लोकेन्द्र सिंह राजपूत

युवा साहित्यकार लोकेन्द्र सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में पदस्थ हैं। वे स्वदेश ग्वालियर, दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देशभर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समसाययिक विषयों पर आलेख, कहानी, कविता और यात्रा वृतांत प्रकाशित। उनके राजनीतिक आलेखों का संग्रह 'देश कठपुतलियों के हाथ में' प्रकाशित हो चुका है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, नागपुर महानगर द्वारा आयोजित बौद्धिक वर्ग में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का उद्बोधन

संकट को अवसर बनाकर हम एक नए भारत का उत्थान करें स्व-आधारित तंत्र के निर्माण और स्वदेशी के आचरण का...

सरसंघचालक परंपरा के आदर्श हैं डॉक्टर साहब

- लोकेन्द्र सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष 2025 में शतायु हो जाएगा। अपनी सुदीर्घ यात्रा में संघ ने आदर्श, अनुशासन, सामाजिक एवं व्यक्ति निर्माण के...

संभावना और चुनौतियों के बीच मूल्यानुगत मीडिया का आग्रह

- लोकेंद्र सिंह सक्रिय पत्रकारिता और उसके शिक्षण-प्रशिक्षण के सशक्त हस्ताक्षर प्रो. कमल दीक्षित की नयी पुस्तक ‘मूल्यानुगत मीडिया : संभावना और...

पत्रकारिता के रूप में पं. दीनदयाल उपाध्याय

- लोकेन्द्र सिंह पंडित दीनदयाल उपाध्याय बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। सादगी से जीवन जीने वाले इस महापुरुष में राजनीतिज्ञ, संगठन शिल्पी, कुशल...

अमरकंटक के अरण्य में विशाल शिला पर मिलेंगे ‘फरस विनायक’

- लोकेन्द्र सिंह पृथ्वी पर भगवान शिव का धाम (निवास) कहाँ है? यदि यह प्रश्न आपके सामने आएगा तो अधिक संभावना है...

धूनी-पानी : जहाँ धूनी रमाते हैं साधु नैसर्गिक सौंदर्य के मध्य स्थित तप-स्थली ‘धूनी-पानी’

- लोकेन्द्र सिंह किसी भी स्थान के नामकरण के पीछे कोई न कोई कहानी होती है। धार्मिक पर्यटन स्थल पर...

पत्रकारिता की प्राथमिकता को टटोलने का समय

हिंदी पत्रकारिता दिवस, 30 मई 1826 - लोकेन्द्र सिंह  'हिंदुस्थानियों के हित के हेत' इस उद्देश्य के साथ 30 मई, 1826 को भारत में हिंदी पत्रकारिता की...

केंद्र सरकार की योजनाओं का दस्तावेज है ‘विकास के पथ पर भारत’

- लोकेन्द्र सिंह लेखक और मीडिया शिक्षक डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक 'विकास के पथ पर भारत' केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का...

‘कर्मवीर’ संपादक माखनलाल चतुर्वेदी

- लोकेन्द्र सिंह आज की पत्रकारिता के समक्ष जैसे ही गोकशी का प्रश्न आता है, वह हिंदुत्व और सेकुलरिज्म की बहस में...

यदि गरीब लड़का शिक्षा के मंदिर न आ सके तो शिक्षा को ही उसके पास जाना चाहिए

- लोकेन्द्र सिंह  युवा नायक स्वामी विवेकानंद ऐसे संन्यासी थे, जो निरंतर समाज के उत्थान के लिए चिंतित रहते थे। दरअसल, स्वामीजी संन्यास...

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