धर्म-अध्यात्म “देश और समाज को अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले आदर्श महापुरुष ऋषिभक्त स्वामी श्रद्धानन्द” November 15, 2018 / November 15, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द ने सत्यार्थप्रकाश में जिस प्राचीन वैदिक कालीन गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति का विवरण प्रस्तुत किया था उसे साकार रूप देने का स्वप्न उनके प्रमुख अन्यतम शिष्य स्वामी श्रद्धानन्द जी (पूर्वनाम महात्मा मुंशीराम) ने लिया था। उन्होंने इसके लिये अपना सर्वस्व अर्पण किया। इतिहास में शायद ऐसा उदाहरण नहीं मिलता। उन्होंने अपना […] Read more » तन धन मन स्वामी श्रद्धानन्द
धर्म-अध्यात्म “स्वाध्याय करने से ज्ञान प्राप्ति सहित आत्मिक व सामाजिक उन्नति” November 14, 2018 / November 14, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य की आत्मा अनादि, नित्य, अविनाशी एवं अमर है। एकदेशी होने से यह अल्पज्ञ है। हमें नहीं पता कि पूर्वजन्म में हम मनुष्य ही थे या किसी अन्य योनि में थे। इस जन्म में हमें पूर्वजन्म की किसी बात की याद नहीं है। मनुष्य का स्वभाव पुरानी बातों को भूलने का है। […] Read more » “स्वाध्याय करने से ज्ञान प्राप्ति सहित आत्मिक व ऋषियों सहित ऋषि दयानन्द पं. लेखराम सामाजिक उन्नति” स्वामी श्रद्धानन्द
धर्म-अध्यात्म “वेदों की अनमोल देन सब सुखों का आधार अग्निहोत्र यज्ञ” November 13, 2018 / November 13, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, वैदिक मान्यता के अनुसार मनुष्य जीवन चार आश्रमों में विभाजित है। ये आश्रम हैं ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। एक अरब छियानवें करोड़ से अधिक वर्षों के वैदिक युग में 8 से 12 वर्ष तक की आयु के बच्चे गुरुकुल में अध्ययन हेतु जाते थे। इससे पूर्व का उनका समय माता-पिता के […] Read more » “वेदों की अनमोल देन सब सुखों का आधार अग्निहोत्र यज्ञ” आयुवर्धक आरोग्यदायक पुष्टिकारक बलवर्धक विषनाशक
धर्म-अध्यात्म “महात्मा मुंशीराम एवं पं. लेखराम द्वारा सन् 1891 में हरिद्वार के कुम्भ मेले में धर्म प्रचार का विवरण” November 12, 2018 / November 12, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द (1825-1883) ने अपने जीवन काल में सन् 1867 और 1879 के हरिद्वार के कुम्भ मेलों में घर्म-प्रचार किया था। सन् 1883 में उनका देहावसान हुआ। देहावसान के 8 वर्ष बाद सन् 1891 में हरिद्वार में कुम्भ का मेला पुनः आया। तब तक आर्य प्रतिनिधि सभा, पंजाब के अतिरिक्त किसी अन्य […] Read more » आत्मानन्द जी ब्रह्मचारी नित्यानन्द जी ब्रह्मचारी ब्रह्मानन्द जी और पंडित आर्यमुनि स्वामी पूर्णानन्द जी स्वामी विश्वेश्वरानन्द जी
धर्म-अध्यात्म “सृष्टि की उत्पत्ति का कारण और कर्म-फल सिद्धान्त” November 12, 2018 / November 12, 2018 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हम इस विश्व के अनेकानेक प्राणियों में से एक प्राणी हैं। यह विश्व जिसमें असंख्य सूर्य, पृथिवी व चन्द्र आदि लोक लोकान्तर विद्यमान है, इसकी रचना वा उत्पत्ति किस सत्ता ने क्यों की, यह ज्ञान हमें होना चाहिये। महर्षि दयानन्द ने जहां अनेक प्रकार का ज्ञान अपने सत्यार्थप्रकाश आदि ग्रन्थों में दिया […] Read more » “सृष्टि की उत्पत्ति का कारण और कर्म-फल सिद्धान्त” अखण्डनीय अजन्मा अजर अनन्त अनादि अनुत्पन्न अमर अविनाशी नित्य निराकार सच्चिदानन्दस्वरूप सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान सर्वान्तर्यामी
धर्म-अध्यात्म समाज “गोवर्धन पूजा गोमाता सहित सभी पशुओं की रक्षा का पर्व है” November 9, 2018 / November 9, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, इस लेख में गोवर्धन पूजा पर्व की चर्चा कर रहे हैं। अतीत में इसके मनाये जाने के कारण कुछ भी रहे हों परन्तु वर्तमान समय में इसका सबसे अधिक सार्थक कारण गोमाता व अन्य पशुओं की रक्षा व उनके संवर्धन का व्रत लेने के रूप में ही अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। […] Read more » “गोवर्धन पूजा गोमाता सहित सभी पशुओं की रक्षा का पर्व है” क्रीम घृत छाछ दधि पनीर बकरी भेड़ भैंस व ऊंट मक्खन मट्ठा मिल्क केक
