धर्म-अध्यात्म “आर्यसमाज वैदिक धर्म प्रचारक एवं समाज सुधारक संस्था है” March 3, 2019 / March 3, 2019 | Leave a Comment ओ३म् –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। आर्यसमाज ऋषि दयानन्द द्वारा चैत्र शुक्ल पंचमी तदनुसार 10 अप्रैल, 1875 को मुम्बई में स्थापित एक धार्मिक, सामाजिक, राष्ट्रवादी एवं वैदिक राजधर्म की प्रचारक संस्था व आन्दोलन है। ऋषि दयानन्द को आर्यसमाज की स्थापना इसलिए करनी पड़ी क्योंकि उनके समय में सृष्टि के आदिकाल में ईश्वर से प्रादुर्भूत सत्य […] Read more » Aryasamaj Establishment of Aryasamaj आर्यसमाज
समाज हम सभी स्वदेश एवं मातृभूमि के ऋण से ऋणी हैं” February 22, 2019 / February 22, 2019 | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य सभी मनुष्यों की कोई न कोई मातृभूमि होती है और वह किसी देश का नागरिक भी होता है। देश, मातृभूमि व उसकी जलवायु का हमारे जन्म, जीवन, शरीर के निर्माण व सुखों में बहुत बड़ा भाग होता है। मातृभूमि चेतन नहीं जड़ है तथापि इसका हमारे जीवन में जो महत्व है, उस […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ ऋषि दयानन्द क्या चाहते थे? February 22, 2019 / February 22, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द महाभारत के बाद विगत लगभग पांच हजार वर्षों में वेदों के मंत्रों के सत्य अर्थों को जानने वाले व उनके आर्ष व्याकरणानुसार सत्य, यथार्थ तथा व्यवहारिक अर्थ करने वाले ऋषि हुए हैं। महाभारत के बाद ऐसा कोई विद्वान नहीं हुआ है जिसने वेदों के सत्य, यथार्थ तथा महर्षि यास्क के […] Read more »
विविधा ईश्वर की आज्ञा पालन व उसकी प्राप्ति ही मनुष्य जीवन का लक्ष्य February 12, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य योनि सभी प्राणी-योनियों में सर्वश्रेष्ठ है। इसका कारण यह है कि मनुष्य को परमात्मा ने बुद्धि व हाथ आदि अंग देने के साथ शरीर की रचना इस प्रकार की है जिससे वह प्रायः स्व-इच्छित सभी कार्यों को कर सकता है। मनुष्य जो कार्य कर सकता है वह अन्य प्राणी योनियों […] Read more »
धर्म-अध्यात्म मनुष्य और जीवात्मा February 11, 2019 / February 11, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य दो पैर वाले प्राणी के जीवित शरीर को कहते हैं जिसके पास बुद्धि है, दो हाथ हैं, जो सोच-विचार कर सत्य व असत्य का निर्णय कर सकता है और जो ज्ञान व विज्ञान की उन्नति कर अपने जीवन को दुःखों से निवृत्त कर सुखों से युक्त कर सकता है। इसी […] Read more » जीवात्मा मनुष्य मनुष्य और जीवात्मा
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द व उनके अनुयायी अनेक विद्वानों ने वेदभाष्य का अविस्मरणीय कार्य किया February 11, 2019 / February 11, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द गृह त्याग कर देश भर के हिन्दू तीर्थ स्थानों पर गये। वहां उन्होंने विद्वानों व साधुओं से सम्पर्क कर अपनी शंकाओं का समाधान करने का प्रयास किया और उनसे ज्ञान प्राप्त करने का प्रयत्न किया। वह अनेक योगियों के भी सम्पर्क में आये और योग में कृतकार्य हुए। गुरु […] Read more » ऋषि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म क्या आप ईश्वर को जानते हैं? February 11, 2019 / February 11, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, प्रत्येक मनुष्य को यह ज्ञात होना चाहिये कि जिस संसार में हम रहते हैं, यह जड़ जगत अस्तित्व में कैसे आया है? इसका उत्तर ढूंढते हैं तो ज्ञात होता है कि यह सृष्टि मनुष्यों के द्वारा निर्मित नहीं है। मनुष्य इसे बना नहीं सकते। यदि बना भी सकते होते तो यह सृष्टि […] Read more »
धर्म-अध्यात्म शिवरात्रि मूलशंकर के लिये मोक्षदायिनी बोधरात्रि बनी February 11, 2019 / February 11, 2019 | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य सनातन धर्म सृष्टि के आरम्भ से प्रवृत्त धर्म है। इसका आधार वेद और वैदिक शिक्षायें हैं जो ईश्वर प्रदत्त होने से पूर्णतः सत्य पर आधारित हैं। वेद संसार में सबसे पुराने ग्रन्थ हैं इस कारण इन्हें पुराण भी कहा जाता है। वास्तविक पुराण वेद ही हैं। वेद में किंचित मानवीय इतिहास नहीं […] Read more »
धर्म-अध्यात्म होली एक धार्मिक अनुष्ठान एवं आमोद-प्रमोद का पर्व है February 8, 2019 | Leave a Comment नवसस्येष्टि आर्य पर्व होली पर– –मनमोहन कुमार आर्य आर्यावर्त उत्सवों व पर्वों का देश है। पर्व का अपना महत्व होता है। होली भी दीपावली, दशहरा, श्रावणी आदि की ही तरह एक सामाजिक एवं धार्मिक पर्व है। यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इसे मनाने की प्रासंगिकता व महत्व अन्य […] Read more »
धर्म-अध्यात्म “कोई सन्तान ईश्वर और अपनी माता-पिता के ऋण से उऋण नहीं हो सकतीं” February 5, 2019 / February 5, 2019 | Leave a Comment ओ –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। हमारे जीवन पर हमारे अतिरिक्त किसी अन्य का कोई अधिकार है या नहीं? इस प्रश्न का उत्तर हमें यह लगता है कि ईश्वर और हमारे माता-पिता का हमारे जीवन पर अनेक प्रकार से अधिकार है। इन्हीं के द्वारा हमें यह बहुमूल्य मनुष्य जीवन मिला है। हमें जीवन देने व […] Read more »
लेख मनुष्य की मृत्य क्यों होती है? February 4, 2019 / February 4, 2019 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य अपनी माता से इस संसार में जन्म लेता है। आरम्भ में शैशव अवस्था होती है। समय के साथ उसके शरीर व ज्ञान में वृद्धि होती है। वह माता की बोली को सुनकर उसे समझने लगता है व कुछ समय बाद बोलने भी लगता है। शैशव अवस्था बीतने पर किशोर व […] Read more »
धर्म-अध्यात्म वेद तथा वेदानुकूल ग्रन्थों पर आधारित धर्म ही सनातन धर्म है February 2, 2019 / February 2, 2019 | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य धर्म मनुष्यों वा स्त्री-पुरुषों द्वारा उन सद्गुणों के धारण व आचरण करने को कहते हैं जो सत्य पर आधारित हों, अज्ञान व अन्धविश्वास से सर्वथा रहित हो तथा जिनके आचरण से मनुष्य का इहलोक व परलोक दोनों सुधरता हो। ऐसा ही धर्म सृष्टि के आरम्भ काल से आर्यावर्त में प्रचलित रहा है […] Read more »