डा. कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

उरई (जालौन) उ0प्र0 में जन्‍म। हिंदी साहित्‍य में पी-एच0 डी0 की उपाधि। लेख, शोध-आलेख, कहानी, लघुकथा, कविता, ग़ज़ल, नाटक आदि का लेखन एवं नियमित रूप से देश की प्रतिष्ठित पत्र/पत्रिकाओं में प्रकाशन। वर्तमान तक कुल 10 पुस्तकों का प्रकाशन। उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा वर्ष 2004 में हिन्दी की बहुआयामी सेवा हेतु सम्मान सहित अनेक पुरस्‍कारों से सम्‍मानित। सम्प्रति - सम्पादक-स्पंदन (साहित्यिक पत्रिका), - प्रवक्ता-गांधी महाविद्यालय, उरई

मानवीय संवेदनाओं के जीवंत कवि – डा0 महेन्द्रभटनागर

प्रगतिशील विचारधारा के कवि स्वीकारे जाने वाले महेन्द्रभटनागर को केन्द्र में रखकर ग्वालियर साहित्य अकादमी,…

मतदाता और राजनेताओं के मध्य लोकतन्त्र

राजनीति का पहला सबक या कहें कि लोकतन्त्र की पहली परिभाषा यह कि ‘‘जनता का शासन, जनता के लिए, जनता के द्वारा” का कोई सैद्धान्तिक प्रभाव नहीं रह गया है। हो सकता है कि..

सकारात्मक राजनीति के लिए राजनीति में आना होगा

वर्तमान लोकसभा चुनावों में तमाम प्रयासों के बाद भी मतदान का प्रतिशत प्रथम एवं द्वितीय चरण में बढ़ता नहीं दिखा। मतदाताओं की इस नकारात्मक या कहें कि उदासीन स्थिति के कारण…

इन घटनाओं को अनदेखा न करें राजनैतिक मान्यवर

चिदम्बरम, जिन्दल और अब आडवानी….यह किसी चुनावी कार्यक्रम के लिए तिकड़ी जरूर न हो पर इस तिकड़ी में कुछ न कुछ साम्य अवश्य है। तीनों अपने-अपने चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त हैं…