मनोज कुमार

मनोज कुमार

लेखक के कुल पोस्ट: 224

सन् उन्नीस सौ पैंसठ के अक्टूबर माह की सात तारीख को छत्तीसगढ़ के रायपुर में जन्म। शिक्षा रायपुर में। वर्ष 1981 में पत्रकारिता का आरंभ देशबन्धु से जहां वर्ष 1994 तक बने रहे। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समवेत शिखर मंे सहायक संपादक 1996 तक। इसके बाद स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्य। वर्ष 2005-06 में मध्यप्रदेश शासन के वन्या प्रकाशन में बच्चों की मासिक पत्रिका समझ झरोखा में मानसेवी संपादक, यहीं देश के पहले जनजातीय समुदाय पर एकाग्र पाक्षिक आलेख सेवा वन्या संदर्भ का संयोजन। माखनलाल पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी पत्रकारिता विवि वर्धा के साथ ही अनेक स्थानों पर लगातार अतिथि व्याख्यान। पत्रकारिता में साक्षात्कार विधा पर साक्षात्कार शीर्षक से पहली किताब मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा वर्ष 1995 में पहला संस्करण एवं 2006 में द्वितीय संस्करण। माखनलाल पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से हिन्दी पत्रकारिता शोध परियोजना के अन्तर्गत फेलोशिप और बाद मे पुस्तकाकार में प्रकाशन। हॉल ही में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित आठ सामुदायिक रेडियो के राज्य समन्यक पद से मुक्त.

लेखक - मनोज कुमार - के पोस्ट :

शख्सियत समाज

समाज को नई दिशा देने वाले डॉ. आम्बेडकर

| Leave a Comment

14 अप्रेल 1891 जन्में डॉ. अम्बेडकर ने अपने कार्यों से भारत का इतिहास लिख दिया. यह वह समय था छुआ-छूत का मसला शीर्ष पर था और ऐसे में बाबा साहेब जैसे लोगों को आगे बढऩा बेहद कठिन था लेकिन कभी ‘कभी हार नहीं मानूगां’ के संकल्प के साथ उन्होंने सारे कंटक भरे रास्ते को सुगम बना लिया. कहते हैं, जहाँ चाह है वहाँ राह है। प्रगतिशील विचारक एवं पूर्णरूप से मानवतावादी बङौदा के महाराज सयाजी गायकवाङ़ ने भीमराव जी को उच्च शिक्षा हेतु तीन साल तक छात्रवृत्ति प्रदान की, किन्तु उनकी शर्त थी की अमेरिका से वापस आने पर दस वर्ष तक बङौदा राज्य की सेवा करनी होगी। भीमराव ने कोलम्बिया विश्वविद्यालय से पहले एम. ए. तथा बाद में पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की।

Read more »

राजनीति

शिक्षा का आसमां छूता छत्तीसगढ़

| Leave a Comment

छत्तीसगढ़ में रमनसिंह सरकार ने सब पढ़ेंगे, नई दुनिया गढ़ेंगे के तर्ज पर प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा देने के पर्याप्त इंतजाम किया है. हर बच्चा स्कूल जा सके, इसके लिए उनकी पहुंच के भीतर शाला भवनों की व्यवस्था की गई है तो उच्च शिक्षा के लिए अनेक नवीन योजनाओं की शुरूआत की गई है. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पिछले सालों से छू लो आसमां और प्रयास स्कूलों के तहत शिक्षा के पूरे इंतजाम हैं जिसके कारण छत्तीसगढ़ के बच्चे कामयाबी की नई इबारत लिखने में जुट गए हैं. 16 साल पहले जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था तब और आज के हालात में जमीन आसमां का अंतर दिख रहा है.

Read more »