लेखक परिचय

डॉ. मनीष कुमार

डॉ. मनीष कुमार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए, एमफिल और पीएचडी की उपाधि हासिल करने वाले मनीषजी राजनीतिक टिप्‍पणीकार के रूप में मशहूर हैं। इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया में लंबी पारी खेलने के बाद इन दिनों आप प्रिंट मीडिया में भी अपने जौहर दिखा रहे हैं। फिलहाल आप देश के पहले हिंदी साप्‍ताहिक समाचार-पत्र चौथी दुनिया में संपादक (समन्वय) का दायित्व संभाल रहे हैं।

क्या विदेशी नेता और विदेशी वोटर से चलेगा भारत का प्रजातंत्र?

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डॉ मनीष कुमार विपक्ष वैचारिक रूप से दरिद्र है ये तो सब पहले से जानते हैं. लेकिन, ये दरिद्रता इतने निम्न स्तर की है ये अब साफ साफ दिखने लगा है. NRC के मुद्दे पर विपक्ष की घृणित वोटबैंक राजनीति खुल कर सामने आ गई है. इनकी सत्ता की भूख ऐसी है कि इन्हें न… Read more »

अलीगढ़ में आरक्षण का मुद्दा – यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मास्टर स्ट्रोक है

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Dr. Manish Kumar उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जबरदस्त राजनीतिक चाल चली है. ये एक मास्टर स्ट्रोक है. क्यों उन्होंने राजनीति का एक ऐसा सवाल उठाया है जिससे कांग्रेस और वामपंथियों के न सिर्फ फर्जी सेकुलरिज्म का पर्दाफाश हो रहा है साथ ही इनके नकली दलित प्रेम की भी कलई खुल गई है…. Read more »



कश्मीर पर आई तथाकथित यूएन की रिपोर्ट एक साजिश है

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डॉ मनीष कुमार कश्मीर पर UN की ‘रिपोर्ट’ आई तो वामपंथी गैंग के चेहरे पर मुस्कान आ गई क्योंकि इनकी हिंदुस्तान को बदनाम करने की साजिश सफल हो गई. लेकिन इनकी खुशियां ज्यादा दिन तक टिकने वाली नहीं है. इस रिपोर्ट की सच्चाई समझने से पहले मोदी सरकार और बीजेपी को ये बताना जरूरी है… Read more »

पढ़े लिखे लोगों को मूर्ख बनाने की कला में माहिर है केजरीवाल

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डॉ मनीष कुमार एक पुरानी कहावत है, भैंस अगर पूंछ उठाएगी तो गोबर ही करेगी. लेकिन केजरीवाल के केस में ये कहावत केजरीवाल के मुंह पर लागू होती है. केजरीवाल एक पेशेवर झूठे व्यक्ति हैं. ये झूठ बोल कर लोगों को झांसा देने को ही वो राजनीति समझते हैं. वो एक आत्मकामी (narcissist) व्यक्ति है… Read more »

चार सालों में नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री बन कर उभरे हैं?

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डॉ मनीष कुमार मोदी सरकार के चार साल पूरे हो गए. पांचवां साल को चुनावी साल माना जाता है इसलिए ये वक्त सरकार के आंकलन का है. प्रधानमंत्री सरकार के मुखिया होते हैं. इसलिए, सबसे पहले नरेंद्र मोदी का आंकलन जरूरी है. इसके दो बिंदु हो सकते हैं. पहला, नरेंद्र मोदी के कामकाज का. दूसरा… Read more »

हिंदुस्तान में ये बचाएंगे प्रजातंत्र?

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DR. Manish kumar कर्णाटक की राजनीति में फिर से देवेगौड़ा के पुत्र कुमारास्वामी मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे. इसमें देश में प्रजातंत्र और सेकुलरिज्म को बचाने में जुटे नेता शामिल होंगे. महज दो चार दिन पहले देश में ऐसा लग रहा था कि प्रजातंत्र मरने वाला है. अगर कर्णाटक में बीजेपी की सरकार बन गई तो… Read more »

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को RSS एजेंट साबित करना चाहती है कांग्रेस?

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डॉ मनीष कुमार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना कोई मजाक है क्या? क्या अभी विपक्ष के नेताओं को डा. भीमराव अंबेडकर की बातें याद नहीं आती? हो सकता है विपक्ष में बैठे बैठ चार सालो में इनकी यादाश्त कमजोर हो गई लेकिन क्या बुद्धि भी मारी गई है. क्या उन्हें पता… Read more »

कांग्रेस की झूठ की फैक्टरी को सुप्रीम कोर्ट का तमाचा

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डॉ मनीष कुमार ये लोग कौन हैं.. जो जस्टिस लोया को इंसाफ दिलाने की खातिर सुप्रीम कोर्ट तक को चुनौती दे रहे हैं? चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भला बुरा कह रहे हैं? क्या ये जस्टिस लोया के दोस्त हैं? रिश्तेदार है? कुंभ के मेले में बिछड़े हुए रिश्तेदार हैं? जस्टिस लोया के क्या लगते… Read more »

हिंदुस्तान की राजनीति का शेर कौन है? लोमड़ी और भेड़िया कौन है?

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  जब से अमित शाह ने जानवरों से नेताओं की तुलना की तो विवाद बन गया. लेकिन इस पोस्ट का जानवरों से लेना देना नहीं है. शीर्षक में लिखे जानवरों के नाम पर न जाएं. ये किसी नेता को नीचा दिखाने के लिए नहीं बल्कि राजनीति शास्त्र के मानक सिद्धांतों पर नेताओं के वर्गीकरण का… Read more »

हिंदुत्व और आज़ादी की लड़ाई : इतिहास के नाम पर मिथक

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स्वतंत्रता संग्राम में किसने हिस्सा लिया? किस तरह से हिस्सा लिया? किसने क्या क्या कुर्बानी दी? किसने नहीं दी? इस पर विवाद या बहस करना उचित नहीं है क्योंकि उस संग्राम पर हर भारतीय का हक है. जिन लोगों ने उस वक्त अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन किया, जो भी योगदान दिया, वो हमारे लिए गर्व… Read more »