राजनीति सत्ता में सादगी : संयमित सांसदों एवं विधायकों से समृद्ध लोकतंत्र की स्वर्णिम संहिता May 19, 2026 / May 19, 2026 | Leave a Comment संयमित सांसदों एवं विधायकों से समृद्ध लोकतंत्र Read more » Government expenditure on public representatives संयमित सांसदों एवं विधायकों से समृद्ध लोकतंत्र
लेख समाज कृत्रिम क्रांति के कालखंड में संस्कृति, संवेदना और सनातन ज्ञान की संगति May 18, 2026 / May 18, 2026 | Leave a Comment भारतीय ज्ञान परंपरा का सबसे बड़ा वैशिष्ट्य यह है कि उसने ज्ञान को कभी भी नैतिकता से अलग नहीं माना। आधुनिक तकनीकी व्यवस्था में ज्ञान का अर्थ प्रायः सूचना और नियंत्रण की क्षमता तक सीमित हो गया है, जबकि भारतीय दृष्टि में ज्ञान वह है जो मनुष्य को विवेक, संयम और लोककल्याण की ओर ले जाए। Read more » कृत्रिम क्रांति
राजनीति वादों की वाणी, विश्वास का विध्वंस : घोषणा पत्र की राजनीति पर लोकतांत्रिक लगाम May 15, 2026 / May 15, 2026 | Leave a Comment आज आवश्यकता इस बात की है कि चुनावी घोषणा पत्रों को कानूनी और नैतिक जवाबदेही के दायरे में लाया जाए। यदि कोई राजनीतिक दल या उसका नेतृत्व अपने प्रमुख चुनावी वादों को बिना उचित कारण पूरा नहीं करता, तो उसके विरुद्ध कठोर राजनीतिक कार्रवाई होनी चाहिए। इस विषय पर यह विचार Read more » a Destruction of Trust: A Democratic Restraint on Manifesto Politics A Word of Promises Democratic Restraint on Manifesto Politics घोषणा पत्र की राजनीति
व्यंग्य “हम ही हैं राष्ट्र, हमसे ही है राष्ट्र” May 14, 2026 / May 14, 2026 | Leave a Comment प्रशिक्षण के समय हमें सिखाया गया कि “आप राष्ट्र की रीढ़ हैं।” मैंने इस वाक्य को बहुत गंभीरता से लिया। फिर मैंने सोचा कि जब पूरी व्यवस्था मेरी पीठ पर टिकी है, तो थोड़ा भार व्यवस्था को भी उठाना चाहिए—जैसे मेरा घर, मेरी गाड़ी, मेरे फार्महाउस और मेरे निवेश। Read more » “हम ही हैं राष्ट्र हमसे ही है राष्ट्र
लेख सादगी से सशक्त राष्ट्र की ओर May 14, 2026 / May 14, 2026 | Leave a Comment पिछले कुछ वर्षों में यह स्पष्ट रूप से देखा गया है कि सरकारी आयोजनों, प्रचार अभियानों, विशाल रैलियों, विदेशी दौरों, भव्य स्वागत समारोहों और अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं। Read more » सशक्त राष्ट्र
राजनीति राजनीतिक स्टार्टअप और युवाओं की राजनीति में भागीदारी May 12, 2026 / May 12, 2026 | Leave a Comment पिछले कुछ वर्षों में देश ने ऐसे राजनीतिक प्रयोग देखे जिन्होंने यह संदेश दिया कि राजनीति केवल पारंपरिक नेताओं की जागीर नहीं है। नए राजनीतिक दलों ने सामाजिक माध्यमों, जनसंपर्क अभियानों, डिजिटल प्रचार और स्थानीय मुद्दों के माध्यम से Read more » Political startups and youth participation in politics राजनीतिक स्टार्टअप
राजनीति विधि-कानून न्यायपालिका, आलोचना और लोकतंत्र : क्या न्यायालयों को आलोचना से भयभीत होना चाहिए? May 7, 2026 / May 7, 2026 | Leave a Comment रत में न्यायालय की अवमानना का कानून औपनिवेशिक मानसिकता की देन माना जाता है। संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों को अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 भी इस शक्ति को परिभाषित करता है। Read more » न्यायालयों को आलोचना
राजनीति गंगोत्री से गंगासागर तक : कमल की दस्तक May 6, 2026 / May 7, 2026 | Leave a Comment गंगोत्री से गंगासागर तक कमल Read more » गंगोत्री से गंगासागर तक कमल
समाज शहर और शहरी होने की दौड़ में गाँव और ग्रामीण : कितना सही, कितना गलत May 2, 2026 / May 2, 2026 | Leave a Comment जब हम किसी व्यक्ति के जीवन का मूल्यांकन इस आधार पर करने लगते हैं कि वह शहर में रहता है या गाँव में, कि वह अंग्रेज़ी बोलता है या भोजपुरी, कि वह सूट पहनता है या धोती — तो हम दरअसल उस व्यक्ति की मनुष्यता को एक सांस्कृतिक पदानुक्रम की सीढ़ियों पर तोलने की कोशिश कर रहे होते हैं। और इस तोल में, अनिवार्य रूप से, गाँव और ग्रामीण हमेशा नीचे पाए जाते हैं — कम विकसित, कम आधुनिक, कम सभ्य। Read more » शहर और शहरी होने की दौड़ में गाँव और ग्रामीण
मनोरंजन मीडिया कलम का कालजयी कारवां: हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की कालजयी कीर्ति May 2, 2026 / May 2, 2026 | Leave a Comment पेड न्यूज और प्रायोजित सामग्री ने विश्वसनीयता के जिस बुनियादी ढांचे को नष्ट किया है, उसकी भरपाई करना आज के दौर में सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हम एक ऐसे सूचना-समाज में जी रहे हैं जहाँ जानकारी का अंबार तो है, पर ज्ञान का अभाव है, और इस भीषण कोलाहल में सत्य की धीमी आवाज अनसुनी रह जाती है। Read more » विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस
समाज “दोष का दर्पण: हर बुराई के लिए केवल सरकार को जिम्मेदार ठहराना ठीक” ? April 30, 2026 / April 30, 2026 | Leave a Comment स्वच्छता का उदाहरण अत्यंत स्पष्ट है। हम चाहते हैं कि हमारे शहर साफ-सुथरे हों, नालियाँ स्वच्छ हों, सड़कें चमकती रहें लेकिन जब वही नागरिक घर का कूड़ा सड़क पर फेंक देते हैं, प्लास्टिक का उपयोग बिना सोचे-समझे करते हैं, और सार्वजनिक स्थानों को अपना नहीं समझते, तब समस्या पैदा होती है। Read more » दोष का दर्पण
लेख श्रम का सम्मान, समानता का संधान: सरकारी-निजी वेतन का समान विधान April 29, 2026 / April 29, 2026 | Leave a Comment जब हम न्यूनतम वेतन की अवधारणा की बात करते हैं, तो इसका मूल उद्देश्य कामगार को जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं—रोटी, कपड़ा और मकान—के साथ-साथ गरिमापूर्ण जीवन व्यतीत करने का अधिकार देना होता है। सरकारी क्षेत्र में न्यूनतम वेतन का निर्धारण सातवें वेतन आयोग Read more » श्रम का सम्मान