धर्म-अध्यात्म ‘ईश्वर हमें मृत्यु से हटाकर अमृत वा मोक्ष की ओर ले चले’ November 8, 2018 / November 8, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, संसार भौतिक प्रगति करते हुए प्रतिदिन नई-नई खोजें कर रहा है और मनुष्य जीवन को सुखी व सुविधाओं से युक्त कर दिन प्रतिदिन नये-नये उपकरणों का निर्माण कर रहा है। संसार में अध्यात्मवाद और भौतिक वाद पर दृष्टि डालें तो पाते हैं कि संसार में अध्यात्मिकता न के बराबर है। सर्वत्र भौतिकवाद […] Read more » ‘ईश्वर हमें मृत्यु से हटाकर अमृत वा मोक्ष की ओर ले चले’ आचार्य डॉ. रामनाथ ऋषि दयानन्द पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय पं. गुरुदत्त विद्यार्थी पं. लेखराम स्वामी दर्शनानन्द स्वामी विद्यानन्द सरस्वती स्वामी श्रद्धानन्द
धर्म-अध्यात्म “ऋषि दयानन्द न होते तो आज हम दीपावली न मना रहे होते” November 8, 2018 / November 8, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आज दीपावली का पर्व है। देश भर में व विदेश में भी जहां भारतीय आर्य हिन्दू रहते हैं, वहां दीपवली का पर्व मनाया जा रहा है। दीपावली शरद ऋतु में आश्विन मास की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। अमावस्या के दिन रात्रि में अन्धकार रहता है जिसे दीपमालाओं के प्रकाश से […] Read more » “ऋषि दयानन्द न होते तो आज हम दीपावली न मना रहे होते” अन्याय अपराध अभाव व अज्ञान आवास उपेक्षा छुआछूत पक्षपात भोजन वस्त्र शिक्षा व चिकित्सा शोषण
धर्म-अध्यात्म “ईश्वरीय ज्ञान वेदों का पुनरुद्धार, देश को आजादी का मूलमन्त्र तथा सामाजिक न्याय का सिद्धान्त ऋषि दयानन्द की देन है” November 8, 2018 / November 8, 2018 | 1 Comment on “ईश्वरीय ज्ञान वेदों का पुनरुद्धार, देश को आजादी का मूलमन्त्र तथा सामाजिक न्याय का सिद्धान्त ऋषि दयानन्द की देन है” मनमोहन कुमार आर्य, हम और सारा संसार ऋषि दयानन्द का ऋणी है। उनका ऋण ऐसा है कि जो कोई उतार नहीं सकता। उन्होंने संसार को सत्य ज्ञान दिया जो महाभारत युद्ध के बाद लुप्त होने के साथ अनेक विकृतियों से ग्रस्त हो गया था। वेदों के शुद्ध ज्ञान को प्राप्त करना सहज व सरल नहीं […] Read more » अज्ञान का निवारण अन्धविश्वास अन्धविश्वासों आजादी ऋषि दयानन्द फलित ज्योतिष महर्षि दयानन्द मूर्तिपूजा शिक्षा का प्रचार सामाजिक कुरीतियां
धर्म-अध्यात्म “ऋषि दयानन्द ने सभी मिथ्या आध्यात्मिक मान्यताओं एवं सभी सामाजिक बुराईयों का निवारण किया” November 8, 2018 / November 8, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, ऋषि दयानन्द सर्वांगीण व्यक्तित्व के धनी थे। आध्यात्मिक दृष्टि से उन्हें देखें तो वह आध्यात्म व योग के ऋषि कोटि के विद्वान थे। उनके सामाजिक योगदान पर दृष्टि डालते हैं तो वह पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने एक या दो सामाजिक दोषों पर ध्यान नहीं दिया अपितु सभी सामाजिक बुराईयों का उन्मूलन […] Read more » अध्यात्म आर्याभिविनय ईश्वर ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका ऋषि दयानन्द जीवात्मा ज्ञान पंचमहायज्ञविधि प्रकृति योग सत्यार्थप्रकाश
धर्म-अध्यात्म “ऋषि दयानन्द अमर हैं और हमेशा अमर रहेंगेः नवीन भट्ट” November 5, 2018 / November 5, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज ऋषि दयानन्द सरस्वती जी के कर कमलों द्वारा स्थापित आर्यसमाज है जिसकी स्थापना देहरादून के ऋषि भक्त पं. कृपाराम जी व उनके सहयोगियों के द्वारा 29 अप्रैल, 1879 को हुई थी। पं. कृपा राम जी आर्यसमाज के विख्यात विद्वान एवं संन्यासी पं. बुद्धदेव विद्यालंकार के नाना थे। आज समाज का साप्ताहिक […] Read more » “ऋषि दयानन्द अमर हैं और हमेशा अमर रहेंगेः नवीन भट्ट” अरविन्द ने महर्षि दयानन्द सच्चिदानन्दस्वरूप
धर्म-अध्यात्म “संसार की आदि भाषा संस्कृत कैसे अस्तित्व में आई” November 5, 2018 / November 5, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, संसार में अनेक भाषायें हैं। सबका अपना अपना इतिहास है। कोई भाषा अपनी पूर्ववर्ती किसी भाषा का विकार है व वह उसमें सुधार होकर बनी है तो कोई भाषा अनेक भाषाओं से शब्दों को लेकर व अन्य अनेक भौगोलिक आदि कारणों से अस्तित्व में आईं हैं। संस्कृत भाषा की बात करें तो […] Read more » “संसार की आदि भाषा संस्कृत कैसे अस्तित्व में आई” आदित्य व अंगिरा ऋग्वेद ऋषियों अग्नि यजुर्वेद वायु सामवेद तथा अथर्ववेद