवरी-मार्च 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों का पहला संकेत है। Read more » 'सॉफ्ट हिंदुत्व' बनाम 'हार्ड हिंदुत्व'
राजनीति क्या डिजिटल राजनैतिक प्रचार की कोई नैतिक सीमा है? April 6, 2026 / April 6, 2026 | Leave a Comment नैतिकता के प्रश्न पर विचार करने से पहले यह स्वीकार करना आवश्यक है कि राजनीतिक प्रचार और राजनीतिक संवाद के बीच की रेखा स्पष्ट नहीं है। हर राजनेता Read more » डिजिटल राजनैतिक प्रचार
विश्ववार्ता अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की सामूहिक विफलता का प्रमाण है निरंतर हो रहे अंतरराष्ट्रीय युद्ध March 30, 2026 / March 30, 2026 | Leave a Comment द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब वैश्विक समुदाय ने संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की स्थापना की, तब उसका मूल उद्देश्य स्पष्ट था—भविष्य में युद्धों को रोकना, Read more » अंतरराष्ट्रीय युद्ध