व्यंग्य हाँ, मैं छोटे दुकानदार के रूप में कॉकरोच हूँ May 29, 2026 / May 29, 2026 | Leave a Comment री दुकान कोई व्यापारिक साम्राज्य नहीं, रोजमर्रा की साँस लेने की मशीन है। यहाँ साबुन भी बिकता है, बिस्कुट भी, बच्चों की टॉफी भी और मेरी नींद भी। ग्राहक आते हैं, सामान लेते हैं, मुस्कुराते हैं, चले जाते हैं। लेकिन उनके जाने के बाद जो बचता है, वह है बिजली का बिल, जीएसटी का डर, बाजार का दबाव और ऑनलाइन बिक्री का भूत Read more » छोटे दुकानदार के रूप में कॉकरोच
महिला-जगत मीडिया लेख हिंदी पत्रकारिता में महिलाएं : 200 साल बाद भी अधूरी यात्रा May 29, 2026 / May 29, 2026 | Leave a Comment आज जब हम हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों का उत्सव मनाते हैं, तो यह पूछना जरूरी है: क्या महिलाओं के लिए यह उत्सव मनाने का समय है या फिर यह आत्ममंथन का क्षण है? Read more » Women in Hindi journalism: A journey incomplete even after 200 years हिंदी पत्रकारिता में महिलाएं
पर्यावरण लेख तपती धरती, तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा : बिगड़ता पर्यावरण संतुलन और अस्तित्व का संकट May 25, 2026 / May 25, 2026 | Leave a Comment आज भारत का सामान्य नागरिक यह महसूस करने लगा है कि मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। बचपन की गर्मियां और आज की गर्मियों में जमीन-आसमान का अंतर है। कभी मई-जून की दोपहरें भी इतनी भयावह नहीं लगती थीं। गांवों में पेड़ों की छांव, मिट्टी की नमी Read more » Scorching earth Suffering Lives the System's Sleepiness: Deteriorating Environmental Balance and an Existential Crisis तड़पता जीवन तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा तपती धरती बिगड़ता पर्यावरण संतुलन
व्यंग्य हाँ, मैं सरकारी बाबू के रूप में कॉकरोच हूँ May 22, 2026 / May 22, 2026 | Leave a Comment कॉकरोच अँधेरे में पनपता है। सरकारी बाबू अस्पष्टता में। जितना कम स्पष्ट नियम होगा, उतनी अधिक हमारी शक्ति होगी। यदि नियम सरल हो जाएँ तो जनता सीधे काम करवा लेगी। फिर हमारा महत्व कहाँ रहेगा? इसलिए व्यवस्था को इतना जटिल बना दो कि आदमी जन्म प्रमाणपत्र बनवाते-बनवाते दर्शनशास्त्री हो जाए। Read more » सरकारी बाबू के रूप में कॉकरोच
राजनीति सत्ता में सादगी : संयमित सांसदों एवं विधायकों से समृद्ध लोकतंत्र की स्वर्णिम संहिता May 19, 2026 / May 19, 2026 | Leave a Comment संयमित सांसदों एवं विधायकों से समृद्ध लोकतंत्र Read more » Government expenditure on public representatives संयमित सांसदों एवं विधायकों से समृद्ध लोकतंत्र
लेख समाज कृत्रिम क्रांति के कालखंड में संस्कृति, संवेदना और सनातन ज्ञान की संगति May 18, 2026 / May 18, 2026 | Leave a Comment भारतीय ज्ञान परंपरा का सबसे बड़ा वैशिष्ट्य यह है कि उसने ज्ञान को कभी भी नैतिकता से अलग नहीं माना। आधुनिक तकनीकी व्यवस्था में ज्ञान का अर्थ प्रायः सूचना और नियंत्रण की क्षमता तक सीमित हो गया है, जबकि भारतीय दृष्टि में ज्ञान वह है जो मनुष्य को विवेक, संयम और लोककल्याण की ओर ले जाए। Read more » कृत्रिम क्रांति
राजनीति वादों की वाणी, विश्वास का विध्वंस : घोषणा पत्र की राजनीति पर लोकतांत्रिक लगाम May 15, 2026 / May 15, 2026 | Leave a Comment आज आवश्यकता इस बात की है कि चुनावी घोषणा पत्रों को कानूनी और नैतिक जवाबदेही के दायरे में लाया जाए। यदि कोई राजनीतिक दल या उसका नेतृत्व अपने प्रमुख चुनावी वादों को बिना उचित कारण पूरा नहीं करता, तो उसके विरुद्ध कठोर राजनीतिक कार्रवाई होनी चाहिए। इस विषय पर यह विचार Read more » a Destruction of Trust: A Democratic Restraint on Manifesto Politics A Word of Promises Democratic Restraint on Manifesto Politics घोषणा पत्र की राजनीति
व्यंग्य “हम ही हैं राष्ट्र, हमसे ही है राष्ट्र” May 14, 2026 / May 14, 2026 | Leave a Comment प्रशिक्षण के समय हमें सिखाया गया कि “आप राष्ट्र की रीढ़ हैं।” मैंने इस वाक्य को बहुत गंभीरता से लिया। फिर मैंने सोचा कि जब पूरी व्यवस्था मेरी पीठ पर टिकी है, तो थोड़ा भार व्यवस्था को भी उठाना चाहिए—जैसे मेरा घर, मेरी गाड़ी, मेरे फार्महाउस और मेरे निवेश। Read more » “हम ही हैं राष्ट्र हमसे ही है राष्ट्र
लेख सादगी से सशक्त राष्ट्र की ओर May 14, 2026 / May 14, 2026 | Leave a Comment पिछले कुछ वर्षों में यह स्पष्ट रूप से देखा गया है कि सरकारी आयोजनों, प्रचार अभियानों, विशाल रैलियों, विदेशी दौरों, भव्य स्वागत समारोहों और अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं। Read more » सशक्त राष्ट्र
राजनीति राजनीतिक स्टार्टअप और युवाओं की राजनीति में भागीदारी May 12, 2026 / May 12, 2026 | Leave a Comment पिछले कुछ वर्षों में देश ने ऐसे राजनीतिक प्रयोग देखे जिन्होंने यह संदेश दिया कि राजनीति केवल पारंपरिक नेताओं की जागीर नहीं है। नए राजनीतिक दलों ने सामाजिक माध्यमों, जनसंपर्क अभियानों, डिजिटल प्रचार और स्थानीय मुद्दों के माध्यम से Read more » Political startups and youth participation in politics राजनीतिक स्टार्टअप
राजनीति विधि-कानून न्यायपालिका, आलोचना और लोकतंत्र : क्या न्यायालयों को आलोचना से भयभीत होना चाहिए? May 7, 2026 / May 7, 2026 | Leave a Comment रत में न्यायालय की अवमानना का कानून औपनिवेशिक मानसिकता की देन माना जाता है। संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों को अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 भी इस शक्ति को परिभाषित करता है। Read more » न्यायालयों को आलोचना
राजनीति गंगोत्री से गंगासागर तक : कमल की दस्तक May 6, 2026 / May 7, 2026 | Leave a Comment गंगोत्री से गंगासागर तक कमल Read more » गंगोत्री से गंगासागर तक कमल