खेल जगत रफ्तार के जादूगर वेटल October 31, 2012 / October 31, 2012 | Leave a Comment देवेन्द्र शर्मा ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में आयोजित दूसरी इंडियन ग्रां प्री फार्मूला वन रेस में रेडबुल के सेबेस्टियन वेटल ने एक बार फिर तमाम प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोडक़र खिताब़ अपने नाम कर लिया पोल पोजिशन रेस में पहले स्थान पर रहे जर्मनी के वेटल ने फेरारी के फर्नांडो एलोन्सो को पीछे छोड़ते […] Read more »
राजनीति मंत्रिपरिषद में फेरबदल से किसको क्या मिला October 30, 2012 / October 30, 2012 | Leave a Comment राघवेंद्र प्रसाद मिश्र देश में यह पहली बार हुआ है कि दो महीने के अंदर तीन बार रेल मंत्री बदले गये हैं। चेहरे बदलने से हालात नहीं बदलते, हालात बदलने के लिए ठोस योजनाओं की व कड़े फैसले लेने की जरूरत होती है। मनमोहन सरकार ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जिस तरह से फेरबदल करते हुए […] Read more » मंत्रिपरिषद में फेरबदल
स्वास्थ्य-योग ताकतवर मैडीशन : मेडीटेशन October 25, 2012 / October 25, 2012 | Leave a Comment डा वीरेंद्र अग्रवाल आधुनिक खोजों से साफ हो चुका है कि 80 प्रतिशत रोगों का कारण मन है चाहे वह कोई सा भी रोग हो । रोग की शुरूआत मन से ही शुरू होती है और इसका उपचार मन के ही पास ही है । प्रत्येक रोग के किटाणु वातावरण में फैले हूए हैं वह […] Read more »
विविधा संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत के उद्बोधन का सारांश October 25, 2012 / October 25, 2012 | Leave a Comment राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत के श्रीविजयादशमी उत्सव (बुधवार दिनांक 24 अक्तुबर 2012) के अवसर पर दिये गये उद्बोधन का सारांश आज के दिन हमें स्व. सुदर्शन जी जैसे मार्गदर्शकों का बहुत स्मरण हो रहा है। विजययात्रा में बिछुड़े हुये वीरों की स्मृतियाँ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। विजयादशमी विजय का […] Read more » मोहनराव भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
जन-जागरण आदिवासी संस्कृति के लिए संकट बना चर्च October 25, 2012 / October 25, 2012 | Leave a Comment हर्षद राठोड वर्ष 2010 की संयुक्त राष्ट्र संघ की द स्टेट ऑफ द वल्र्ड्स इंडीजीनस पीपुल्स नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि मूलवंशी और आदिम जनजातियां पूरे विश्व में अपनी संपदा, संसाधन और जमीन से वंचित व विस्थापित होकर विलुप्त होने के कगार पर हैं। रिपोर्ट में भारत की चर्चा करते हुए कहा गया […] Read more » आदिवासी संस्कृति
विविधा आजीविका बनी जीविका का साधन October 20, 2012 | Leave a Comment दिनेश पंत देश में गरीबी उन्मूलन व आजीविका संवर्धन के लिए आजादी के बाद से ही प्रयास शुरू हो गए थे। तब से अब तक केंद्र और राज्य स्तर पर कई योजनाएं व परियोजनाएं सामने आयीं लेकिन उनमें से कितने अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हो पाईं यह बहस का विषय है। हालांकि […] Read more »
धर्म-अध्यात्म उसकी पहचान इंसानियत है, मजहब नहीं October 20, 2012 / October 20, 2012 | 1 Comment on उसकी पहचान इंसानियत है, मजहब नहीं आशुतोष शर्मा 1947 के विभाजन के दौरान मुजफ्फराबाद (पाक अधिकृत कश्मीर) के एक गांव में करीब डेढ़ साल का बच्चा एक मुर्दा शरीर से लिपटा रो रहा था। तभी वहां से गुजर रही एक मुस्लिम महिला की नजर उस पर पड़ी। वह नर्मदिल औरत उस बच्चे को अपने घर ले आयी और बेटे की तरह […] Read more » इंसानियत मजहब
महिला-जगत वह पैरों की धूल नहीं है October 20, 2012 | Leave a Comment ममता सिन्हा देश और विश्व में हो रही तमाम तरक्कियों के बावजूद औरतों को बराबरी का दर्जा तो दूर उन्हें जीने का अधिकार भी नसीब नहीं हुआ है। यह सही है कि साहस के साथ संगठित होकर समय समय पर महिलाओं ने आवाज बुलंद किया है और कुछ अधिकार हासिल किये हैं लेकिन साथ ही […] Read more »
विविधा जागरूकता से विकास संभव है October 20, 2012 | Leave a Comment अभिषेक ज्ञानवानी हमारे देश में भ्रष्टाचार के फलने-फूलने के पीछे सबसे बड़ा कारण आम आदमी का अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होना है। एक आम भारतीय को यह मालूम ही नहीं है कि उसके मौलिक अधिकार क्या हैं? उसे संविधान ने क्या और कितनी शक्ति प्रदान कर रखी है। उसे इस बात का अहसास […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ बयोंड ने बाजार में उतारी ‘‘वैल्यू फॉर मनी’’ टैबलेट रेंज October 18, 2012 / October 18, 2012 | Leave a Comment अपने आगमन के साथ ही टैबलेट भारतीय उपभोक्ता बाजार पर छा गए हैं। इनका विकास बड़ी ही तीव्र रफ्तार से जारी है। यह एक महत्वपूर्ण आविष्कार है क्योंकि यह अपना उपयोग करने वालों को उनके डेस्क तक ही सीमित नहीं करता है। यह अपनी गतिशीलता, प्रयोग की सरलता के कारण अधिक उत्पादकता सुनिश्चित करता है […] Read more »
महत्वपूर्ण लेख मीडिया कुछ मीत मिले एक मीट हुई October 17, 2012 / October 20, 2012 | 1 Comment on कुछ मीत मिले एक मीट हुई संजय तिवारी आखिरीबार कब इस तरह से दो चार नेटीजन मित्रों से मुलाकात हुई थी, याद नहीं है. इस बार संजीव सिन्हा का फोन आया कि प्रवक्ता के चार साल पूरे हो रहे हैं इस मौके पर हम लोग कांस्टीट्यूशन क्लब में मिलना चाहते हैं. आप आइये. फिर एसएमएस भी आया. फिर फोन भी आया. […] Read more » वेब मीडिया
राजनीति भारत बनाना रिपब्लिक नहीं, कुप्रबंधन का शिकार है. October 10, 2012 / October 10, 2012 | Leave a Comment अवधेश पाण्डेय 121 करोड़ सक्षम लोगों के देश को बनाना रिपब्लिक का नाम दे दिया है राबर्ट वाड्रा ने. यह हमारे देश के लोगों की प्रशासनिक क्षमता पर करारा प्रहार है. हम केले जैसे एक-दो उत्पाद बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था नहीं चला रहे, बल्कि सदियों से विश्व को बहुत से संसाधन उपलब्ध कराते रहे हैं. फिर […] Read more » robert vadhera