ललित गर्ग

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लेखक - ललित गर्ग - के पोस्ट :

राजनीति

भारत को अमेरिका बनाने के संकल्प का सत्य

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अमेरिका के कारोबारी दिग्गजों को संबोधित करते हुए मोदी ने भरोसा दिलाना चाहा कि भारत आर्थिक सुधारों की राह पर चल रहा है और भारत में निवेश करना तथा व्यापार करना पहले से कहीं आसान हो गया है, इसलिए भारत में पूंजी लगाने में वे तनिक न हिचकें। आर्थिक सुधारों की दिशा में अपनी सरकार के नए व बड़े कदम के रूप में उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी की चर्चा की। इसी के साथ उन्होंने भारत-अमेरिका का व्यापार कुछ ही बरसों में कई गुना बढ़ जाने की उम्मीद जताई। मोदी की इस अमेरिका यात्रा की अहमियत जाहिर है और इसे संभावनाभरा भी माना जा रहा है।

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धर्म-अध्यात्म

इंसानियत का पैगाम देता एक निराला संत : आचार्य श्रीमद् नित्यानन्द सूरीजी

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आचार्य नित्यानंद सूरीश्वरजी ने वर्ष 2013 का चातुर्मास जम्मू में किया। जम्मू कश्मीर की असामन्य स्थितियों एवं हिंसा की परिस्थितियों में इस चातुर्मास के द्वारा शांति, अहिंसा एवं साम्प्रदायिक सौहार्द का अपूर्व वातावरण निर्मित हुआ। इसी चातुर्मास के दौरान अमरनाथ यात्रा को लेकर संकट की स्थितियां खड़ी हुई एवं यात्रा को बाधित होना पड़ा। इन स्थितियों में आचार्यजी के प्रयासों से यात्रा भी प्रारंभ हुई एवं शांति का वातावरण भी निर्मित हुआ। जम्मू कश्मीर सरकार ने उनके इस उल्लेखनीय भूमिका के लिए उन्हें समारोहपूर्वक प्रांतीय सरकार का महात्मा गांधी शांति पुरस्कार प्रदत्त किया गया।

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राजनीति

प्रणव दा के नाम पर सर्वसम्मति क्यूँ जरूरी?

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राष्ट्रपति प्रणव दा की एक और अनूठी सफलता रही कि वे राजनीति दृष्टि से भले ही निष्क्रिय रहे लेकिन राष्ट्रीय हितों के लिये सदैव सक्रिय बने रहे। उनकी सक्रियता से कार्यपालिका, विधायिका या न्यायपालिका के कार्यक्षेत्र में कभी भी अतिक्रमण नहीं हुआ। लेकिन वे भारत की समस्याओं के लिये सदैव जागरूक बने रहे, लोकतंत्र को मजबूती देने के लिये उनके प्रयास जारी रहे। साहित्य, शिक्षा एवं चिन्तन के लिये वे एक-एक पल का उपयोग करते हुए दिखाई दिये। जैसे कि एस. राधाकृष्णन राष्ट्रपति बनने के बाद भी अकादमिक रूप से काफी सक्रिय थे। एपीजे कलाम राष्ट्रपति के रूप में काफी विजिबल और एक्टिव रहे।

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